झारखंड में 100 ओड़िया भाषा के स्कूल चला रही है ये संस्था, शिक्षकों को वेतन देती है ओडिशा सरकार
झारखंड। झारखंड में ओड़िया भाषा के स्कूलों की संख्या पिछले कुछ सालों में काफी कम हुई है और इसका नतीजा ये है कि छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा से दूर होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं छात्रों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से भी दूर होना पड़ रहा है, लेकिन अब इस समस्या को लेकर झारखंड में एक संस्था ने अच्छी पहल की है। दरअसल, उत्कल सम्मेलनी नामक राष्ट्रीय स्तर की संस्था झारखंड में ओड़िया भाषा के स्कूल चला रही है। इस संस्था के कोल्हान में करीब 100 स्कूल हैं, जहां ओड़िया भाषा में पढ़ाई कराई जाती है।

आपको बता दें कि इन स्कूलों में जो शिक्षक हैं, उनका वेतन और पाठ्य पुस्तक भी ओडिशा सरकार का शिक्षा विभाग उपलब्ध कराता है। इस पहल पर काम करने वाली संस्था का कहना है कि देश में शायद ही कोई ऐसी सरकार हो, जो इस तरह अपनी मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रही हो। उन्होंने बताया कि बिहार के विभाजन से पहले यहां ऐसे स्कूल थे, जिनमें ओड़िया और बांग्ला भाषआ सिखाई जाती थी। इन स्कूलों में मैट्रिक स्तर तक तो पढ़ाई होती ही थी, उच्च शिक्षा भी मिलती थी, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद ये स्कूल धीरे-धीरे कम होते चले गए हैं।
संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता रवींद्रनाथ सत्पथी का कहना है कि इस मुद्दे को जब जोरशोर से उठाया जाने लगा तो हमने तय किया कि राज्य में ओड़िया भाषा का प्रसार फिर से किया जाएगा और इसका नतीजा है कि आज पूर्वी सिंहभूम में 55, पश्चिमी सिंहभूम में 40 और सरायकेला-खरसावां जिले में करीब 20 स्कूल चल रहे हैं।












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