‘Women Reservation’ पर CPI नेत्री डॉ. शगुफ्ता ताजवर ने कर दी ये मांग, केंद्र सरकार की मंशे पर उठाये सवाल
Women Reservation Bill, Dr. Shagufta Tajwar: महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस छिड़ी हुई है। संसद में ज़्यदातर दलों ने OBC का मुद्दा उठाया है। सियासी बयानबाज़ी के बीच CPI नेत्री डॉ. शगुफ्ता ताजवर ने वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही महिला आरक्षण पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
डॉ. शगुफ्ता ताजवर ने कहा कि महिला आरक्षण को बहुत पहले ही लागू कर दिया जाना चाहिए था। केंद्र की भाजपा सरकार को करीब साढ़े 9 साल पूरा होने वाले हैं। अगर सरकार चाहती तो यह बिल पहले ही ला सकती थी, लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले इस बिल को लाने का मकसद महिला मतदाताओं को लुभाना है।

चुनावी माहौल में महिला आरक्षण बिला लाना सिर्फ 'Political Stunt' है। 2024 तक इस बिल को अमलीजामा पहना मुमकिन ही नहीं हैं। इससे पहले गणना औऱ विभिन्न प्रकार के काम लंबित हैं, सरकार के उस काम को पूरा करने के बाद ही बिल पर विचार होगा।
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महिला आरक्षण बिल लाना अच्छा है, महिलाओं को देश की आधी आबादी तो कहा जाता है, लेकिन उन्हें वह आज़ादी नहीं है, जिनकी हक़दार हैं। आरक्षण मिलने से यह फ़ायदा होगा कि पहले के मुकाबले में महिलाओं को ज़्यादा प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।
सड़क से लेकर सदन तक महिलाओं की परेशानियों पर प्रकाश डाला जा सकेगा। महिलाओं को ही रही समस्याओं पर बात की जा सकेगी। आज की तारीख में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, सरकार को चाहिए कि आरक्षण से पहले महिला सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए।
महिलाएं महफ़ूज़ रहेंगी तभी तो आरक्षण का फ़ायदा उठा पाएंगे। फिल्हाल अभी जो महिला आरक्षण बिल आया है, यह सिर्फ महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए 'चुनावी लॉलीपॉप' है। केंद्र की भाजपा सरकार को महिलाओं की इतनी फिक्र है तो उन्हें महफ़ूज़ रखने की भी ज़िम्मेदारी निभाये। आए दिन महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं, खुलेआम वारदाते हो रही हैं, सरकार की निगाह उन वारदातों पर क्यों नहीं पड़ रही है।












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