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Bihar Chunav: इन विधायकों का टिकट कटना लगभग तय! बिहार बीजेपी का नया 'टिकट फॉर्मूला' क्या है?

Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बजने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पटना में 4 अक्टूबर से शुरू हुई चुनाव समिति की महत्वपूर्ण बैठक में टिकट वितरण को लेकर जबरदस्त गहमागहमी है, जिसकी गूंज रविवार को भी सुनाई देगी।

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, सह प्रभारी केशव प्रसाद मौर्य और सीआर पाटिल, बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, और दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा सहित पार्टी के तमाम दिग्गज नेता मंथन कर रहे हैं। बीजेपी के भीतर इस बात पर जोरशोर से चर्चा है कि इस बार कई मौजूदा विधायकों का टिकट कटना लगभग तय है, क्योंकि पार्टी 'प्रदर्शन' और 'युवा जोश' को प्राथमिकता देने की तैयारी में है।

Bihar Chunav

बीजेपी का 'टिकट फॉर्मूला': किन कसौटियों पर परखे जाएंगे उम्मीदवार?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी उम्मीदवारों के चयन (BJP Ticket Distribution) में कई कड़े मापदंड अपना रही है, जिसके चलते मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना प्रबल हो गई है। पार्टी 'जीत की क्षमता' और 'जनता के बीच स्वीकार्यता' को सर्वोपरि रख रही है। टिकट कटने के संभावित मुख्य आधार इस प्रकार हैं।

  • बढ़ती उम्र: कई वरिष्ठ विधायकों को उनकी बढ़ती उम्र के कारण टिकट से हाथ धोना पड़ सकता है। पार्टी युवा चेहरों को मौका देकर संगठन में नई ऊर्जा का संचार करना चाहती है।
  • एंटी-इनकंबेंसी और जन-आक्रोश: जिन विधायकों के खिलाफ उनके क्षेत्र में जबरदस्त जन-आक्रोश और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर मौजूद है, सर्वे रिपोर्टों के आधार पर उनका टिकट काटना लगभग तय है। पार्टी ऐसे विधायकों पर कोई जोखिम नहीं लेगी जिनके कारण सीट गंवाने का खतरा हो।
  • पार्टी विरोधी गतिविधियां: जिन विधायकों ने पूर्व में पार्टी को कई मौकों पर धोखा दिया या विश्वास मत जैसे महत्वपूर्ण समय पर बगावती तेवर दिखाए, उनका टिकट कटना भी निश्चित माना जा रहा है। अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • गठबंधन का समीकरण और सीट अदला-बदली: कुछ सीटों पर गठबंधन के साथियों के साथ सीटों की अदला-बदली होने या समीकरण बदलने के कारण भी मौजूदा विधायकों को अपना टिकट गंवाना पड़ सकता है।
  • नए और मजबूत दावेदार: कुछ सीटों पर केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व सांसदों, मौजूदा MLC या अन्य मजबूत नए दावेदारों को मौका देने के लिए भी वर्तमान विधायकों का टिकट कट सकता है, ताकि पार्टी अधिकतम सीटें जीत सके।

70 पार के नेताओं पर तलवार: उम्र का फैक्टर

इस चुनाव में 70 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं का राजनीतिक भविष्य तलवार की धार पर है। पार्टी नेतृत्व युवाओं को मौका देने और नई ऊर्जा लाने के पक्ष में दिख रहा है।

  • अमरेंद्र प्रताप सिंह (77 वर्ष): आरा से पूर्व कृषि मंत्री और विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के भविष्य पर बैठक में गंभीरता से चर्चा हो रही है।
  • डॉ. सीएन गुप्ता (78 वर्ष): छपरा से विधायक डॉ. सीएन गुप्ता भी इस श्रेणी में आते हैं।
  • नंदकिशोर यादव (71 वर्ष): 7 बार विधायक रह चुके नंदकिशोर यादव पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं, खासकर तब जब वह खुद चुनाव समिति के सदस्य हैं।
  • प्रेम कुमार (70 वर्ष): गया टाउन विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक रह चुके और वर्तमान में बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री प्रेम कुमार भी इस श्रेणी में आते हैं। वे बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ विभिन्न विभागों में मंत्री पद संभाल चुके हैं, जो उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है। हालांकि, उनकी उम्र 70 वर्ष होने के कारण, पार्टी के नए आयु-सीमा मानदंड के तहत उनका टिकट भी कट सकता है, जो उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा झटका होगा।
  • राम नारायण मंडल (72 वर्ष): बांका से विधायक और अति पिछड़ा समाज से आने वाले ये नेता भी उम्र के पैमाने पर चुनौती का सामना कर रहे हैं।
  • राघवेंद्र प्रताप सिंह (73 वर्ष) और भागीरथी देवी (71 वर्ष): इन दोनों अनुभवी विधायकों का राजनीतिक भविष्य भी पार्टी के नीतिगत फैसले पर निर्भर करेगा।

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'गद्दारी' महंगी पड़ेगी: विश्वास मत में डोले विधायकों का कटेगा टिकट

पार्टी के प्रति निष्ठा और अनुशासन बीजेपी के लिए सर्वोपरि है, और इस कसौटी पर खरे न उतरने वाले विधायकों को अब कीमत चुकानी पड़ेगी। 2024 में नीतीश कुमार के विश्वास मत के दौरान जिन विधायकों ने बगावती तेवर अख्तियार किए थे या पाला बदलने की कोशिश की थी, उनका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे विधायकों ने पार्टी की एकजुटता और अनुशासन को खतरे में डाला, जिसे बीजेपी गंभीरता से ले रही है।

संदिग्ध निष्ठा वाले नाम: अलीपुर से मिश्रीलाल यादव, नरकटियागंज से रश्मि वर्मा और रामनगर से भागीरथी देवी जैसे नाम उस दौरान चर्चा में आए थे। भले ही भारी मशक्कत के बाद उन्होंने अंततः बीजेपी के पक्ष में मतदान किया, लेकिन उनके अस्थिर और डावांडोल रुख को पार्टी ने भूला नहीं है। लोरिया से विधायक विनय बिहारी को लेकर भी पार्टी के अंदर आशंकाएं हैं। उनके भविष्य का फैसला भी चुनाव समिति के लिए एक बड़ा मुद्दा है।

पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह किसी भी हाल में ऐसे चेहरों पर दांव नहीं लगाएगी, जिन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया या करने का प्रयास किया। आगामी चुनाव में केवल वही उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे जिन पर पार्टी पूरी तरह भरोसा कर सके।

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इन विधायकों का टिकट कटने की प्रबल संभावना

बिहार बीजेपी में टिकट वितरण के दौरान एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर एक बड़ा पैमाना बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे में कई मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता में जबरदस्त आक्रोश पाया है। ऐसे विधायकों का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी किसी भी स्थिति में वैसे चेहरों पर दांव नहीं लगाएगी, जिनके प्रति जनता में गहरा असंतोष है। इस श्रेणी में आने वाले प्रमुख नाम ये हैं।

  • राम सूरत राय
  • अरुण कुमार सिन्हा
  • तारकिशोर प्रसाद
  • उमाकांत सिंह
  • मिथिलेश कुमार
  • जयप्रकाश यादव
  • ब्यास सिंह
  • लाल बाबू प्रसाद
  • रामप्रीत पासवान
  • अनिल कुमार

इन विधायकों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर जनता का असंतोष इतना अधिक है कि पार्टी इन्हें दोबारा मौका देकर सीट गंवाने का जोखिम नहीं लेना चाहती। बीजेपी का लक्ष्य 2025 में अधिकतम सीटें जीतना है, और इसके लिए वह 'जिताऊ' कैंडिडेट पर ही दांव लगाएगी, भले ही इसके लिए कई मौजूदा विधायकों की छुट्टी करनी पड़े।

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