MP Election 2023: दलबदलुओं के धरे रह गए अरमान, न मिला टिकट न मिला सम्मान, जानिए ऐसा क्यों हुआ
MP Election 2023: राजनीति में अब समाज सेवा से ज्यादा पद और प्रतिष्ठा के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसलिए टिकट नहीं मिलने पर कुछ नेता विचारधारा को छोड़, दल- बदल करने को तैयार रहते हैं। प्रदेश में कुछ नेताओं की स्थिति ऐसी ही है। ऐसे में उन पर बुंदेलखंड की कहावत फिट ना बैठ जाए "दोउ दीन से गए पांडे ना हलुआ मिला ना मांडे"।
दरअसल, कुछ नेता भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए, कुछ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए, कुछ अन्य दल छोड़कर बीजेपी या कांग्रेस में गए। उम्मीद थी कि टिकट मिल जाएगा, लेकिन हालत ने साथ नहीं दिया और अब जिस दिल में गए हैं। वहां भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया। अब अपनी राजनीति जमीन बनाए रखने के लिए इन्हें अपने आप में ही संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे ही कुछ नामो से आपको रूबरू कराते हैं।

कोलारस से टिकट की आस लगाए बैठे वीरेंद्र रघुवंशी
कोलारस से विधायक वीरेंद्र रघुवंशी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए। उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि उन्हें कांग्रेस में शामिल होने के बाद टिकट दिया जाएगा। उन्हें भी उम्मीद थी कि कांग्रेस की सदस्यता लेते ही वह शिवपुरी से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया और इस सीट से अपने सीनियर विधायक केपी सिंह कक्काजू को टिकट दे दिया। हालांकि रघुवंशी को टिकट नहीं मिलने पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा था कि हमने वीरेंद्र सिंह जी को टिकट का आश्वासन दिया था।
विरोध के बाद अवधेश नायक का छिन गया टिकट
भाजपा से राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद भी पार्टी छोड़कर टिकट की आस में कांग्रेस में आए अवधेश नायक के मुंह में आया निवाला भी छिन लिया गया। कांग्रेस ने उनको दतिया से प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के सामने उतरा था। लेकिन उनकी इतनी खिलाफत हुई कि उनका टिकट काटकर राजेंद्र भारती को टिकट दिया गया है। अब अवधेश नायक कांग्रेस के एक सिपाही बनकर रह गए हैं और चुनाव लड़ने की तमन्ना अधूरी रह गई।
विधायक संजीव कुशवाहा
भिंड से बसपा से पिछला चुनाव जीत संजीव कुशवाहा ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। पर गुरुवार को इस्तीफा भी दे दिया भाजपा ने अपनी कर लिस्ट में भिंड को छोड़कर रखा था। लेकिन पांच भी लिस्ट में यहां से नरेंद्र सिंह कुशवाहा को टिकट दिया गया है। नरेंद्र सिंह कुशवाहा को टिकट मिलते ही संजीव कुशवाहा के अरमानों पर पानी फिर गया। अब वह अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखने के लिए बीएसपी की शरण में गए और चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है।
आमला से टिकट की दावेदारी करने वाली पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे
राज्य प्रशासनिक सेवा की अवसर निशा बांगरे ने चुनाव लड़ने की चाह में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने अमला सीट को होल्ड पर कर दिया था। लेकिन इंतजार लंबा होता जा रहा था। अपना इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक गई। कांग्रेस ने अमला सीट से निशा बांगरे की जगह पर मनोज मालवे को उम्मीदवार बना दिया। इसके बाद निशा का इस्तीफा भी मंजूर हो गया। लेकिन कांग्रेस की प्रत्याशी संशोधन सूची में उनका नाम नहीं आया।
अब बांगरे ने कांग्रेस की सदस्यता तो ले ली, लेकिन कमलनाथ ने यह कहकर उनके चुनाव लड़ने की इच्छा पर पानी फेर दिया कि उनकी जरूरत आमला की जगह पूरे प्रदेश को है। निशा बांगरे को अभी भी उम्मीद है कि कोई चमत्कार हो जाएगा। इससे पहले निशा बांगरे ने कहा था कि वह हर हालत में चुनाव लड़ेंगी। अगर कांग्रेस से उनका टिकट नहीं मिलता है तो वह गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन कमलनाथ से मुलाकात के बाद उनके स्वर बदल गए।












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