MP News: शिवपुरी अपर कलेक्टर न्यायालय के स्टेनो मोनू शर्मा 5,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
MP News: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की मुहिम तेज हो गई है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के सख्त निर्देशों पर ग्वालियर लोकायुक्त इकाई ने शिवपुरी अपर कलेक्टर न्यायालय में पदस्थ स्टेनो मोनू शर्मा (पिता सुरेश शर्मा) को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया।
आरोपी ने पैतृक जमीन में नाम सुधार के काम के एवज में आवेदक ध्यानेंद्र सिंह पड़रिया से कुल 20,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। पहले दो किस्तों में 15,000 रुपये ले चुका था और आज शेष 5,000 रुपये अपर कलेक्टर न्यायालय के कक्ष में ही लेते धर दबोचा गया।

यह ट्रैप 11 दिसंबर 2025 को सफल हुई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त SP ने कहा, "सरकारी कार्यालयों में घूसखोरी बर्दाश्त नहीं होगी। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए चेतावनी है।"
ट्रैप का पूरा घटनाक्रम: शिकायत से कोर्ट रूम में गिरफ्तारी तक
आवेदक ध्यानेंद्र सिंह पड़रिया (उम्र 35 वर्ष, व्यवसाय खेती, निवासी श्रीपुरचक्क, तहसील रन्नौद, जिला शिवपुरी) पैतृक जमीन में नाम सुधार के लिए अपर कलेक्टर न्यायालय शिवपुरी गए थे।
रिश्वत की मांग: स्टेनो मोनू शर्मा ने काम कराने के लिए 20,000 रुपये मांगे। पहले किस्त में 5,000 रुपये, फिर मांग वार्ता में 10,000 रुपये ले लिए।
शिकायत: 9 दिसंबर 2025 को ध्यानेंद्र ने ग्वालियर लोकायुक्त SP को शिकायत की। सत्यापन में मांग सही पाई गई।
ट्रैप प्लान: शेष 5,000 रुपये लेने की बात तय हुई। आरोपी ने ध्यानेंद्र को अपर कलेक्टर न्यायालय के कक्ष में बुलाया।
गिरफ्तारी: ट्रैप टीम ने कोर्ट रूम के आसपास घेराबंदी की। जैसे ही मोनू शर्मा ने रिश्वत ली, टीम ने उन्हें दबोच लिया। नोटों पर चूना-पाउडर के निशान मिले।
आरोपी मोनू शर्मा (निवासी शिक्षक कॉलोनी, डबरा, जिला ग्वालियर) अपर कलेक्टर न्यायालय शिवपुरी में स्टेनो हैं। जांच में पता चला कि वे फाइलें आगे बढ़ाने के नाम पर अक्सर घूस मांगते थे।
लोकायुक्त ट्रैप टीम की सराहनीय भूमिका
- ट्रैप टीम में शामिल रहे:
- - DSP विनोद कुशवाह
- - निरीक्षक अभिषेक वर्मा
- - निरीक्षक केपीएस बैन
- - प्रधान आरक्षक मनोज कुशवाह
- - आरक्षक राजेंद्र कुमार, प्रशांत सिंह, विनोद शाक्य, रवि सिंह
- - वाहन चालक बलवीर सिंह, विशंभर
DSP विनोद कुशवाह ने कहा, "आवेदक की हिम्मत और टीम की प्लानिंग से ट्रैप सफल हुई। कोर्ट रूम में ही घूस लेना आरोपी की हिमाकत थी।"
भ्रष्टाचार का पैटर्न: राजस्व विभाग में घूसखोरी आम
शिवपुरी जैसे जिलों में नामांतरण, बंटवारा और राजस्व मामलों में घूसखोरी की शिकायतें आम हैं। स्टेनो और क्लर्क फाइलें अटकाकर पैसे वसूलते हैं। यह ट्रैप उन सभी के लिए सबक है। आवेदक ध्यानेंद्र ने कहा, "मैंने हिम्मत की और लोकायुक्त पहुंचा। अब न्याय मिला।"
विपक्ष ने साधा निशाना
कांग्रेस ने इसे "भाजपा सरकार की नाकामी" बताया। प्रवक्ता ने कहा, "कोर्ट में ही घूस? मोहन सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर।" भाजपा ने कहा, "लोकायुक्त स्वतंत्र है, हम भ्रष्टाचार पर सख्त हैं।"
कोर्ट रूम में घूस, लोकायुक्त की सख्ती
मोनू शर्मा की गिरफ्तारी सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर करती है। 5,000 रुपये की यह रिश्वत छोटी लगती है, लेकिन यह हजारों आवेदकों के दर्द की कहानी है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए चेतावनी है। क्या जांच में और नाम सामने आएंगे? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।
(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी )












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