Dead Body Found in Bhopal : फ्लैट में पलंग के नीचे दफन था शव, 6 माह तक किसी को नहीं चला पता
Bhoapl News, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना इलाके के बंद फ्लैट में शव मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पलंग के बॉक्स में कपड़ों के बीच लपेटकर रखा गया यह शव करीब छह माह पुराना बताया जा रहा है। फिलहाल शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है। शव महिला का है या पुरुष का। इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट व डीएनए टेस्ट से ही लग पाएगा।

पुलिस ने फ्लैट से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि फ्लैट की पूर्व मालकिन व उसका बेटा भी पिछले छह माह से लापता बताए जा रहे हैं। साउथ एसपी सम्पत उपाध्याय के अनुसार अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि परिवहन विभाग में पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति पर लगी लिपिक विमला श्रीवास्तव ने वर्ष 2003 में बीडीए से यह फ्लैट लिया था। फ्लैट में विमला और उसका बेटा अमित श्रीवास्तव रहते थे।

जून 2018 में साढ़े छह लाख रुपए में बेचा फ्लैट
मूलरूप से ग्वालियर निवासी विमला श्रीवास्तव से यह फ्लैट नेहरू नगर निवासी होटल व्यवसायी रामवीर सिंह को जून 2018 में साढ़े छह लाख रुपए में बेच दिया था। इसके बाद रामवीर सिंह का परिवार अपने घर पर शादी समारोह में व्यस्त हो गया। छह माह तक नए फ्लैट में कोई नहीं गया। इस बीच विमला श्रीवास्तव व उसके बेटे अमित से भी इनकी मुलाकात नहीं हुई।

सफाई करने आए मजूदर तो हुआ खुलासा
हालांकि रामवीर सिंह के पास फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी थी, जिसे लेकर रविवार को दोपहर उनका बेटा अमित सिंह राजपूत फ्लैट की साफ सफाई करवाने आया था। वह अपने साथ मजदूर भी लेकर आया। फ्लैट की सफाई के दौरान दीवान पलंग का बॉक्स खोलकर देखा तो अमित व मजदूरों के होश उड़ गए। बॉक्स में शव पड़ा था, जो ममी जैसा रूप ले चुका था। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। मौके से एफएसएल टीम ने भी साक्ष्य उठाए हैं।

पड़ोसियों को नहीं आई दुर्गंध
फ्लैट के पलंक के नीचे दफन शव की किसी को भनक तक नहीं लगी थी। पड़ोसियों को दुर्गंध भी नहीं आई। इस संबंध में एफएसएल के एक्सपर्ट वरिष्ठ वैज्ञानिक डीएसपी डॉक्टर डीके शर्मा ने मौका मुआयना करने के बाद मीडिया को बताया कि शव रखने से पहले उसके नीचे गद्दा बिछाया गया था। फिर शव को चददर में लपेट कर अन्य कपड़ों में छुपाकर रखा गया। इससे न तो शव में कीड़े लगे और ना बाहर दुर्गंध आई। शव ममी का रूप ले चुका था। उसका सिर्फ ढांचा ही शेष बचा है।












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