Bihar Chunav: बिहार चुनाव में जीत के लिए NDA ने झोंकी पूरी ताकत, गृहमंत्री अमित शाह करेंगे धुआंधार 25 रैलियां
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, एनडीए ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द कई चुनावी रैलियां करेंगे, जबकि गृहमंत्री अमित शाह तो खुद मैदान में उतर चुके हैं। शाह बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित करने के अलावा प्रचार रणनीति बनाने से लेकर बूथ लेवल मैनेजमेंट पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में शाह 25 से ज्यादा चुनावी सभाएं करने वाले हैं।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी 10 से 12 विशाल जनसभाओं को संबोधित करेंगे। अमित शाह 25 से अधिक रैलियों के जरिए चुनावी माहौल बनाएंगे। इसके अलावा, एनडीए के कई बड़े नेता भी चुनाव प्रचार में उतर सकते हैं। इसमें चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण जैसे नाम शामिल हैं।

Bihar Chunav में उतरेगी एनडीए की पूरी फौज
⦁ सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां 23 अक्टूबर से शुरू होंगी। उनका पहला चरण दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पटना में होगा। इसके बाद वे 1 नवंबर को छपरा, पूर्वी चंपारण और समस्तीपुर और 3 नवंबर को पश्चिम चंपारण, सहरसा और अररिया में सभाएं करेंगे।
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⦁ बीजेपी और जेडीयू पहली बार बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इसलिए दोनों दलों ने प्रचार में कोई ढिलाई नहीं छोड़ी है। केंद्रीय कैबिनेट के कई मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी प्रचार में उतरेंगे।
⦁ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पवन कल्याण ने कई रैलियां की थीं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, डिप्टी सीएम पवन कल्याण समेत एनडीए के नेता बिहार में चुनाव प्रचार करते नजर आ सकते हैं।
BJP के दिग्गज नेताओं को मिली है प्रचार की कमान
बीजेपी से जुड़े दिग्गजों का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह के अलावा बीजेपी के दिग्गज नेता जमकर चुनाव प्रचार करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, बिहार के बड़े नेता और सांसद अलग-अलग क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपने प्रचार अभियानों की शुरुआत कर चुके हैं। एनडीए का फोकस इस बार "डबल इंजन की सरकार, विकास और स्थिरता" के एजेंडे पर है, जबकि विपक्ष में महागठबंधन की आंतरिक कलह चुनावी नैरेटिव को कमजोर करती दिख रही है।
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