Begusarai News: आशा दीदी और बाढ़ पीड़ितों की सेवा, लोगों ने कहा- मानदेय कम, जोखिम में जान, सरकार को शर्म तो...
Begusarai News: बिहार के विभिन्न ज़िलों से बाढ़ से त्राहिमाम की ख़बरे सामने आ रही हैं। वहीं प्रदेश की औद्योगिक नगरी बेगूसराय में भी बाढ़ का तांडव जारी है। जहां 6 अंचलों में दो लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी महकमों की टीम इनकी मदद के लिए मुस्तैद की गई है। जो कि दिन रात शिफ्टों में राहत बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
इसी बीच आशा कार्यकर्ताओं की भी ड्यूटी लगाई गई है, उनके वीडियो और तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें कई आशा वर्कर जान जोखिम में डालकर बाढ़ पीड़ितों के बीच स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं पहुंचा रही है। बछबाड़ा प्रखंड क्षेत्र के चमथा की आशा वर्कर निभा कुमारी और ममता कुमारी के की तस्वीर वायरल होने पर लोग तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रही हैं।

तस्वीरों पर लोगों ने कहा कि जान जोखिम में डालकर बाढ़ पीड़ितों के बीच स्वास्थ्य सेवा पहुंचा रही हैं। हर वह मुमकिन कोशिश की जा रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित नहीं हो, लेकिन इन आशा वर्करों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करेंगे तो आप भी हैरान हो जाएंगे।
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बिहार में आशा कार्यकर्ताओं को हर महीने 2,500 रुपये मानदेय मिलता है। इससे पहले, उन्हें एक हज़ार रुपये मानदेय मिलता था। आशा कार्यकर्ताओं को यह मानदेय बिहार सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दोनों की तरफ़ से मिलता है।
आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। प्रत्येक डिलीवरी पर 600 रूपिए का प्रोत्साहन राशि भी मिलती है। इन्हें न तो ज्यादा वेतन मिली है और न ही कोई अन्य सरकारी सुविधाएं। लेकिन बाढ पीड़ितों की मदद के लिए जैसे मोटा सैलरी ले रहे सरकारी अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वैसी ही इन लोगों की भी ड्यूटी लगी है।
आशा दीदी जान जोखिम में डालकर सेवा कर रही है, उन्हें मानदेय इतना कम मिल रहा है कि बोलने भी शर्म आती है। सरकार को शर्म तो आती नहीं, बसे आपदा में ड्यूटी लगाने आता है। इन लोगों का भी परिवार है, उनके गुज़ारे के लिए सरकार को कुछ पहल करना चाहिए।












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