कौन है भोपाल ईरानी डेरे का राजू ईरानी? CBI अफसर और पत्रकार बनकर करता था ठगी, दुबई तक फैला है गिरोह का नेटवर्क
Bhopal News: राजधानी भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र स्थित अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा एक बार फिर सुर्खियों में है। रविवार को यहां पुलिस पर हुए हमले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि इस इलाके में सक्रिय संगठित अपराध के खतरनाक नेटवर्क को भी उजागर कर दिया।
पुलिस जिस शख्स को पकड़ने पहुंची थी, वह था ईरानी डेरे का कथित सरगना राजू ईरानी, जो खुद को कभी CBI अधिकारी तो कभी पत्रकार बताकर लोगों को चूना लगाता था।

CBI अफसर बनकर सर्राफ से की ठगी
पुलिस के मुताबिक राजू ईरानी ने हाल ही में सागर जिले के एक सर्राफा कारोबारी को फोन कर खुद को CBI अधिकारी बताया। जांच के नाम पर कारोबारी को डराया गया और बड़ी रकम ऐंठ ली गई। इसी मामले में भोपाल पुलिस की टीम रविवार को अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे में दबिश देने पहुंची थी।
पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही डेरे के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते हालात हिंसक हो गए। पुलिस पर हमला किया गया, जिसमें कुछ जवानों को चोटें भी आईं। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए काला ईरानी सहित कई लोगों को हिरासत में लिया।
पत्रकार बनकर भी करता था ठगी
गिरफ्तार काला ईरानी ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया। उसने स्वीकार किया कि वह और उसके साथी खुद को कभी CBI अधिकारी तो कभी पत्रकार बताकर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस को उसके घर से एक न्यूज चैनल की माइक आईडी भी मिली है, जिससे यह साफ होता है कि वे मीडिया की आड़ लेकर लोगों का भरोसा जीतते थे।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि जिस चैनल की माइक आईडी मिली है, वह असली है या फर्जी और क्या गिरोह के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।
दुबई तक बेचते हैं लूटे गए मोबाइल
ईरानी डेरे का नेटवर्क सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं है। लूट और झपटमारी की घटनाओं में भी इस इलाके के युवक लंबे समय से बदनाम हैं। 20 दिसंबर 2025 को हबीबगंज थाना क्षेत्र में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास बाइक सवार दो लुटेरों ने एक वेटरनरी डॉक्टर से महंगा मोबाइल फोन लूट लिया था।
भागते वक्त लुटेरों की बाइक एक वाहन से टकरा गई, जिससे दोनों घायल हो गए। राहगीरों ने उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अली हसन (19) और मो. अली (19) के रूप में हुई, जो दोनों ईरानी डेरे के निवासी हैं।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि वे महंगे मोबाइल फोन लूटकर पहले मुंबई भेजते हैं और वहां से उन्हें दुबई पहुंचा दिया जाता है। फिलहाल पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
दिल्ली में भी कर चुके हैं फायरिंग
ईरानी गैंग का आपराधिक इतिहास सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। इसी साल जुलाई में दिल्ली पुलिस ने अमन कॉलोनी निवासी गिरोह के दो सदस्यों मुर्तजा अली उर्फ दमार (38) और सिराज अली (40) को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ पार्क के पास घेराबंदी के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में दोनों को गोली लगी और वे घायल हो गए। जांच में सामने आया कि दोनों के खिलाफ देश के कई राज्यों में लूट, चोरी, ठगी और हत्या के प्रयास जैसे संगीन अपराध दर्ज थे। वे लंबे समय से फरार चल रहे थे।
वर्षों से अपराध का गढ़ बना ईरानी डेरा
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक ईरानी डेरा वर्षों से अपराधियों का गढ़ बना हुआ है। यहां रहने वाले कई लोग देश के अलग-अलग राज्यों में लूट, चोरी, ठगी और साइबर फ्रॉड जैसी वारदातों में शामिल पाए गए हैं। इसके बावजूद अब तक इस इलाके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पुलिस पर हमले की घटना के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। वरिष्ठ अधिकारी दावा कर रहे हैं कि अब ईरानी डेरे के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक अपराधियों के ऐसे गढ़ पनपते रहेंगे? CBI अफसर और पत्रकार जैसी पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करना न सिर्फ कानून बल्कि समाज के भरोसे पर भी हमला है। पुलिस की अगली कार्रवाई इस बात का संकेत देगी कि क्या वाकई ईरानी डेरे के खौफ का अंत होने वाला है या फिर यह कहानी यूं ही चलती रहेगी।












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