Bihar Chunav की चर्चा पाकिस्तान में, PM मोदी के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाते हुए पाक मीडिया क्या लिख रहा है?
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। पाकिस्तानी वेबसाइट डॉन (Dawn) ने बिहार चुनाव से जुड़ी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है, लेकिन एक विशेष 'प्रोपेगेंडा' एंगल के साथ।
डॉन ने दावा किया है कि यदि बिहार में NDA की सरकार नहीं बनती, तो केंद्र में नरेंद्र मोदी की अल्पमत सरकार के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि नीतीश कुमार की JDU और चंद्रबाबू नायडू की TDP के सांसदों पर मोदी सरकार का भविष्य टिका है। रिपोर्ट में राहुल गांधी की वापसी, 'वोट चोरी' के आरोप, और युवा मतदाताओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया है, जिससे यह चुनाव न केवल बिहार, बल्कि केंद्र की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है।

पाकिस्तान में बिहार चुनाव की चर्चा: 'डॉन' का मोदी सरकार पर प्रोपेगेंडा
बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है। पाकिस्तानी वेबसाइट 'डॉन' ने बिहार चुनाव को लेकर एक विस्तृत खबर प्रकाशित की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 'प्रोपेगेंडा' का स्पष्ट आरोप है। डॉन ने यह दावा किया है कि यदि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार नहीं बनती, तो इसका सीधा असर केंद्र में नरेंद्र मोदी की अल्पमत सरकार पर पड़ेगा और उसके लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। खबर में कहा गया है कि नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी के समर्थन पर ही मोदी सरकार का भविष्य टिका हुआ है, क्योंकि बीजेपी लोकसभा में बहुमत के आंकड़े से कम सीटों पर सिमट गई है।
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राहुल गांधी की वापसी और 'वोट चोरी' का मुद्दा
पाकिस्तानी वेबसाइट 'डॉन' की रिपोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीतिक वापसी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। 2024 के आम चुनावों में कांग्रेस की अच्छी वापसी और राहुल गांधी का लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनना उनके लिए एक बड़ी सफलता थी, जिसे सहयोगियों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का परिणाम बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल गांधी बिहार में भी बीजेपी को झटका देने की उम्मीद कर रहे हैं, जहां उन्होंने तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन किया है। खबर में राहुल गांधी द्वारा 'वोट चोरी' के मुद्दे को उठाने और चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का भी जिक्र किया गया है, जिससे विपक्षी ताकतों को एकजुट होने का मौका मिल रहा है।
'वोटर लिस्ट' में छेड़छाड़ के आरोप
डॉन की रिपोर्ट में विपक्ष के सबसे बड़े आरोपों में से एक मतदाता सूची में बदलाव को प्रमुखता से उठाया गया है। वेबसाइट का दावा है कि विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के विरोधियों, खासकर मुसलमानों, के नाम हटाकर भाजपा की मदद कर रहा है। इस मुद्दे ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसी विपक्षी शासित सरकारों को एकजुट कर दिया है, जिन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर इस आरोप को एक बड़े आंदोलन में बदलने का प्रयास किया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भाजपा शासित असम और त्रिपुरा को आगामी मतदाता सूची संशोधन से बाहर रखा गया है, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। यह मुद्दा चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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बिहार का युवा और जातीय गणित: केंद्र के लिए खतरे की घंटी
डॉन की रिपोर्ट में बिहार के युवा और जातीय समीकरणों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। बिहार की लगभग 58% आबादी 25 साल से कम आयु की है, जिसमें 1.47 मिलियन पहली बार मतदान करने वाले युवा (Gen Z) शामिल हैं। युवाओं के बीच रोजगार और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, जिन पर महागठबंधन और NDA दोनों जोर दे रहे हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिहार का यह चुनाव न केवल राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा, बल्कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की अल्पसंख्यक सरकार के लिए भी भविष्य की राह तय कर सकता है। यदि चुनाव परिणाम NDA के विपरीत आते हैं, तो यह केंद्र सरकार के लिए खतरे की घंटी होगी और चंद्रबाबू नायडू जैसे सहयोगी भी सख्त मोलभाव शुरू कर सकते हैं।
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