मां के पेट से ही पढ़ने लगा यह लड़का, आईआईटी भी निकाला
बिहार की शिक्षा व्यवस्था दिन पर दिन शर्मसार होती जा रही है। हर रोज कोई ना कोई ऐसे कारनामे सामने आते हैं जिससे बिहार की शिक्षा बदनाम हो जाती है।
पटना। बिहार की शिक्षा व्यवस्था दिन पर दिन शर्मसार होती जा रही है। हर रोज कोई ना कोई ऐसे कारनामे सामने आते हैं जिससे बिहार की शिक्षा बदनाम हो जाती है। एक बार फिर इसी तरह का एक मामला सामने आया है जहां एक छात्र का जन्म लेने के पहले से ही स्कूल में नामांकन हो गया। इस बात का खुलासा छात्र की मेडिकल जांच के बाद हुई।

पीएम मोदी को लिखे पत्र से खुला राज
मामला पटना के पिरबढ़ौना गांव का हैं जहां के रहने वाले दिलीप साह के पुत्र परमाणु कुमार ने 13 से 14 वर्ष की उम्र में ही इंटर की परीक्षा पास कर लिया। इतना ही नहीं परमाणु ने आईआईटी जेईई मेंस की परीक्षा में भी 47462वां रैंक ले आया। आर्थिक रुप से कमोजर परमाणु ने आगे की पढ़ाई के लिए पीएम मोदी को पत्र लिख सहायता मांगी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले में जिला अधिकारी को निर्देश देते हुए छात्र की मदद करने की बात कही। जिसके बाद पटना जिलाधिकारी ने छात्र को बुलाया। छात्र को देखकर जिलाधिकारी ने जब उम्र पूछा तो छात्र ने 18 वर्ष बताया। लेकिन डीएम को विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने मामले की अपनी स्तर से जांच कराई।

जांच में आया ये रिजल्ट
मेडिकल बोर्ड ने जब जांच की तो पता चला कि छात्र की वास्तविक उम्र 13 से 14 साल के बीच है। जबकि बिहार में नियम है कि 14 वर्ष से कम उम्र के10वीं की परीक्षा नहीं दे सकते। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया कि यह छात्र परीक्षा में कैसे शामिल हो गया। क्या जन्म लेने से पहले ही इसने स्कूल में अपना नामाकांन करा दिया था?

पिता ने बताई असली कहानी
बाद में पूछताछ में छात्र के पिता ने बताया कि परमाणु का वास्तविक जन्मतिथि 9 दिसंबर, 2002 है और परमाणु ने आठवीं तक नालंदा जिसे से पढ़ाई की थी। 2014 में परमाणु का 10वीं में एडमिशन करवाया जा रहा था लेकिन 11 साल की उम्र होने के कारण मास्टर एडमिशन नहीं ले रहे थे जिसके बाद परमाणु की उम्र बढाकर 9 दिसंबर, 1999 कर दिया गया था। फिर इसी जन्मतिथइ के साथ परमाणु ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की।












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