Bihar Chunav 2025: बिहार के 15 राजनीतिक दलों पर गाज, चुनाव आयोग ने भेजी रिपोर्ट, होगा बड़ा फैसला, जानिए मामला
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में सक्रियता और निष्क्रियता दोनों ही दलों के भविष्य का फैसला करती हैं। अब राज्य के 15 निबंधित लेकिन निष्क्रिय राजनीतिक दलों पर चुनाव आयोग की गाज गिरने वाली है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इन दलों ने पिछले छह सालों यानी 2019 से अब तक किसी भी चुनाव-चाहे लोकसभा, विधानसभा या निकाय-में हिस्सा नहीं लिया है। यही कारण है कि इन पर निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कौन से दल हैं निशाने पर?
इन 15 दलों में कई ऐसे नाम हैं, जिनका जनता के बीच कोई खास राजनीतिक प्रभाव कभी नहीं दिखा। इनमें भारतीय आवाम एक्टिविस्ट पार्टी, भारतीय जागरण पार्टी, भारतीय युवा जनशक्ति पार्टी, एकता विकास महासभा पार्टी, गरीब जनता दल (सेक्युलर), जय जनता पार्टी, जनता दल हिंदुस्तानी शामिल हैं।
इसके अलावा लोकतांत्रिक जनता पार्टी (सेक्युलर), मिथिलांचल विकास मोर्चा, राष्ट्रवादी युवा पार्टी, राष्ट्रीय सद्भावना पार्टी, राष्ट्रीय सदाबहार पार्टी, वसुधैव कुटुंबकम पार्टी, वसुंधरा जन विकास दल और यंग इंडिया पार्टी शामिल हैं। इनमें से कई दल पंजीकरण के वक्त बड़े सपने दिखाकर राजनीति में आए थे, लेकिन न तो कोई जनाधार बना पाए और न ही चुनावी अखाड़े में उतरने का साहस दिखा सके।
क्या कहता है कानून?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को कई विशेष सुविधाएं मिलती हैं। इनमें चुनाव चिन्ह की उपलब्धता, बैंकिंग और फंडिंग से जुड़ी छूट, मीडिया कवरेज और राजनीतिक वैधता शामिल है। लेकिन यदि कोई पार्टी लगातार चुनावों से दूरी बनाए रखती है, तो उसकी मान्यता और सुविधाएं दोनों खत्म की जा सकती हैं।
यही कारण है कि आयोग ने इन दलों को कारण बताओ नोटिस भेजा था। हालांकि, अधिकांश दल न तो सीईओ कार्यालय पहुंचे और न ही उन्होंने कोई ठोस जवाब दिया। अब इनकी रिपोर्ट भारत निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है। वहां अंतिम निर्णय होगा कि इन्हें गैर-मान्यता प्राप्त दलों की सूची में रखा जाए या सीधा सूची से बाहर कर दिया जाए।
राजनीतिक संकेत और असर
इस कार्रवाई का बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि आयोग अब सिर्फ 'कागजी पार्टियों' को सहन नहीं करेगा। बिहार जैसे राज्य में पहले से ही 100 से अधिक छोटे-बड़े दल पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकांश का योगदान सिर्फ कागज पर दिखाई देता है। चुनावों के समय जनता को गुमराह करने या गठबंधन की राजनीति में सौदेबाजी करने के लिए ये दल इस्तेमाल होते रहे हैं।
आयोग की यह सख्ती आने वाले समय में ऐसे दलों की संख्या घटा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वास्तविक और सक्रिय राजनीति को बढ़ावा देगा। इससे उन दलों को मजबूती मिलेगी जो जमीन पर काम कर रहे हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। साथ ही, इससे चुनाव प्रक्रिया भी पारदर्शी होगी और 'फर्जी या निष्क्रिय दलों' की आड़ में होने वाली गड़बड़ियां कम होंगी।
चुनावी तैयारियों का दौर
इधर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में भी तेजी आ गई है। पटना में सहायक निर्वाची पदाधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। इस दौरान नामांकन प्रक्रिया, आदर्श आचार संहिता, ईवीएम-वीवीपैट का उपयोग, निर्वाचन व्यय प्रबंधन और मतगणना तक की बारीकियां समझाई जा रही हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने साफ किया है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी प्रशांत कुमार सीएच ने प्रशिक्षण स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
बिहार की राजनीति को नया दिशा
चुनाव आयोग की यह पहल बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे सकती है। निष्क्रिय दलों पर कार्रवाई से न केवल चुनावी अखाड़ा साफ होगा, बल्कि जनता को भी यह संदेश जाएगा कि लोकतंत्र में वही टिकेगा, जो सक्रिय रहेगा।
यह कदम छोटे लेकिन सक्रिय राजनीतिक दलों के लिए अवसर पैदा करेगा, जबकि सिर्फ नाम भर के लिए बने दलों की 'राजनीतिक दुकान' बंद हो सकती है। आने वाले दिनों में आयोग का अंतिम फैसला तय करेगा कि इन 15 दलों का राजनीतिक भविष्य बचा रहेगा या वे इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।












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