Bihar Chunav: अब RSS ने संभाला मोर्चा, बिहार विजय के लिए बूथ स्तर प्रचार समेत इन 5 रणनीति पर हो रहा काम
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के लिए जीत दोहराना चुनौतीपूर्ण है। बीजेपी इस बार खुद को मजबूत स्थिति में लाना चाहती है, ताकि नीतीश कुमार पर निर्भरता कम से कम रहे। महागठबंधन के आक्रामक चुनाव प्रचार को देखते हुए भी बीजेपी और जेडीयू के लिए यह चुनाव मुश्किल होता दिख रहा है। ऐसे वक्त में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मैदान संभाल लिया है। सूत्रों के मुताबिक संघ अब बूथ स्तर तक की रणनीति पर काम कर रहा है और इसके लिए 5 अहम कदम उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, आरएसएस ने कभी भी स्वीकार नहीं किया है कि सीधे तौर पर वह चुनाव में बीजेपी की मदद करते हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली के चुनाव में बीजेपी की सफलता के पीछे संघ की सक्रियता और जमीन स्तर पर कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। जानें बिहार के लिए संघ ने क्या रणनीति बनाई है:

Bihar Chunav 2025 में जीत के लिए संघ ने बनाई 5 रणनीति
बूथ स्तर पर सक्रियता: संघ ने बिहार में अपनी सक्रियता काफी समय पहले ही शुरू कर दी थी और अब हरियाणा और महाराष्ट्र की तर्ज पर हर विधानसभा सीट पर RSS कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है। इसके लिए बूथ समितियों का गठन कर घर-घर जाकर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए हर वोटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर माहौल बनाने के काम में जुट गए हैं।
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जातीय समीकरण साधना: बिहार की राजनीति में जातीय गणित अहम होता है। संघ ने कार्यकर्ताओं को जाति-आधारित समाज के प्रभावशाली लोगों से जुड़ने और संवाद बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके लिए खास तौर पर आर्थिक तौर पर पिछड़े, ओबीसी और दलित समुदाय के साथ संवाद की रणनीति तय की गई है। बिहार में MY समीकरण के तोड़ के तौर पर विराट हिंदुत्व और हर वर्ग को साथ लेकर चलने और अखिल राष्ट्रवाद के मुद्दे पर संघ का जोड़ रहेगा।
वैचारिक प्रचार: संघ के प्रचारक हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर आधारित जनसंवाद करेंगे। मंदिर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक सभाओं के जरिए समाज को जोड़ने की योजना है। सोशल मीडिया पर संघ और भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडे को ज्यादा से ज्यादा फैलाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रवासी और युवा मतदाताओं पर फोकस: तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर रोजगार और युवाओं के पलायन रोकने के मुद्दे पर जोरदार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसे देखते हुए युवाओं से चौपाल स्तर पर संवाद किया जाएगा। बड़ी संख्या में बाहर काम करने वाले बिहारियों से संपर्क अभियान शुरू होगा। युवाओं को आकर्षित करने के लिए रोजगार, शिक्षा और स्टार्टअप पर केंद्रित अभियान चलाया जाएगा। पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं को संघ का सबसे बड़ा टारगेट माना जा रहा है।
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विपक्ष की कमजोरियों को भुनाना: RSS कार्यकर्ताओं को विपक्ष की खामियों और असफलताओं को जनता के बीच ले जाने का टास्क दिया गया है। विशेषकर महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान और सीट शेयरिंग विवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।
RSS ने बिहार में तैयार की अपनी पूरी टीम
सूत्रों के मुताबिक, बिहार में आरएसएस ने इस 5 रणनीति को लागू करने के लिए बिहार को दो हिस्सों में बांटा गया है। उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार और इन दोनों हिस्सों को भी अलग-अलग उप क्षेत्रों में बांटा गया है। हर हिस्से के लिए एक प्रभारी नियुक्त किया गया है और उन्हें प्रचार अभियान चलाने के लिए एक समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम दी गई है। पिछले तीन महीनों में मोहन भागवत ने दो बार बिहार की यात्रा की है और आने वाले कुछ सप्ताह में संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदेश का दौरा कर सकते हैं।
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