इतने बेचैन कभी न थे नीतीश कुमार, तेजस्वी के जन्म पर ही उठा दिए सवाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान का स्तर इतना गिर सकता है किसी ने सोचा नहीं होगा। नीतीश कुमार सुशासन बाबू कहे जाते रहे हैं। शब्दों को तोल-तोल कर बोलने वाले नेता रहे हैं। मगर, उन्होंने वैशाली के महनार में पहले चरण का चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले जो बयान दिया है वह कई कारणों से याद रखा जाएगा। नीतीश का बयान अपने साथी लालू प्रसाद का अपमान है, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का अपमान, अपने बच्चे के उम्र के तेजस्वी और उनके भाई-बहनों का अपमान है। यह एक स्त्री का भी अपमान है और चूकि मुख्यमंत्री हैं इसलिए इस पद की भी गरिमा को तार-तार कर देने वाला है।नीतीश कुमार ने जो कहा है पहले उसका जिक्र करना जरूरी है।

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    नीतीश ने क्या कहा है

    नीतीश ने कहा है, “किसी को प्रजनन दर के बारे में क्या मालूम है? आठ-आठ, नौ-नौ बच्चा बच्चा पैदा करता है। बेटी पर भरोसा ही नहीं, कई बेटियां हो गईं, तब बेटा पैदा हुआ। ये कैसे बिहार बनाना चाहते हैं? यही लोग आदर्श हैं तो सोचिए बिहार का क्या हाल होगा?”कुछ लोगों को इसमें तथ्यात्मक सच्चाई भी दिखती है। तथ्यात्मक सच बताने के लिए नितांत व्यक्तिगत उदाहरण देने की जरूरत नहीं होती। लालू-राबड़ी से नीतीश का रिश्ता इन बच्चों के जन्म के समय से है। इमर्जेंसी के दौरान पैदा हुई मीसा और उसके बाद जन्म लेने वाली लालू-राबड़ी की 9 संतानों में शायद ही कोई जन्मोत्सव हो जिसमें नीतीश कुमार नहीं गये हों।

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    बिहार में प्रजनन दर की गति

    ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब 2015 में भाभी के रूप में राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार को खुद खाना परोसकर खिलाया था।बिहार में प्रजनन दर की गति थामने के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने किया क्या है? एक भी काम अगर वो इस मकसद से गिना सकें। फर्टिलिटी रेट देश के जिन 8 राज्यों में 2.1 से ज्यादा है उनमें एक बिहार है। 2006 में यूपी और बिहार दोनों प्रदेशों में प्रजनन दर 4.2 था। 2018 में यूपी में प्रजनन दर गिरकर 2.9 पर आ गया। बिहार में अब भी यह दर 3.2 है। जवाब नीतीश को देना चाहिए कि यूपी जैसी घनी आबादी वाला प्रदेश जब प्रजनन दर नियंत्रित कर सकता है तो बिहार में ऐसा क्यों नहीं हो सका?यह जानकर आश्चर्य होगा कि लोकसभा में 149 सांसद ऐसे हैं जिनके 3 या 3 से अधिक बच्चे हैं। इनमें से भी 96 सांसद बीजेपी से हैं। 24 बीजेपी सांसदों के चार बच्चे हैं। 12 सांसदों की पांच संतानें हैं। एआईयूडीयू के सांसद बदरुद्दीन अजमल और अपना दल के पकौरी लाल के 7-7 बच्चे हैं। यह बात भी उल्लेखनीय है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 भाई बहन हैं।नीतीश कुमार जिस बीजेपी के साथ एनडीए में हैं वहां जन्मदर को लेकर क्या सोच है इस बारे में कभी नीतीश ने ध्यान दिया है?

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    पूर्व में बीजेपी सांसद का बयान

    जनवरी 2015 में बीजेपी सांसद सच्चिदानंद हरि उर्फ साक्षी महाराज ने बयान दिया था कि हिन्दुत्व की रक्षा के लिए हिन्दुओं को कम से कम 4 बच्चे पैदा करने चाहिए। विश्व हिन्दू परिषद की साध्वी प्राची, पूर्व विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया भी 4 बच्चों का समर्थन कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता श्यामल गोस्वामी ने 5 हिन्दू महिलाओं के लिए 5 बच्चे पैदा करना जरूरी बताया था।इलाहाबाद में माघ मेले के दौरान 2015 में बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने 10 की संख्या को गोल्डन नंबर बताया था। उन्होंने कहा था,“हिन्दुओं को बहुसंख्यक बनाए रखने के लिए हर हिन्दू परिवार को 10 बच्चों को जन्म देना चाहिए।”क्या नीतीश कुमार कभी ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया देंगे? अगर नीतीश की इस बात को मान लेते हैं कि लड़के की चाहत में लालू की 9 संतानें हुईं। फिर तेज प्रताप के बाद तेजस्वी का जन्म तो होना ही नहीं चाहिए था।

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    यह सच है कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक है। लड़कियों की दुर्दशा की भी बात सही है। मगर, स्थिति को ठीक करने के लिए चुनाव प्रचार और इस दौरान व्यक्तिगत टिप्पणी से क्या इस समस्या से लड़ने में कोई मदद मिलने वाली है?नीतीश कुमार का प्रजनन दर को लेकर लालू परिवार के लिए बयान बताता है कि चुनाव के दौरान उनकी जमीन खिसक चुकी है। इससे पहले जब तेजस्वी यादव ने सत्ता में आने पर 10 लाख रोजगार देने का वादा किया था। तब भी नीतीश कुमार ने तेजस्वी पर व्यक्तिगत हमले किए थे। उन्होंने कहा था कि रोजगार देते-देते तेजस्वी जैसे बेरोजगार अपने लिए ना नौकरी खोजने लग जाएं। उन्होंने तेजस्वी से यह भी जानना चाहा था कि नौकरी के बाद सैलरी देने के लिए पैसा कहां से आएगा? एक तरह से वे स्वीकार रहे थे कि नौकरी देना उनके वश की बात नहीं है। जब बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में साफ किया कि वह भी 19 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने जा रही है तब नीतीश यह नहीं पूछ पा रहे कि पैसा कहां से आएगा? तो, क्या मान लिया जाए कि नीतीश कुमार इतने बेचैन कभी न थे?

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