Bihar Voter: '15-20% लोग वोटर लिस्ट से छूट सकते हैं', ओवैसी का दावा, तेजस्वी बोले- चुनाव आयोग ही कन्फ्यूज है

Bihar Voter List Revision 2025: बिहार विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। जहां एक ओर विपक्षी दल इस कवायद को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा इसे सामान्य प्रक्रिया बता रही है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जो 10 जुलाई को इसकी सुनवाई करेगा।

तेजस्वी यादव का आरोप: चुनाव आयोग ही कन्फ्यूज है

राजद नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार 7 जुलाई को चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा, "हमारा गठबंधन चुनाव आयोग द्वारा जारी विरोधाभासी निर्देशों और विज्ञापनों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हमने 5 जुलाई को आयोग से मुलाकात कर सवाल पूछे, लेकिन आज तक हमें कोई स्पष्टता नहीं मिली। बिहार का चुनाव आयोग तो केवल डाकघर की तरह काम करता है, जो खुद कोई जवाब नहीं दे सकता। आयोग ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए, जो साबित करता है कि वह खुद कन्फ्यूज हैं।"

Asaduddin Owaisi

ओवैसी और AIMIM का दावा- 15-20% लोग वोटर लिस्ट से छूट सकते हैं

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और बिहार इकाई प्रमुख अख्तरुल इमान ने दिल्ली में चुनाव आयोग से सोमवार को मुलाकात कर इस प्रक्रिया पर रोक लगाने या समय बढ़ाने की मांग की। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "राज्य में 2% लोगों के पास पासपोर्ट है, केवल 14% लोग ग्रेजुएट हैं। करोड़ों प्रवासी मजदूरों, गरीबों और बाढ़ पीड़ितों के पास जन्म प्रमाणपत्र या अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। इस प्रक्रिया में 15-20% लोग वोटर लिस्ट से छूट सकते हैं, जो उनके नागरिक अधिकार और आजीविका दोनों पर असर डालेगा।"

ओवैसी बोले- हम वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन समय दिया जाना चाहिए

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''अगर 15-20% लोग भी लिस्ट से छूट गए तो वे अपनी नागरिकता भी खो देंगे। हम विशेष गहन पुनरीक्षण ( वोटर लिस्ट रिवीजन) के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन समय दिया जाना चाहिए।''

उन्होंने कहा,

''अगर किसी का नाम हटाया जाएगा तो वह व्यक्ति न सिर्फ अपना वोट देने से चूक जाएगा, बल्कि यह उसकी आजीविका का भी मुद्दा है। हमारा एकमात्र मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग इतने कम समय में इस तरह की कवायद को कैसे लागू कर सकता है? लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ेगा और हमने व्यावहारिक कठिनाइयों को उजागर करते हुए इन मुद्दों को चुनाव आयोग के सामने रखा है।''

भाजपा का पलटवार: "RJD और कांग्रेस मुस्लिम वोटरों को डरा रहे हैं"

भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा,

"वोटर वेरिफिकेशन चुनाव से पहले की नियमित प्रक्रिया है। अब जब मनोज झा और महुआ मोइत्रा सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं, तो क्या फर्क पड़ता है? यह प्रक्रिया सही मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करेगी। बिहार के वोटर भ्रमित नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस और RJD मुस्लिम वोटरों को डरा रही है कि उनके वोट रद्द हो सकते हैं। डरने की कोई जरूरत नहीं है।"

सुप्रीम कोर्ट की स्थिति: सुनवाई होगी लेकिन रोक नहीं

विपक्षी दलों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को सुनवाई तय की है। हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक (interim stay) लगाने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं में राजद सांसद मनोज झा, TMC नेता महुआ मोइत्रा, ADR, PUCL और योगेंद्र यादव शामिल हैं। इन सभी का कहना है कि चुनाव आयोग की इस त्वरित प्रक्रिया से लाखों लोगों के वोट कटने का खतरा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।

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