Bihar Assembly Election 2025: चुनावी माहौल को लेकर आयोग सतर्क, हेट स्पीच और फेक न्यूज पर EC की रहेगी पैनी नजर
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार के चुनाव में राज्य के चुनावी माहौल पर उसकी पैनी नजर बनी रहेगी। EC का इरादा तय है कि इस बार किसी भी तरह के हेट स्पीच, फर्जी खबरों और फेक प्रोपेगेंडा को बख्शा नहीं जाएगा। आयोग ने कहा है कि चुनावी माहौल को समान, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्च ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो चुनाव में राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया हैंडल और उस खर्चों की पूरी निगरानी के लिए पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।

इसके साथ ही, आयोग कानून-व्यवस्था पर भी पैनी नजर रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदर्श आचार संहिता लागू होते ही सभी राजनीतिक दल, उम्मीदवार और सरकार समान नियमों के तहत कार्य करेंगे, ताकि कोई भी पक्ष चुनावी लाभ न उठा सके।
क्या है आदर्श आचार संहिता ?
आचार संहिता लागू होते ही राज्य सरकार और सभी राजनीतिक दलों पर आचार नियंत्रण लग जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव समान और निष्पक्ष माहौल में हों। इस अवधि में सरकार केवल रूटीन प्रशासनिक कार्य ही कर सकती है। नई परियोजनाओं की घोषणा, वित्तीय निर्णय या किसी भी मंत्री का सरकारी दौरे पर प्रचार करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है।
साथ ही, सरकारी धन का उपयोग किसी पार्टी या उम्मीदवार के प्रचार में करना सख्त वर्जित है। सरकारी वेबसाइटों, मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी केवल समान और निष्पक्ष सूचना ही दी जा सकती है।
हेट स्पीच और फेक न्यूज पर निगरानी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि धर्म, जाति, संप्रदाय, भाषा या क्षेत्र के आधार पर वोट मांगना पूरी तरह से निषिद्ध है। किसी भी उम्मीदवार या पार्टी को मतदाताओं को लुभाने के लिए उपहार या पैसे देने की अनुमति नहीं है।
अब आयोग सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक एड्स और वीडियो संदेशों पर भी निगरानी रखेगा। सभी उम्मीदवारों को अपने डिजिटल प्रचार और खर्च का लेखा आयोग को देना होगा। यदि कोई फेक न्यूज या गलत सूचना फैलाता है तो आईटी कानून और निर्वाचन कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
यदि कोई उम्मीदवार या मंत्री आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो निर्वाचन आयोग उसे नोटिस जारी करके जवाब तलब कर सकता है। आयोग चाहे तो FIR दर्ज करवा सकता है या प्रचार पर प्रतिबंध लगा सकता है। कई मामलों में जुर्माना या नामांकन रद्द करने तक का प्रावधान है। आदर्श आचार संहिता का असली उद्देश्य यही है कि सत्ता का दुरुपयोग न हो और जनता अपने मत का प्रयोग बिना किसी दबाव के कर सके।
आचार संहिता लागू होते ही सरकार के अधिकांश राजनीतिक निर्णय रुक जाते हैं और राज्य की संपूर्ण निगरानी निर्वाचन आयोग के हाथ में आ जाती है। चुनाव आयोग का यह सख्त रुख यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता समान अवसर के साथ अपने मत का प्रयोग कर सकें और चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और लोकतांत्रिक रूप से संपन्न हो।
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