बिहार चुनाव 2020: क्या जानबूझकर नीतीश को नीचा दिखा रहे हैं नरेंद्र मोदी?

बिहार चुनाव 2020: क्या जानबूझकर नीतीश को नीचा दिखा रहे हैं नरेंद्र मोदी?

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने साथ मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपमान कर रहे हैं? जानबूझकर ऐसी बातें कह रहे हैं जिससे नीतीश कुमार की अपने बयान से पलटने वाली छवि सामने आए? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि 6 दिनों के भीतर मोदी-नीतीश ने जब-जब मंच साझा किया, तब-तब ऐसी बातें नरेंद्र मोदी ने कही जिससे नीतीश कुमार असहज हो गये। विपक्ष ने मजाक उड़ाया कि नीतीश को मोदी नीचा दिखा रहे हैं।

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    तारीख पूछने वाले भव्य मंदिर निर्माण पर ताली बजाने को मजबूर

    तारीख पूछने वाले भव्य मंदिर निर्माण पर ताली बजाने को मजबूर

    28 अक्टूबर को दरभंगा में नीतीश कुमार के साथ रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले भी आज ताली बजाने को मजबूर हैं। ऐसा कहते हुए उन्होंने इस बात की तनिक भी परवाह नहीं की कि बगल में बैठे नीतीश कुमार खुद इसका उदाहरण हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आखिरकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। राजनीति में जो लोग हमसे तारीख पूछा करते थे, वे आज ताली बजाने को मजबूर हैं। ये बीजेपी की, एनडीए की पहचान है- जो हम कहते हैं, करते हैं'। बीते चुनाव के दौरान महागठबंधन का हिस्सा रहे नीतीश कुमार ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी से क्या कहा था, वह आज भी लोग याद करते हैं। नीतीश कुमार ने 2015 में महागठबंधन में रहते हुए कहा था, 'बीजेपी और आरएसएस के लोग कहते रहे हैं- राम लल्ला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे'। नीतीश कुमार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का तारीख पूछने वाले नेताओं में शुमार किया जाता है। यह बात नरेंद्र मोदी को भी भलीभांति पता है। इसके बावजूद अगर वे ऐसा कर रहे हैं तो इसे अनजाने में कही गयी बात नहीं कही जा सकती।

    रैली में वंदेमातरम् क्यों नहीं बोल रहे हैं मोदी

    रैली में वंदेमातरम् क्यों नहीं बोल रहे हैं मोदी

    पीएम मोदी की स्क्रिप्ट तैयार करने के पीछे पूरी टीम होती है। नीतीश की मौजूदगी का भाषण में ख्याल रखा जाता है। यही वजह है कि पूरे बिहार दौरे में नरेंद्र मोदी ने नीतीश की मौजूदगी में वंदे मातरम् का नारा बुलंद नहीं किया है। ऐसा इसलिए कि यह नीतीश को पसंद नहीं है। जब नीतीश का इतना ख्याल रखा जा रहा है तो पीएम मोदी ने उन्हें ऐसी असहज स्थिति में क्यों डाला? यह माना नहीं जा सकता कि उन्होंने इसे अनायास कह दिया होगा।

    मोदी बोल रहे थे नीतीश चुप थे- 370 के विरोधी कैसे मांग रहे हैं वोट?

    मोदी बोल रहे थे नीतीश चुप थे- 370 के विरोधी कैसे मांग रहे हैं वोट?

    बीते हफ्ते 23 अक्टूबर को भी सासाराम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मंच साझा किया था। तब भी उन्होंने नीतीश कुमार के लिए असहज स्थिति पैदा की थी। नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'एनडीए सरकार ने आर्टिकल 370 को हटा दिया। ये लोग कहते हैं कि अगर ये वापस सत्ता में आए तो इसे दोबारा ले आएंगे। ऐसे बयान देने के बाद ये लोग बिहार में वोट मांगने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? क्या यह बिहार का अपमान नहीं है? ऐसा राज्य जो अपने बेटे-बेटियों को सीमा पर सुरक्षा करने के लिए भेजता है।' नरेंद्र मोदी ने ऐसा कहते हुए यह नहीं सोचा कि उनके बगल में मंच पर बैठे नीतीश कुमार उन लोगों में से ही हैं जिन्होंने आर्टिकल 370 का विरोध का था। वास्तव में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू आर्टिकल 370 हटाए जाने के विरोध में थे। मगर, जब यह कानून बन गया तो उनका रुख समर्थन करने वाला हो गया।

    संसद के दोनों सदनों में अनुच्छेद 370 पर जेडीयू वोटिंग से दूर रहा

    संसद के दोनों सदनों में अनुच्छेद 370 पर जेडीयू वोटिंग से दूर रहा

    जब 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से उसका विशेष दर्जा वापस लिया गया था और आर्टिकल 370 हटाया गया था, तब जेडीयू ने इसे गलत ठहराया था। पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में आर्टिकल 370 का समर्थन नहीं किया। पार्टी सांसद ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने 5 अगस्त 2019 को कहा था, 'हम इस फैसले से असहमत हैं। नीतीश कुमार ने इसका समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। यह एनडीए का एजेंडा नहीं है, बीजेपी का एजेंडा है। बीजेपी ने हमें कॉन्फिडेंस में नहीं लिया। सरकार ने हमसे कोई चर्चा नहीं की।' इससे पहले 21 फरवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था, 'धारा 370 का संविधान में प्रावधान है, आतंकी गतिविधियां रोकने के लिए धारा 370 को हटाने की जरूरत नहीं है। हम धारा 370 को हटाने के खिलाफ हैं।' जब संसद ने आर्टिकल 370 को वापस ले लिया, तब जेडीयू ने कहा कि अब बदलाव हो चुका है और संसद इस पर मंजूरी दे चुकी है इसलिए जेडीयू इस विषय पर किसी बहस के बजाए आगे कदम बढ़ाना चाहती है। सवाल यह है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विवशता को समझते हुए भी नरेंद्र मोदी ने ऐसे विषयों को चुना ही क्यों जिसमें नीतीश कुमार से सवाल दागे जा सकें? चिराग पासवान और तेजस्वी यादव समेत विपक्षी नेताओं ने कहा है कि पीएम मोदी ने जानबूझकर नीतीश को उनकी हैसियत बताने की कोशिश की है।

    नीतीश हॉर्डिंग्स से गायब भी हुए, लौटे भी

    नीतीश हॉर्डिंग्स से गायब भी हुए, लौटे भी

    एनडीए के हॉर्डिंग्स से नीतीश कुमार गायब हो गये थे। पहले चरण की वोटिंग के बाद यह ‘गलती' सुधार ली गयी है। मगर, सवाल यह है कि क्या ऐसा अनायास हो गया? या फिर यह सोची समझी रणनीति का हिस्सा है? बीते दिनों ऐसे हॉर्डिंग्स लगाए गये जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही गायब थे। हालांकि 28 अक्टूबर को पहले चरण के मतदान के बाद ताजा विज्ञापन में एक बार फिर नीतीश-मोदी साथ-साथ नज़र आए हैं। नीतीश कुमार से क्या नरेंद्र मोदी बदला ले रहे हैं? सोचिए कि अगर नीतीश कुमार किसी रैली में नरेंद्र मोदी के सामने कह दें कि मेरा राजनीतिक डीएनए खराब था तो मुझे एनडीए में रखा ही क्यों गया, तो क्या जवाब देंगे मोदी? मगर, नरेंद्र मोदी सियासत में इतने नादान भी नहीं हैं। अयोध्या पर तारीख वाले बयान पर बगैर नाम लिए नीतीश कुमार पर तंज कसने से पहले नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को भावी मुख्यमंत्री भी कहा और उनके कामकाज की तारीफ भी की। इस दोधारी सियासत से क्या बिहार विधानसभा का चुनाव एनडीए जीत पाएगा?

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