नवग्रह शक्तिपीठ प्राण प्रतिष्ठा: डबरा में 20 हजार महिलाओं की कलश यात्रा, डॉ केसवानी बोले- संतों का महासंगम
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ग्वालियर जिले का डबरा नगर 10 फरवरी से एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। यहां विश्व के पहले भव्य नवग्रह शक्तिपीठ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जो 10 से 20 फरवरी तक चलेगा।
इस अनूठे मंदिर में नौ ग्रह अपनी-अपनी पत्नियों के साथ विराजमान होंगे। इस विशेष अवधारणा के कारण डबरा नगर को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने की संभावना है।

नवग्रह के महत्व
सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। ये नौ ग्रह मनुष्य के जीवन, भाग्य, स्वास्थ्य, कर्मफल और मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालते हैं। मान्यता है कि ग्रहों की शुभ या अशुभ स्थिति जीवन की दिशा तय करती है।
नवग्रह और उनका संक्षिप्त परिचय
1. सूर्य - आत्मबल, नेतृत्व और ऊर्जा के प्रतीक
2. चंद्र - मन, भावनाओं और शांति के कारक
3. मंगल - साहस, शक्ति और पराक्रम का प्रतिनिधि
4. बुध - बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक
5. गुरु (बृहस्पति) - ज्ञान, धर्म और समृद्धि के प्रतीक
6. शुक्र - सुख, वैभव और दांपत्य जीवन के कारक
7. शनि - न्याय, कर्मफल और अनुशासन के प्रतीक
8. राहु - भौतिक इच्छाओं और रहस्यमय शक्तियों से जुड़ा ग्रह
9. केतु - आध्यात्मिकता, मोक्ष और वैराग्य का कारक
ज्योतिष के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल हो, तो जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि आती है। वहीं अशुभ ग्रह स्थिति बाधाएं, रोग और संघर्ष का कारण बन सकती है। इसलिए नवग्रहों की पूजा को जीवन में संतुलन, शांति और प्रगति का मार्ग माना जाता है।
10 से 20 फरवरी तक दिव्य महोत्सव
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि नवग्रह शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा का महाआयोजन 10 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। 10 फरवरी को स्टेडियम ग्राउंड से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नवग्रह शक्तिपीठ पहुंचेगी। इस यात्रा में लगभग 20 हजार से अधिक महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
देश-विदेश से संतों का आगमन
इस विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन में देश के प्रमुख मठों के शांकराचार्य, प्रमुख संत, कथावाचक और आध्यात्मिक विभूतियां शामिल होंगी। इनमें प्रमुख रूप से बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पंडित प्रदीप मिश्रा, प्रख्यात कवि कुमार विश्वास, दांती महाराज, पंडोखर धाम के गुरुशरण शर्मा, धूमेश्वर धाम, दंदरौआ धाम, रावतपुरा सरकार सहित कई संत-महात्मा शामिल रहेंगे।
कथा और अनुष्ठान का क्रम
- 11 से 13 फरवरी: पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा
- 14 से 16 फरवरी: कवि कुमार विश्वास की काव्य प्रस्तुति "अपने-अपने राम"
- 17 से 20 फरवरी: पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा एवं दिव्य दरबार
इसी अवधि में नौ मंजिला भव्य यज्ञशाला में प्रतिदिन प्रत्येक ग्रह देवता के लिए एक-एक लाख आहुतियां दी जाएंगी। संत बद्रीश जी महाराज एवं उनके 70 उपासक पूरे विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराएंगे, जबकि दांती महाराज दस दिनों तक विशेष साधना करेंगे।
देश और मध्यप्रदेश में खुशहाली का संदेश
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पूरा डबरा नगर एक परिवार की तरह इस आयोजन को सफल बनाने में जुटा हुआ है। उनका मानना है कि यह विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ न केवल डबरा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस शक्तिपीठ की स्थापना से देश और प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनेगा। यह आयोजन सनातन संस्कृति और ज्योतिष परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने का कार्य करेगा।
सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक : डॉ दुर्गेश केसवानी
उधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केसवानी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ मिश्रा के नेतृत्व और संकल्प के कारण डबरा में विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ साकार हो पाया है। डॉ. केसवानी ने कहा, "डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने हमेशा डबरा और पूरे मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक विकास को प्राथमिकता दी है। नवग्रह शक्तिपीठ का निर्माण उनकी दूरदर्शिता और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह शक्तिपीठ आने वाले समय में डबरा को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा और प्रदेश में पर्यटन, रोजगार तथा सांस्कृतिक जागरण को नई दिशा देगा।"












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