Banmankhi Assembly Seat 2025: कांग्रेस का पुराना गढ़, BJP की नई ताकत, बेरोजगारी और बाढ़ पर होगा असली मुकाबला
Banmankhi Assembly Seat 2025: पूर्णिया जिले की बनमनखी विधानसभा सीट 2025 चुनाव में सिर्फ दलित आरक्षण वाली सीट नहीं, बल्कि बेरोजगारी, पलायन और बाढ़ की राजनीति का आईना बनकर सामने आ रही है। भाजपा के लिए यह गढ़ बचाना चुनौती है, वहीं महागठबंधन और जनसुराज के लिए यहां से 'बदलाव की बयार' बहाने का मौका।
बनमनखी विधानसभा सीट (SC आरक्षित) 2025 के चुनावी मौसम में फिर से सियासत का हॉटस्पॉट बनने जा रही है। 1962 से लेकर 1985 तक कांग्रेस का परचम लहराने वाली यह सीट 1990 के बाद भाजपा का गढ़ बन गई। आइए जानते हैं सियासी समीकरण?

5 बार से लगातार जीत रही भाजपा
बनमनखी विधानसभा सीट पर पिछले 4 चुनाव लगातार जीतकर भाजपा के कृष्ण कुमार ऋषि यहां का सबसे मजबूत चेहरा रहे हैं। लेकिन बेरोजगारी, बंद चीनी मिल, हर साल की बाढ़ और पलायन जैसे मुद्दों ने इस बार समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।
चुनावी समीकरण और संभावित उम्मीदवार
भाजपा (NDA)
वर्तमान विधायक कृष्ण कुमार ऋषि (2005 से लगातार विजेता) फिर से टिकट के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। अगर पार्टी बदलाव करती है तो किसी नए दलित चेहरे को उतार सकती है, लेकिन संभावना कम है क्योंकि ऋषि की पकड़ संगठन और कार्यकर्ताओं पर मजबूत है।
जदयू (NDA सहयोगी)
इस सीट पर जदयू का दावा नहीं बनता, लेकिन एनडीए गठबंधन समीकरण में सीट शेयरिंग को लेकर जदयू निगरानी जरूर रखेगा।
राजद (महागठबंधन)
2020 में यहां से उपेंद्र शर्मा लड़े थे और भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। 2025 में भी उनका नाम मजबूत दावेदारों में शामिल है। राजद यहां दलित + मुस्लिम समीकरण साधने की कोशिश करेगा।
कांग्रेस (महागठबंधन सहयोगी)
कांग्रेस का इस सीट पर पुराना इतिहास है (6 बार जीत), लेकिन 1985 के बाद जीत से दूर रही। यदि महागठबंधन में सीट कांग्रेस को मिलती है तो वह किसी युवा दलित चेहरे को उतारकर "पुराने गढ़ को वापस पाने" की कोशिश कर सकती है।
जनसुराज (प्रशांत किशोर)
जनसुराज संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय है। यदि जनसुराज मजबूत प्रत्याशी उतारता है तो त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है, खासकर युवा और पलायन से पीड़ित मतदाताओं को लुभाकर।
जातीय समीकरण
अनुसूचित जाति (SC)- सबसे निर्णायक वोट बैंक, क्योंकि सीट आरक्षित है।
मुस्लिम मतदाता- लगभग 18-20%। महागठबंधन के लिए अहम समर्थन आधार।
कुर्मी-कुशवाहा व अति पिछड़ा वर्ग- 15-18%, जो NDA और जनसुराज दोनों के लिए टारगेट रहेंगे।
प्रमुख चुनावी मुद्दे
बेरोजगारी और पलायन- चीनी मिल बंद होने से युवाओं को रोजगार नहीं, बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, पंजाब, मुंबई पलायन कर रहे हैं।
बाढ़ और आपदा प्रबंधन- कोसी और सहायक नदियों से हर साल भारी तबाही होती है।
कृषि संकट- 80% आबादी खेती पर निर्भर लेकिन बाढ़ और विपणन व्यवस्था की कमी से किसान परेशान।
इंफ्रास्ट्रक्चर- सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग।
धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान- भवानीपुर का नरसिंह मंदिर, जो यहां की आस्था का केंद्र है, चुनावी बयानबाजी में भी अहम जगह रख सकता है।
2025 की जंग: किसकी होगी बढ़त?
भाजपा के सामने चुनौती एंटी-इंकम्बेंसी और स्थानीय नाराजगी है। राजद-कांग्रेस के लिए यह सीट महागठबंधन की एकता और उम्मीदवार चयन पर निर्भर करेगी। जनसुराज यदि सही उम्मीदवार लाता है तो त्रिकोणीय मुकाबला पक्का है।












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