Bihar Chunav 2025: PK के निशाने पर नीतीश, BJP और कांग्रेस, क्या बिहार में बदलने लगा है सियासी समीकरण?
Bihar Election 2025 Updates: पूर्णिया के रूपौली मैदान से जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने जिस अंदाज़ में नीतीश सरकार, कांग्रेस और भाजपा, तीनों पर एक साथ निशाना साधा है, उससे साफ हो जाता है कि बिहार की राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
नीतीश कुमार पर PK का तंज सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि जनता की नब्ज़ को पकड़ने की कोशिश है। उन्होंने यह कहकर नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा किया कि "लोगों ने अभी वोट भी नहीं दिया, सिर्फ सभाओं में आना शुरू किया है और सरकार ने पेंशन, मानदेय, बिजली सब बढ़ा दिया।"

यह टिप्पणी दरअसल उस हड़बड़ी को उजागर करती है, जिसमें सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए फैसले लिए जा रहे हैं। सवाल यह है कि 18 साल तक जनता की समस्याओं को नज़रअंदाज़ करने वाली सरकार को अचानक इतना रहमदिल बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी? क्या यह जनता का डर है या सत्ता का मोह?
कटिहार में कांग्रेस सांसद तारिक अनवर के "राजशाही अंदाज़" और राहुल गांधी की "6 दिन की बिहार यात्रा" पर PK का व्यंग्य भी गंभीर संकेत है। कांग्रेस को उन्होंने यह संदेश दिया है कि जनता दिखावे और प्रतीकात्मक राजनीति से आगे बढ़ चुकी है। जन सुराज जैसे विकल्प का दावा करके PK ने विपक्ष की खाली जगह भरने का इरादा ज़ाहिर कर दिया है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उनकी प्रतिक्रिया में एक नई राजनीतिक दिशा झलकती है। आधार कार्ड को मान्यता मिलने के बाद उन्होंने आश्वस्त किया कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है और लोगों को डरने की ज़रूरत नहीं है। यह बयान सीधे तौर पर भाजपा की नागरिकता आधारित राजनीति पर चोट है।
दरअसल, PK धीरे-धीरे एक ऐसी राजनीतिक भाषा गढ़ रहे हैं जिसमें जनता की तकलीफें, नीतीश की थकान और विपक्ष की कमज़ोरी, सब कुछ शामिल है। उनके बयान संकेत दे रहे हैं कि 2025 का चुनाव सिर्फ गठबंधन की गणित पर नहीं, बल्कि जनता की बेचैनी और विकल्प की तलाश पर टिका होगा।
जनता वाकई जन सुराज के साथ है या नहीं, यह चुनाव बताएगा। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि PK के हमले नीतीश सरकार की सियासी बेचैनी को बढ़ा रहे हैं और परंपरागत दलों को चुनौती दे रहे हैं।












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