womens Day: कान्हा टाइगर रिजर्व में महिलाएं बनीं ‘ग्रीन सोल्जर्स’, जंगल और वन्यजीवों की संभाल रही जिम्मेदारी
Womens Day: 8 मार्च को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों, संघर्ष और समाज में उनकी बढ़ती भूमिका को सम्मान देने का अवसर है। इस वर्ष का थीम महिलाओं की बहुआयामी शक्ति को रेखांकित करता है, और भारत के हृदय में बसे मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कार्यरत महिला वनकर्मी, गाइड, ड्राइवर और अधिकारी इसका जीवंत उदाहरण हैं।ॉ
यहां की महिलाएं साहस, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ जंगलों की रक्षा कर रही हैं, वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं और प्रकृति संरक्षण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

कान्हा टाइगर रिजर्व, जो मंडला और बालाघाट जिलों में फैला हुआ है, भारत के सबसे पुराने और सफल टाइगर रिजर्वों में से एक है। यहां बंगाल टाइगर, बारासिंगा, तेंदुआ, स्लॉथ बियर जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण होता है। पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान रहे इस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने न केवल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों में सशक्तिकरण की नई लहर भी लाई है।
मुक्की जोन की आदिवासी महिलाएं: ड्राइवर, गाइड और गार्ड
कान्हा के मुक्की जोन में आदिवासी महिलाएं पारंपरिक बंधनों को तोड़ते हुए पुरुष-प्रधान कार्यों में आगे आ रही हैं। यहां दो महिला ड्राइवर, छह महिला गाइड और महिला फॉरेस्ट गार्ड तैनात हैं। ये महिलाएं जिप्सी ड्राइव करती हैं, पर्यटकों को सफारी पर ले जाती हैं, जंगल की पगडंडियों पर गाइड करती हैं और पैट्रोलिंग में हिस्सा लेती हैं। ये महिलाएं न केवल संरक्षण में योगदान दे रही हैं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2020 से अब तक 100 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग देकर कान्हा जैसे रिजर्व में तैनात किया गया है। ये महिलाएं जंगल में रात-दिन पैट्रोलिंग करती हैं, अवैध शिकार रोकती हैं और वन्यजीवों की निगरानी करती हैं।
लक्ष्मी मरावी: वन गार्ड से शिक्षिका तक
कान्हा टाइगर रिजर्व की एक प्रेरक कहानी है लक्ष्मी मरावी की। वे 12 वर्षों से फॉरेस्ट गार्ड हैं। बालाघाट के रेंजर कॉलेज में ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने खाकी वर्दी पहनी और जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन उनकी भूमिका यहीं नहीं रुकी-वे कान्हा के अंदर स्थित एक स्कूल की भी प्रभारी हैं। यहां वे बच्चों को पढ़ाती हैं और साथ ही प्रकृति शिक्षा (nature education) का प्रसार करती हैं। लक्ष्मी बताती हैं कि वन संरक्षण और शिक्षा दोनों उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। वे बच्चों को जंगल के महत्व, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाती हैं। उनकी दोहरी भूमिका महिलाओं की बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक है।
अन्य महिला वनकर्मी: साहस की मिसाल
- रेंजर सीता जमरा: वे कहती हैं कि कान्हा की महिलाएं हर ड्यूटी के लिए तैयार रहती हैं-चाहे पैट्रोलिंग हो या पर्यटक सफारी।
- पुष्प लता ताराम: वन रक्षक के रूप में काम करती हैं और प्रबंधन से मिलने वाले समर्थन की सराहना करती हैं।
- डीएफओ अमिथा के बी: वे बताती हैं कि कान्हा में महिलाओं की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ रही है-गाइड से लेकर गार्ड और ड्राइवर तक।
ये महिलाएं "ग्रीन सोल्जर्स" के रूप में जानी जाती हैं। वे जंगल में पैट्रोलिंग करती हैं, अवैध गतिविधियों पर नजर रखती हैं और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर संरक्षण कार्य करती हैं। उनकी मेहनत से कान्हा में टाइगरों की संख्या स्थिर और बढ़ रही है, जो भारत के टाइगर संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान है।
चुनौतियां और प्रेरणा
जंगल का जीवन आसान नहीं है। महिलाओं को जंगली जानवरों का खतरा, मौसम की मार, लंबी पैट्रोलिंग और कभी-कभी सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। फिर भी, वे डटकर काम करती हैं। मध्य प्रदेश वन विभाग ने महिलाओं को ट्रेनिंग, सुरक्षा और समर्थन प्रदान करके इस बदलाव को संभव बनाया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कान्हा की इन महिला वनकर्मियों की कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं-चाहे वह जंगल की रक्षा हो या समाज का निर्माण। उनकी समर्पण भावना प्रकृति संरक्षण के प्रति एक मजबूत संदेश है: जब महिलाएं आगे आती हैं, तो संरक्षण और सशक्तिकरण दोनों मजबूत होते हैं।












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