सतना: मान मनौव्वल का चला दौर तो मान गए भाजपा के महापौर पद के बागी
सतना, 23 जून: भाजपा ने महापौर पद की चुनावी लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। सतना भाजपा ने बगावत की आंधी को थाम लिया है। नतीजतन बागी उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ दिया है। सतना नगर पालिका निगम से महापौर पद के लिए भाजपा से बगावत कर निर्दलीय पर्चा भरने वाले पूर्व जिला उपाध्यक्ष मनसुख पटेल ने चुनावी मैदान छोड़ दिया है मनसुख ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर महापौर पद के लिए दाखिल अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया है।

भाजपा नेताओं के साथ पहुंचे
भाजपा जिला अध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी पूर्व जिला उपाध्यक्ष श्री राम मिश्रा व अन्य भाजपा नेताओं के साथ रिटर्निंग अवसर के समक्ष पहुंचे मनसुख ने आवेदन देकर अपना नाम वापस ले लिया। मनसुख ने योगेश ताम्रकार को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज होकर पर्चा भर दिया था। उस दिन उन्होंने योगेश ताम्रकार को अखबारी नेता करार दिया था। लेकिन अब संगठन के सख्त निर्देशों और स्थानीय भाजपा नेताओं के प्रयास से अंततः रूठे मनसुख मान गए हैं।
दो बार जप्त तो हो चुकी है जमानत
बता दें कि मनसुख इसके पहले वर्ष 1999 भाजपा के टिकट पर महापौर पद का चुनाव लड़े थे उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी डॉ बीएल यादव के मुकाबले उनकी जमानत जप्त हो गई थी। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मनसुख सतना से विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की पार्टी भाजपा से चुनाव में ही मैदान में उतरने थे लेकिन तब भी उनकी जमानत नहीं बच पाई थी।
मनसुख के होने पर भी नहीं होता ज्यादा नुकसान
मनसुख के चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा को वोटों का ज्यादा नुकसान होने की आशंका तो नहीं थी लेकिन भाजपा में बगावत के मुद्दे पर विपक्षियों को हमलावर होने का मौका जरूर मिल जाता। लेकिन भाजपा ने वह मौका फिलहाल भी विपक्षियों से छीन लिया है। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश संगठन और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बागियों को मैदान ना छोड़ने पर पार्टी से 6 वर्ष के लिए निलंबित करने की चेतावनी भी दे रखी थी मनसुख जमीन कारोबारी भी है लिहाजा उन्होंने सत्ता में बगावत के नफे नुकसान का आंकलन कर मैदान छोड़ दिया है।












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