बिहारः दवा की दुकान पर कोरोना संक्रमित ने तड़प-तड़प कर तोड़ा दम, 4 घंटे तक पड़ी रही लाश
भागलपुर। बिहार में कोरोना वायरस का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में अब ऐसे हालात हो गए हैं कि लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। दरअसल, बिहार के भागलपुर जिले के दवाई पट्टी इलाके से कोरोना की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आप का दिल दहल जाएगा। दुकान पर इन्हेलर लेने पहुंचा कोरोना के मरीज ने वहीं पर दम तोड़ दिया। दवाई पट्टी इलाके में प्रसिद्ध दवा दुकान आत्माराम मेडिकल हॉल में मरीज इन्हेलर लेने पहुंचा था। शख्स सांस की बीमारी से भी पीड़ित था। युवक की मौत के बाद जब उसका टेस्ट किया गया तो वह कोरोना पॉजिटिव निकला।

दुकान में काफी भीड़ थी इसके चलते संक्रमित शख्स खड़ा था और अचानक काउंटर के आगे गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौत के बाद करीब4 घंटे तक शव दुकान के आगे ही पड़ रहा। लेकिन कोई उठाने के लिए सामने नहीं आया। बाद में स्थानीय पार्षद और डिप्टी मेयर राजेश वर्मा ने दो मजदूरों को पीपीई किट पहनाकर शव को उठवाया। घटना ने मानवीय संवदेनाओं को झकझोर दिया है। वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था और जिला प्रशासन पर भी इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है।
दवा दुकानदार कृष्ण कुमार ने मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों तक को फोन किया लेकिन किसी ने भी घटना की सुध नहीं ली। हालांकि बाद में कोरोना एंबुलेंस आई लेकिन वो अपना केस न बताकर मौके से चली गई। कोतवाली थाना पुलिस सहित पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे लेकिन शव उठाने की दिशा में किसी तरह की कवायद नहीं हुई।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई लेकिन किसी ने कोरोना संक्रमण के डर से उसे हाथ नहीं लगाया। शहर के डिप्टी मेयर ने ही पहल करते हुए शव को दुकान से हटवाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां शव का कोविड 19 का सैंपल लेने के बाद पोस्टमार्टम किया गया। टेस्ट के दौरान मृतक का कोरोना टेस्ट सैंपल पॉजिटिव पाया गया।
वहीं मृतक शख्स की पहचान 47 साल वर्षीय मो. तनवीर के रूप में की गयी जो शाहकुंड के खैरा गांव का रहने वाला था और 18 मई को ही दिल्ली से आया था। नगर विधायक अजित शर्मा ने सूबे की सरकार को जमकर कोसते हुए कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट हो चुकी है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के साथ केंद्रीय परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे पर भी निशाना साधा है। इस मामले में डिप्टी मेयर ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की व्यवस्था को आड़े हाथों लिया और इसे अमानवीय करार दिया।












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