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MP News: रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग युवक को जीआरपी आरक्षक ने क्यों पीटा, जानिए पूरी कहानी, VIDEO वायरल

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा रेलवे स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर) के मौके पर एक शर्मनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर सोए हुए एक दिव्यांग युवक को जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) के प्रधान आरक्षक मानसिंह ने सिविल ड्रेस में बुरी तरह पीट दिया।

वीडियो एसी कोच में बैठे एक यात्री ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद जीआरपी एसपी पद्माविलोचन शुक्ला ने आरक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया।

Video of GRP constable goes viral on Day of Disabled Persons incident at Nagda Railway Station

घटना मंगलवार सुबह करीब 10 बजे की है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि आरक्षक युवक को लातें मारते हैं, थप्पड़ लगाते हैं और अपमानित करते हैं, जबकि युवक अपना बैग समेटने की कोशिश में रोता नजर आ रहा है। यह घटना न केवल पुलिस की मनमानी को उजागर करती है, बल्कि दिव्यांगों के प्रति संवेदनहीनता को भी। वायरल वीडियो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री और जीआरपी के टैग के बाद कार्रवाई हुई। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए पूरी घटना, वीडियो का विवरण, पुलिस की सफाई और पीड़ित की कहानी।

घटना का पूरा घटनाक्रम: प्लेटफॉर्म पर सोया था युवक, आरक्षक ने लाठियां बरसाईं

नागदा रेलवे स्टेशन उज्जैन से करीब 60 किलोमीटर दूर है और एक व्यस्त जंक्शन है। मंगलवार सुबह प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक दिव्यांग युवक (नाम अज्ञात, उम्र 25-30 वर्ष) थका-मांदा सो रहा था। उसके पास एक पुराना बैग था, जो शायद उसका पूरा सामान था। युवक की शारीरिक विकलांगता स्पष्ट थी - वह लंगड़ाता हुआ था और चलने में कठिनाई महसूस कर रहा था।

सिविल ड्रेस पहने जीआरपी प्रधान आरक्षक मानसिंह (उम्र 45 वर्ष) ड्यूटी पर थे। वीडियो में दिख रहा है कि वे युवक के पास पहुंचे और बिना कुछ कहे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। युवक जागा तो आरक्षक ने उसके पैर पकड़कर लातें मारीं। युवक चिल्लाया, "सर, मैं कुछ नहीं किया, बस सो रहा था," लेकिन आरक्षक ने कहा, "प्लेटफॉर्म पर मत सो, हट जा!" युवक अपना बैग समेटने की कोशिश में रोने लगा, लेकिन आरक्षक ने फिर थप्पड़ जड़े और उसे धक्का देकर भगा दिया।

यह सब एक ट्रेन के एसी कोच में बैठे यात्री डॉ मिलिंद त्रिपाठी (उज्जैन) ने खिड़की से रिकॉर्ड कर लिया। डॉ. त्रिपाठी ने वीडियो को X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया और पीएम मोदी, रेल मंत्रालय, जीआरपी और सीएम मोहन यादव को टैग किया। वीडियो में आरक्षक की वर्दी नहीं दिख रही, लेकिन जीआरपी ने स्वीकार किया कि यह उनका ही कर्मचारी है। वीडियो की अवधि 28 सेकंड है, जिसमें युवक की पीड़ा साफ झलक रही है।

विपक्षी कांग्रेस ने इसे "मोहन यादव सरकार की विफलता" बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितू पटवारी ने ट्वीट किया, "दिव्यांगों के साथ यह व्यवहार? जीआरपी को सुधारो, वरना आंदोलन होगा।"

जीआरपी की कार्रवाई: तत्काल निलंबन, लेकिन पीड़ित की शिकायत?

जीआरपी एसपी पद्माविलोचन शुक्ला ने वीडियो वायरल होते ही दोपहर 2 बजे निलंबन आदेश जारी कर दिया। आदेश में लिखा है, "आरक्षक मानसिंह ने कदाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता बरती। वे इंदौर रेलवे पुलिस लाइन अटैच होकर मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के बिना कहीं नहीं जा सकेंगे।"

आरक्षक मानसिंह ने सफाई दी कि युवक नशे में था और गालियां दे रहा था। उन्होंने कहा, "युवक प्लेटफॉर्म पर अवरोध पैदा कर रहा था, मैंने सिर्फ हटाने की कोशिश की।" लेकिन वीडियो में ऐसा कोई संकेत नहीं दिखता। जीआरपी ने जांच के आदेश दिए हैं और पीड़ित युवक की तलाश शुरू कर दी है। स्टेशन मास्टर ने बताया कि युवक ने कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई, लेकिन अब उन्हें ढूंढकर मेडिकल चेकअप कराया जाएगा।

पीड़ित युवक की कहानी: कौन है वह, क्यों था प्लेटफॉर्म पर?

पीड़ित युवक की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वह उज्जैन जिले का ही निवासी है और मजदूरी करता है। वह ट्रेन से उतरकर थकान के कारण प्लेटफॉर्म पर सो गया था। युवक की विकलांगता पैर में है, जो बचपन से है। एक प्रत्यक्षदर्शी यात्री ने कहा, "वह कुछ चुरा नहीं रहा था, बस आराम कर रहा था। आरक्षक का गुस्सा देखकर डर लग गया।"

यह घटना दिव्यांगों के प्रति पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर करती है। मध्य प्रदेश में पहले भी जीआरपी पर ऐसे आरोप लगे हैं - जैसे अगस्त 2024 में कटनी में एक बुजुर्ग महिला और उसके पोते को पीटने का मामला।

राजनीतिक रंग: विपक्ष ने घेरा, सरकार ने सफाई दी

कांग्रेस ने इसे "पुलिस राज" का प्रतीक बताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, "दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग को पीटना शर्मनाक। जीआरपी को ट्रेनिंग दो, निलंबन से काम नहीं चलेगा।" भाजपा ने निलंबन को "तेज कार्रवाई" बताया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट किया, "इसकी कड़ी निंदा। जांच पूरी होने पर उचित कदम उठाएंगे।"

दिव्यांगों की सुरक्षा पर सवाल, कब सुधरेगी व्यवस्था?

नागदा स्टेशन की यह घटना पुलिस सुधार की मांग को तेज कर रही है। निलंबन तो हो गया, लेकिन पीड़ित को न्याय कब मिलेगा? क्या आरक्षक को सजा मिलेगी या यह सिर्फ कागजी कार्रवाई रहेगी? वनइंडिया हिंदी पीड़ित की तलाश और जांच पर नजर बनाए हुए है। क्या आपको लगता है जीआरपी को सख्ती से ट्रेनिंग की जरूरत है? कमेंट में बताएं।

(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता)

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