दलित महिला से शादी करने के कारण अंतिम संस्कार कराने नहीं पहुंचे परिजन, समाजसेवियों ने कराई अंत्योष्टि
रायसेन के बेगमगंज में दलित महिला से शादी करने के कारण एक युवक के अंतिम संस्कार में उसके परिवार व गांव के लोग नहीं पहुंचे। ऐसे में नगर के समाजसेवियों ने ही युवक का अंतिम संस्कार किया।
रायसेन, 12 अप्रैल। भारत में जातिवाद कोई नया किस्सा नहीं है। हर दिन भारत में जाति के नाम पर भेदभाव और असमानता की खबरें देखने को मिलती रहती हैं। ऐसे ही रायसेन के बेगमगंज में दलित महिला से शादी करने के कारण एक युवक के अंतिम संस्कार में उसके परिवार के लोग ही शामिल नहीं हुए। ऐसे में नगर के समाजसेवियों ने युवक की अंत्येष्टि कराई। साथ ही ग्रामीणों को इंसानियत की शपथ भी दिलाई ।
भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। हर एक धर्म अनेक जातियों में बंटा हुआ है। जातिवाद एक ऐसा सिद्धांत है, जिसमें हर धर्म के व्यक्तियों द्वारा अपने धर्म और जाति को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यहीं से जातिवाद की समस्या पैदा होती है। अपनी जाति को दूसरी जातियों से सर्वश्रेष्ठ मानने के चक्कर में व्यक्ति दूसरी जातियों को अपनी जाति से हीन या कमतर मानने लगते हैं। यहीं से व्यक्ति के अंदर द्वेष की भावना उत्पन्न होती है।
ऐसे ही एक खबर मध्य प्रदेश के रायसेन के बेगमगंज से सामने आई है, जहां 10 वर्ष पहले एक दलित महिला से विवाह करने की वजह से युवक का अंतिम संस्कार कराने उसके परिवार के लोग ही नहीं, बल्कि गांव के लोग भी नहीं पहुंचे पहुंचे। ऐसे में बेगमगंज के कुछ समाजसेवियों ने मानवता को धर्म मानते हुए युवक की अंत्येष्टि कराई।
दरअसल, रायसेन जिले के हिनोतिया पचोरी गांव में गणेश कुशवाहा नामक युवक ने 10 साल पहले एक दलित महिला के साथ विवाह कर अपनी नई गृहस्थी बसा ली थी, जिससे नाराज परिवार और गांव वालों ने गणेश कुशवाहा से दूरी बना ली थी, लेकिन बीते दिनों गणेश कुशवाहा की मृत्यु हो गई तो उसका अंतिम संस्कार करने न परिवार के लोग आए और न ही ग्रामीण।
ऐसे में पंचायत सचिव सुखदेव शर्मा ने समाजसेवी बसंत शर्मा को इसकी सूचना दी, जिसके बाद बसंत शर्मा, उनके मित्र देवेंद्र कुशवाहा, नफीस गौरयान व अन्य साथियों को लेकर गांव पहुंचे। इस दौरान मृतक गणेश के घर में उसकी पत्नी अकेले रो रही थी और कोई नहीं था।
समाजसेवी बसंत शर्मा और उनके साथियों द्वारा अंतिम संस्कार की तैयारियां करते देख कुछ ग्रामीणों का दिल पसीजा और वह आगे आकर उनका साथ देना लगे। ग्रामीणों ने समाजसेवियों को धन्यवाद दिया। इसके बाद सभी ने उक्त व्यक्ति के शव को कंधा देकर सम्मान पूर्वक अंतिम संस्कार किया।
अंतिम संस्कार के बाद पंचायत सचिव ने युवक के परिजनों को ₹5000 की अंत्येष्टि सहायता प्रदान की। वहीं समाजसेवी बसंत शर्मा ने कहा कि मानव धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है।













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