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MP News Rahul Gandhi: ट्रेड डील पर सियासी संग्राम, राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को दी खुली चुनौती

Rahul Gandhi News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 'किसान महाचौपाल' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पीएम मोदी को सीधा चैलेंज देते हुए कहा कि अगर उनमें दम है, तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करके दिखाएं।

राहुल ने आरोप लगाया कि यह डील देश के किसानों और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ है, और मोदी सरकार पर 'एपस्टीन फाइल्स' और 'अडाणी केस' का दबाव है, जिसके चलते भारत का डेटा और संसाधन अमेरिका के हवाले किए जा रहे हैं।

Rahul Gandhi challenged PM Modi in mp bhopal saying break trade deal with America

इस सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे, और दोनों नेताओं ने इस डील के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया। जवाहर चौक पर हुई इस महाचौपाल में करीब 50 हजार किसान और कार्यकर्ता जुटे, जो मोदी सरकार की कृषि नीतियों और इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सीधे पीएम मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के किसानों को बेच दिया। यह ट्रेड डील भारत और अमेरिका के बीच नहीं, बल्कि मोदी और ट्रंप के बीच का सौदा है। मोदी पर एपस्टीन फाइल्स और अडाणी के केस का इतना दबाव है कि उन्होंने देश का डेटा, किसानों की जानकारी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को अमेरिका के हवाले कर दिया। अगर दम है, तो इस डील को तोड़कर दिखाओ।" राहुल ने आगे कहा कि यह समझौता किसानों की गर्दन पर तलवार की तरह है, क्योंकि इससे कृषि डेटा विदेशी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा, जो भारतीय कृषि को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने 2020-21 के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे तीन काले कानून वापस लिए गए थे, वैसे ही यह डील भी वापस लेनी पड़ेगी। राहुल ने मोदी को 'नरेंद्र सरेंडर' कहकर तंज कसा और आरोप लगाया कि पीएम विदेशी दबाव में देश बेच रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह डील भारत की संप्रभुता पर हमला है। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने जल्दबाजी में यह समझौता किया है। अमेरिका के नए टैरिफ और ट्रंप की नीतियों के दबाव में आकर उन्होंने किसानों के हितों से खिलवाड़ किया। हम इस डील के खिलाफ देशभर में आंदोलन चलाएंगे।" खड़गे ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे देश की है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का क्या है मामला?

यह विवाद भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित अंतरिम ट्रेड डील से जुड़ा है, जो कृषि, डेटा साझेदारी, टेक्सटाइल और अन्य क्षेत्रों को कवर करती है। डील के तहत भारत अमेरिका को कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने और डेटा एक्सचेंज पर सहमत हुआ है। मोदी सरकार का दावा है कि इससे भारतीय किसानों को नए बाजार मिलेंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह डील असमान है और अमेरिकी कंपनियां भारतीय डेटा का दुरुपयोग कर सकती हैं। राहुल गांधी ने इसे 'देश बेचने की डील' करार दिया है।

इस डील की पृष्ठभूमि में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ नीति का जिक्र आता है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे भारत पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं, जिसके बाद मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात की। राहुल ने दावा किया कि मोदी ने बिना कैबिनेट की सलाह के यह कॉल की और डील पर हामी भरी। एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि अमेरिका में एपस्टीन केस से जुड़ी फाइलों में कुछ भारतीय नाम हैं, जो मोदी पर दबाव का कारण बन रहे हैं। अडाणी ग्रुप के अमेरिकी केस का भी जिक्र किया गया, जहां अडाणी पर धोखाधड़ी के आरोप हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद

राहुल के इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि राहुल गांधी की बातें निराधार हैं और यह डील भारत के हित में है। उन्होंने राहुल को चैलेंज देते हुए कहा, "अगर कांग्रेस सत्ता में होती, तो क्या वे अमेरिका से डील तोड़ती? यह सिर्फ राजनीतिक स्टंट है।" भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे 'राहुल की हताशा' बताया और कहा कि कांग्रेस किसानों के नाम पर राजनीति कर रही है।

वहीं, विपक्षी दलों ने राहुल का समर्थन किया है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि डील में जल्दबाजी क्यों की गई? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एपस्टीन फाइल्स सार्वजनिक हो रही हैं, जिससे मोदी सरकार घबराई हुई है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर कहा कि यह डील किसानों को गुलाम बना देगी।

आगे की रणनीति

यह घटना 2020 के किसान आंदोलन की याद दिलाती है, जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लाखों किसान दिल्ली बॉर्डर पर जुटे थे। कांग्रेस अब इस डील को 'नए काले कानून' की तरह पेश कर रही है। भोपाल की महाचौपाल से आंदोलन का आगाज हुआ है, और कांग्रेस ने पूरे देश में किसान सभाएं आयोजित करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि तीन दिन की तैयारी में लाखों लोग जुटे, जो दिखाता है कि किसान सरकार से नाराज हैं।

यह विवाद लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है। मोदी सरकार का कहना है कि डील से निर्यात बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा, लेकिन विपक्ष इसे विदेशी दबाव का नतीजा बता रहा है। फिलहाल, राहुल का चैलेंज मोदी के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है कि क्या सरकार इस डील पर पुनर्विचार करेगी?

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