kuno:आखिर मातम में क्यों तब्दील हो रही कूनो के चीतों की कहानी ? पहले चीते अब शावकों की मौत से हर कोई हैरान

मादा चीता ज्वाला ने 29 मार्च को ही चार शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से आज दिनांक तक तीन शावकों की मौत हो चुकी है। इससे कूनो प्रशासन की जिम्मेदारियों पर अब एक बड़ा प्रश्न उठने लगा है।

Why three cubs died in Kuno National Park and how many cheetahs have died so far know reason

kuno national park sheopur: भारत में पिछले साल नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते लाए गए थे। जिन्हें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में छोड़ा था। उसके बाद मादा चीता ने चार शावकों को जन्म भी दिया तो लगने लगा कि अब भारत में चीते दोबारा बसने लगे है और अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं, लेकिन पिछले 2 महीने में लगातार चीते और शावकों की मौतों ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चीते भारत में दोबारा अपना कुनबा बढ़ा पाएंगे?

बता दे कि मंगलवार को कूनो नेशनल पार्क से दुखी कर देने वाली खबर सामने आई। दरअसल मादा चीता ज्वाला के दो और शावकों ने आज दम तोड़ दिया इससे पहले एक शावक ने 23 मई को दम तोड़ दिया था। फिलहाल अभी बचे हुए एक शावक का गंभीर रूप से इलाज जारी है। जिसमें नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीता विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। वही मादा चीता ज्वाला का स्वास्थ्य ठीक बताया जा रहा है।

क्यों हुई चीता शावकों की मौत ?

चीता विशेषता क्यों नहीं चीजों की मौत के पीछे यह वजह बताते हुए बताया कि 23 मई को ग्रीष्म ऋतु का सर्वाधिक गर्म दिन था। जहां टेंपरेचर लगभग 40 से 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। दिनभर अत्यधिक गर्म हवाएं, लू चलती रही। इसी वजह से शावकों की स्थिति खराब हुई। डॉक्टर के मुताबिक अभी बचे एक और शावक का गंभीर रूप से इलाज चल रहा है। उसे पालपुर स्थित चिकित्सालय में रखा गया है। जहां उसका नामीबिया एवं साउथ अफ्रीका के सहयोगी चीता विशेषज्ञों की मदद से उपचार किया जा रहा है। वही मादा चीता ज्वाला वर्तमान में स्वास्थ्य हैं। जिसकी सतत निगरानी की जा रही है।

दक्षिण अफ्रीका में चीता शावकों का जीवित रहने का प्रतिशत बहुत कम

चीता विशेषज्ञों की माने तो सभी चीता शावक कमजोर सामान्य से कम वजन एवं अत्याधिक डीहाइड्रेटेड पाए गए। मादा चीता ज्वाला हैंड रियर्ड है जो पहली बार मां बनी है। चीता शावकों की उम्र लगभग 8 हफ्ते हैं। इस अवस्था में चीता शावक सामान्यता जिज्ञासु होते हैं और मां के साथ लगातार चलते हैं। चीता शावकों ने अभी लगभग 8 दिन पूर्व भी मां के साथ घूमना शुरू किया था। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में चीता शावकों का जीवित रहने का प्रतिशत बहुत कम होता है। स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल अनुसार पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है।

मादा ने 29 मार्च को ही 4 शावकों को दिया था जन्म

गौरतलब है कि मादा चीता ज्वाला ने 29 मार्च को ही चार शावकों को जन्म दिया था। जिनमें से आज दिनांक तक तीन शावकों की मौत हो चुकी है। इससे कूनो प्रशासन की जिम्मेदारियों पर एक बड़ा सवाल उठने लगा है कि आखिर कूनो प्रशासन क्या कर रहा है। बता दे कूनो नेशनल पार्क में मरने वाले चीतों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। पिछले साल 17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे। इसके बाद साउथ अफ्रीका से भी चीतों की दूसरी खेप लाई गई थी। चीता प्रोजेक्ट के तहत इन सभी चीतों को चरणबद्ध तरीके से क्वॉरेंटाइन बाड़े में रखा गया था। उसके बावजूद लगातार चीतों की मौत हो रही है।

3 चीतों की भी हो चुकी है मौत

कूनो नेशनल पार्क में शावकों से पहले 3 चीतों की भी मौत हो चुकी है। दरअसल 9 मई को मादा चीता दक्षा घायल अवस्था में मिली थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया था। वहीं इससे पहले 23 अप्रैल को भी उदय नाम के चीते की मौत हो गई थी। उसके स्वास्थ्य में गड़बड़ी थी और उसे ट्रेंकुलाइज कर मेडिकल सेंटर लाया गया था। 26 मार्च को एक और मादा चीता की मौत हो गई थी। इस मादा चीता का नाम साशा था, जिसे किडनी में संक्रमण हो गया था। करीब 2 महीने चले इलाज के बाद उसे भी नहीं बचाया जा सका था।

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