Matilda Kullu: फोर्ब्स की ताकतवर भारतीय महिलाओं की लिस्ट में आशा वर्कर का तीसरा स्थान, जानिए कौन हैं मतिल्दा
नई दिल्ली, 29 नवंबर: ओडिशा की एक आशा कार्यकर्ता ने भी फोर्ब्स की सबसे ताकतवर भारतीय महिलाओं की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021 लिस्ट में (Forbes India W-Power 2021) 21 महिलाएं, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य से लेकर अभिनेत्री रसिका दुग्गल जैसी हस्तियों के साथ ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले की आदिवासी 'आशा दीदी' मतिल्दा कुल्लू का नाम भी शुमार हैं।

मटिल्दा कुल्लू ने कोविड -19 में किया अहम काम
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव तहसील के गर्गडबहल गांव की 45 वर्षीय मटिल्दा कुल्लू पिछले 15 सालों से एक मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा कार्यकर्ता) के रूप में काम कर रही हैं। आशा दीदी के रूप में भी जानी जाने वाली मटिल्दा कुल्लू ने कोविड -19 से संबंधित इलाज और सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

4,500 रुपए प्रति माह कमाने वाली मटिल्दा कुल्लू
फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021 की लिस्ट उन महिलाओं को समर्पित है, जिन्होंने बाधाओं को पार किया है और नई उड़ान के साथ सबके सामने आई। आशा दीदी कुल्लू ने फोर्ब्स इंडिया महिला सशक्तिकरण की सूची में देश में तीसरा स्थान बनाया है। फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 4,500 रुपए प्रति माह कमाने वाली मटिल्दा कुल्लू ने बड़ागांव तहसील में 964 लोगों की देखभाल के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। उनके दिन की शुरुआत सुबह 5 बजे होती है। वह अपने घर के काम खत्म करती है और अपने परिवार के चार सदस्यों के लिए खाना बनाती है। इसी के साथ घर पर चार मवेशियों को देखभाल के बाद अपने आशा कार्यकर्ता से जुड़े कामों को करती हैं।

गांव के लोगों की बदली मानसिकता
जब मटिल्दा कुल्लू एक आशा कार्यकर्ता बनीं, तो उन्होंने देखा कि ग्रामीण बीमार पड़ने के बाद डॉक्टर को दिखाने की बजाय 'काला जादू करने वाले तांत्रिक' के पास जाते थे। वो लोगों को अस्पताल जाने की सलाह देती थी तो गांव के लोग उसकी हंसी उड़ाते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई क्योंकि उन्होंने किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए आवश्यक उपचारों और दवाओं के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करके ग्रामीणों की मानसिकता को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीण अब तांत्रिक के पास जाने के बजाय इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेते हैं।

कोरोना काल में किया लोगों को जागरूक
इतनी ही नहीं मटिल्दा कुल्लू रोजाना साइकिल चलाकर गांव में घर-घर जाकर लोगों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेती हैं। साथ ही महिला ग्रामीणों को नवजात एवं किशोरियों के टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच, प्रसव की तैयारी, गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार आदि की सलाह देती हैं। मटिल्दा कुल्लू उन महिलाओं को भी दवाएं देती हैं जिन्हें आधी रात में भी प्रसव पीड़ा का अनुभव होता है। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। वह कोविड -19 परीक्षण करने के लिए हर दिन 50-60 घरों का भी दौरा करती थीं।












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