नवादा: मां को हरा चुके JDU के कौशल यादव का रेप की सजा काट रहे राजवल्लभ की पत्नी से होगा मुकाबला

नवादा: JDU के कौशल यादव का राजवल्लभ की पत्नी से होगा मुकाबला

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    नवादा विधानसभा सीट कई मायनो में बहुत खास है। नवादा के मौजूदा विधायक और जदयू उम्मीदवार कौशल यादव ऐसे नेता हैं जो अपनी मां को हरा कर राजनीति में स्थापित हुए हैं। उनके माता-पिता दोनों विधायक रहे हैं। उनकी पत्नी अभी कांग्रेस की विधायक हैं। यानी एक ही परिवार से चार विधायक हुए। 2020 में कौशल यादव की टक्कर राजद की उस विभा देवी से है जिनके पति राजवल्लभ प्रसाद रेप के जुर्म में सजा काट रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में नवादा से राजद के राजवल्ल्भ प्रसाद जीते थे। लेकिन एक नाबालिग से रेप के जुर्म में राजवल्लभ को उम्रकैद की सजा हो गयी तो दिसम्बर 2018 में उनकी विधायकी खत्म हो गयी। 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही नवादा में उपचुनाव हुआ तो कौशल यादव ने जीत हासिल की। 2015 में कौशल यादव ने जदयू उम्मीदवार के रूप में हिसुआ सीट से चुनाव लड़ा जिसमें वे हार गये थे। 2015 में उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव कांग्रेस के टिकट पर गोविंदपुर से चुनाव जीती थीं। मौजूदा विधानसभा में कौशल यादव और पूर्णिमा यादव एकमात्र विधायक दम्पति हैं।

    सजायाफ्ता राजवल्लभ की पत्नी को टिकट

    सजायाफ्ता राजवल्लभ की पत्नी को टिकट

    राजद ने जब 2019 में विभा देवी को नावादा से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था तब लालू और राबड़ी की बहुत आलोचना हुई थी। विरोधी दलों ने आरोप लगाया था कि राजद अभी भी रेप के दोषी नेता को बढ़ावा दे रहा है। राजवल्लभ यादव के रेप जैसे घृणित अपराध में सजायाफ्ता होने से राजद की बहुत फजीहत हुई थी। वे बिहार के पहले विधायक हैं जिनको रेपकांड की वजह सदन की सदस्यता गंवानी पड़ी। लेकिन इसके बाद भी राजद ने राजवल्लभ की पत्नी विभा देवी को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया था। राबड़ी देवी जब विभा देवी का प्रचार करने नवादा गयीं थी तब उनकी बहुत हूटिंग हुई थी। आखिरकार विभा देवी चुनाव हार गयीं। उन्हें लोजपा के चंदन सिंह ने हराया था। राजद ने विभा देवी को एक बार फिर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। इससे पता चलता है कि रेप के सजायाफ्ता राजवल्ल्भ का राजद में कितना दबदबा है। राजवल्लभ 2015 में नवादा से जरूर जीते थे लेकिन कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव उन्हें इस सीट पर तीन बार हरा चुकी हैं। फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में पूर्णिमा ने निर्दलीय चुनाव जीता था तो 2010 में उन्होंने जदयू के टिकट पर कामयाबी पायी थी। पिछले चुनाव में नीतीश लालू के गठबंधन के चलते नवादा सीट राजद को मिल गयी थी और कौशल यादव को हिसुआ जाना पड़ा था। लेकिन अब कौशल नवादा लौट आये हैं जिससे राजद को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ेगा। विभा देवी को अपने पति राजवल्ल्भ के काले अतीत की की कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    कौशल यादव बनाम राजवल्ल्भ यादव

    कौशल यादव बनाम राजवल्ल्भ यादव

    राजवल्लभ और कौशल यादव दोनों एक राजनीति परिवार से ताल्लुक रखते हैं। राजवल्लभ यादव के पिता जे एल प्रसाद कांग्रेस के नेता थे। उनके भाई कृष्णा प्रसाद 1990 में भाजपा से विधायक थे। बाद में लालू ने कृष्णा प्रसाद को तोड़ कर जनता दल में मिला लिया था। राजवल्ल्भ पहले निर्दलीय विधायक बने। फिर वे लालू के करीबी बन गये। कौशल यादव के पिता युगल किशोर सिंह यादव 1969 में गोविंदपुर सीट से लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गये थे। इसके बाद कौशल यादव की मां गायत्री देवी राजनीति में उतरीं। वे 1972 में नवादा से कांग्रेस की विधायक बनी। फिर वे गोविंदगंज से 1980, 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गयीं। बाद में गायत्री देवी लालू यादव के साथ गयीं। सन 2000 में उन्होंने राजद के टिकट पर गोविंदगंज से चुनाव लड़ा और फिर जीत हासिल की। लेकिन फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में एक अनोखी स्थिति पैदा हो गयी। गोविंदगंज सीट पर राजद की सीटिंग विधायक गायत्री देवी चुनाव लड़ रही थीं। लेकिन जब उनके पुत्र कौशल यादव ने उनके खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की तो सारे लोग हैरान रह गये। बिहार में पहली बार कोई पुत्र अपनी मां को राजनीतिक चुनौती दे रहा था। मीडिया में बहुत दिनों तक ये खबर छायी रही थी। कौशल यादव अपनी मां को हरा कर निर्दलीय विधायक बने। इसके बाद कौशल यादव ने अक्टूबर 2005 में भी गोविंदपुर से निर्दलीय जीत हासिल की। 2010 का चुनाव उन्होंने जदयू उम्मीदवार के रूप में जीता। 2020 में कौशल यादव नवादा से ताल ठोक रहे हैं।

    एकमात्र विधायक दम्पति

    एकमात्र विधायक दम्पति

    2015 में जब कौशल यादव विधानसभा का चुनाव हार गये थे तब उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव को गहरा धक्का लगा था। पूर्णिमा यादव चुनाव जीत कर जब पहले दिन विधानसभा पहुंचीं तो वे इतनी मायूस हो गयीं कि रोने तक लगी थीं। 10 साल की अवधि में ये पहला मौका था जब वे बिना अपने पति के साथ विधानसभा पहुंची थीं। जब विधानसभा में पूर्णिमा की आंखों से आंसू छलक रहे थे तब उनके बगल में बैठी कांग्रेस की विधायक अमिता भूषण ने उन्हें दिलासा दे कर चुप कराया था। इसके बाद करीब दस दिनों तक वे विधानसभा नहीं जा सकी थीं। पूर्णिमा यादव ने इस बात का खुलासा तब किया था जब 2019 में उनके पति कौशल यादव नवादा उपचुनाव जीत विधानसभा पहुंचे थे। कौशल यादव और पूर्णिमा यादव अभी बिहार विधानसभा में एकमात्र विधायक दम्पति हैं। नावाद की चुनावी लड़ाई कौशल यादव और राजवल्ल्भ यादव परिवार के बीच ही रही है।

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