MP News: मांगों को लेकर भोपाल की सड़कों पर उतरे प्रदेश भर के सरपंच, जानिए क्यों नाराज है गांवो के जनप्रतिनिधि
bhopal news: मध्य प्रदेश सरपंच संघ आज अपनी 19 सूत्री मांगों को लेकर भोपाल की सड़कों पर उतर गया। प्रदेश भर से बड़ी संख्या में पहुंचे सरपंच प्रतिनिधि राजधानी की सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करते हुए नजर आए।
पुलिस ने सीएम हाउस के रास्ते पर बैरीकेडिंग कर रखी थी। धरने के लिए आज सुबह ही प्रदेश भर के सरपंच राजधानी में झुकना शुरू हो गए थे आज अंबेडकर पार्क में राष्ट्रीय सरपंच संघ मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह तोमर के नेतृत्व में अपनी विभिन्न मांगों की निराकरण के लिए धरना प्रदर्शन किया गया।

एक मंत्री के इस्तीफे की मांग भी शामिल
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सरपंच संघ की 19 सूत्री मांगों में मोहन सरकार की एक मंत्री का इस्तीफा भी शामिल है। राष्ट्रीय सरपंच संघ मध्य प्रदेश में कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री गौतम ट्रेडेवाल का इस्तीफा मांगा है। दरअसल 2 जुलाई को गौतम टेटवाल ने बयान दिया था कि गांव में यदि गौ माता घूमते पाई गई या उन्हें कुछ नुकसान पहुंचता है तो उस पंचायत के सरपंच, जनपद सदस्य, पंचायत सहायक, पंचायत सचिव सब जिम्मेदार होंगे।

सरपंचों की क्या है मांग
मध्य प्रदेश के सरपंचों ने सरकार से मांग की है कि उनको प्रतिमाह 15,000 रुपये का वेतन दिया जाए। इस मांग को लेकर 23,000 पंचायतों से सरपंच मंगलवार को भोपाल आए। पहले वे अंबेडकर पार्क में एकत्रित हुए और यहां सीएम हाउस के घेराव का ऐलान किया।

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन सरपंच सहमत नहीं हुए और उनके जाने के बाद वे सीएम हाउस की तरफ बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन महिला सरपंच ने पुलिस के घेरे को तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास किया। इसके बाद बैरिकेड्स लगा दिए गए। बाद में पुलिस ने मुख्यमंत्री से मिलने की मांग की और सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह तोमर ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कोई मुलाकात नहीं की है। शाम के बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और सरपंचों की मांगों का समर्थन किया।
इसके बाद सरपंचों ने आपस में चर्चा की। उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने बताया है कि मंत्री ने 15 दिन का समय मांगा है। उन्होंने तय किया कि वे अगले 15 दिन तक पंचायतों का काम ठप करेंगे, जैसे कि गधे या कुत्ते के गले में ज्ञापन बांधकर।












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