भोपाल गैस त्रासदी का जिन्न जागा, पीड़ितों के जख्म फिर हुए हरे

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भोपाल। वर्ष 1984 का दिसबंर माह। कौन नहीं जानता। जहां बैठे लोग वहीं के वहीं उनकी सांसे थम गईं। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सहित सैंकड़ों लोग कराहते हुए दम तोड़ गए। महज एक लापरवाही की वजह से। कई अनाथ हुए, कई लोग अपने जिगर के टुकड़ों की याद में अब भी सिसक रहे हैं। एक इंसाफ की आस में आंखों में आंसू भी सूख गए हैं। भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित परिवारों के। लेकिन इतने साल बाद इंसाफ तो दूर एक ऐसा फैसला आया कि जख्म फिर से हरे हो गए। अमेरिका की अदालत में भोपाल गैस त्रासदी पर एक फैसला आया है। अदालत ने भोपाल गैस त्रासदी के लिए लापरवाही की वजह से मुख्य रूप से आरोपी कम्पनी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन पर मुकदमा चलाने से मना कर दिया है। इसके बाद सैंकड़ों पीड़ित परिवारों को झटका लगा है।

नहीं सुनी भोपाल के पीड़ितों की गुहार

गैर सरकारी संगठन अर्थराइट्स इंटरनेशनल ने भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ित परिवारों की ओर से न्यू यॉर्क के एक जिले में एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि नागरिकों की जमीन और पानी संयंत्र के अपशिष्ट से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। जो जानलेवा है। पर हैरत है कि अमेरिकी अदालत के जज जॉन केन्नन ने फैसला देते हुए कहा है कि भोपाल में पीड़ितों की परेशानी के लिए कम्पनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। याचिका में पीड़ितों ने गुहार लगाई थी कि भोपाल में कम्पनी की साइट को साफ करने में यूनियन कार्बाइड की ओर से सहयोग किया जाए। लेकिन इस पर कोर्ट ने इससे इनकार करते हुए यूनियन कार्बाइड को राहत देदी।

पांच हजार लोग मारे गए

आपको बता दें कि भोपाल गैस त्रासदी में पांच हजार लोग मारे गए थे। और बचे हुए पीडि़त परिवार लगातार कई सालों से इंसाफ की मांग कर रहे हैं। लेकिन इंसाफ अभी तक नहीं मिल पाया है। गौरतलब है कि कम्पनी पर आरोप है कि उसने कम्पनी वहां गई तो उसने साइट से जहरीला कचरा साफ नहीं किया जिससे आज भी खतरा बना हुआ है।

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