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MP News Sehore: खेत में गिरी फसल देख फूट-फूट कर रो पड़ा किसान, बोला— 3 लाख का कर्ज कैसे चुकाऊंगा?

MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर और शाजापुर जिलों में पिछले कुछ दिनों से बदले मौसम ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और भयंकर ओलावृष्टि ने गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

खेतों में खड़ी फसलें आड़ी पड़ गईं, बालियां टूटकर बिखर गईं और कई जगहों पर खेत सफेद ओलों की चादर से ढक गए। इस प्राकृतिक आपदा से किसान गहरे संकट में फंस गए हैं-कर्ज का बोझ बढ़ गया है, परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है।

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ग्राम पीलूखेड़ी (सीहोर जिला) के किसान हनुमत सिंह मेवाड़ा की हालत इस तबाही की सबसे मार्मिक तस्वीर पेश करती है। उनके 8 एकड़ खेत में पूरी तरह गेहूं की फसल लगी थी, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। खेत में गिरी-बिखरी फसल देखकर हनुमत सिंह फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे ऊपर बैंक का करीब 3 लाख रुपये का कर्ज है। अब फसल नहीं बची, तो परिवार कैसे चलेगा? कर्ज कैसे चुकाऊंगा? सरकार से बस यही गुहार है कि जल्द मुआवजा मिले, वरना हमारा सब कुछ खत्म हो जाएगा।"

हनुमत सिंह अकेले नहीं हैं। ग्राम पीलूखेड़ी, पीपलनेर, आष्टा के ग्वाली, गुराड़िया वर्मा, कालापीपल क्षेत्र के चांदनी, हनुमतखेड़ा, झंडी सहित दर्जनों गांवों में हजारों किसान इसी हालत में हैं। कई किसानों ने बताया कि फसल 70-80% तक नष्ट हो गई है, जबकि कुछ जगहों पर पूरी तरह चौपट हो गई।

किसानों और समाजसेवियों का प्रदर्शन

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्राम पीलूखेड़ी के प्रभावित किसानों ने आज खराब हुई गेहूं की फसल के बीच खड़े होकर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों किसान नारे लगाते हुए जुटे- "फसल बर्बाद, मुआवजा दो!", "ओलावृष्टि का नुकसान भरपाई करो!", "आरबीसी 64 लागू करो!"।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोग:

  • हनुमत सिंह मेवाड़ा
  • बद्री प्रसाद
  • ब्रह्म सिंह
  • शिवनारायण मीणा
  • राजमल सेन
  • प्रेम सिंह मेवाड़ा
  • प्रहलाद सिंह
  • रामदयाल
  • हेमराज मीणा

एमएस मेवाड़ा ने मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधी अपील की। उन्होंने कहा, "सीहोर-शाजापुर के कई इलाकों में गेहूं-चना की फसल पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुकी है। तत्काल आरबीसी 64 फॉर्मेट पर सर्वे कराकर राहत राशि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा राशि जारी की जाए। पहले सोयाबीन फसल बर्बाद होने पर सिर्फ 5 हजार रुपये दिए गए, जो नुकसान की भरपाई नहीं करते। किसान क्रेडिट कार्ड से प्रीमियम कटता है, लेकिन क्लेम नहीं मिलता। अब और इंतजार नहीं सहा जाएगा।"

मौसम का कहर: हाल के अपडेट्स

मौसम विभाग के अनुसार, 27-28 जनवरी को पश्चिवी विक्षोभ के प्रभाव से सीहोर, आगर मालवा, शाजापुर, उज्जैन, ग्वालियर समेत कई जिलों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई। सीहोर के आष्टा, जावर, मेहतवाड़ा, श्यामपुर क्षेत्रों में चने के आकार के ओले गिरे, सड़कों पर सफेद चादर जम गई। गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा-बालियां टूट गईं, दाना झड़ गया। यदि मौसम और बिगड़ा तो नुकसान और बढ़ सकता है।

सरकार से मांग: तत्काल सर्वे और मुआवजा
किसानों की मुख्य मांगें:

  • प्रभावित गांवों का तत्काल आरबीसी 64 सर्वे (राजस्व विभाग द्वारा फसल नुकसान आकलन)।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम जल्द जारी।
  • राज्य राहत कोष से अतिरिक्त मुआवजा।
  • पिछले मामलों (सोयाबीन नुकसान) का बकाया भुगतान।

सीएम मोहन यादव ने हाल ही में अन्य जिलों में नुकसान पर सर्वे के आदेश दिए थे। अब सीहोर-शाजापुर के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी गुहार सुनी जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले से जुड़े होने के कारण भी किसानों को उम्मीद है कि जल्द राहत मिलेगी।

यह आपदा किसानों के लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक झटका भी है। हनुमत सिंह जैसे हजारों किसान अब सरकार की ओर देख रहे हैं-कि उनकी मेहनत बर्बाद न हो, और परिवार संकट में न डूबे।

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