MP News: विदिशा में सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर 7वीं की छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप, POCSO एक्ट में मामला दर्ज
MP News Vidisha: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा में त्योंदा थाना क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां के स्कूल के प्राचार्य चंद्रशेखर कुर्मी पर 7वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगा है।
छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया कि प्राचार्य ने बुरी नीयत से उसका हाथ पकड़ा और गले लगाने की कोशिश की। जब छात्रा ने इसका विरोध किया, तो प्राचार्य ने कहा, "गले लगाने से डिप्रेशन दूर होता है।" इतना ही नहीं, उन्होंने छात्रा को धमकी दी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई, तो उसे जान से मार देंगे।

इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण: 26 जुलाई को स्टोर रूम में हुई वारदात
यह शर्मनाक घटना 26 जुलाई 2025 को हुई, लेकिन डर के कारण छात्रा ने 11 अगस्त को त्योंदा थाने में शिकायत दर्ज कराई। त्योंदा थाना प्रभारी बबीता सिंह ने बताया कि छात्रा ने अपनी शिकायत में विस्तार से घटना का जिक्र किया है। छात्रा के अनुसार, 26 जुलाई को प्राचार्य चंद्रशेखर कुर्मी कक्षा में आए और उसे अपनी "बेस्ट स्टूडेंट" बताते हुए कहा, "जब कोई टीचर डिप्रेशन में होता है, तो अपनी फेवरेट स्टूडेंट को गले लगाने से डिप्रेशन दूर हो जाता है।"
छात्रा ने आगे बताया, "उस दिन शाम 4 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद मैं अपनी सहेली के साथ स्टोर रूम में टाट पट्टी जमा करने गई थी। प्राचार्य ने मुझे वहां रोका और मेरी सहेली को बाहर भेज दिया। जब मैं स्टोर रूम में अकेली थी, तब उन्होंने बुरी नीयत से मेरा हाथ पकड़ा और गले लगाने की कोशिश की। मैं किसी तरह छूटकर भागी, तो उन्होंने धमकी दी कि अगर मैंने यह बात किसी को बताई, तो मुझे जान से मार देंगे।" डर की वजह से छात्रा ने कई दिनों तक इस घटना को छिपाए रखा, लेकिन हिम्मत जुटाकर उसने 11 अगस्त को थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई: POCSO एक्ट में केस दर्ज
छात्रा की शिकायत मिलते ही त्योंदा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राचार्य चंद्रशेखर कुर्मी के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) एक्ट, 2012 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी बबीता सिंह ने बताया, "शिकायत मिलते ही हमने तुरंत कार्रवाई शुरू की। मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज कर लिया गया है और विवेचना शुरू हो चुकी है। शिक्षा विभाग को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है।" पुलिस ने प्राचार्य से पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द ही इस मामले में अगली कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग को दी गई जानकारी
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। त्योंदा थाना प्रभारी ने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस मामले से अवगत करा दिया गया है। शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और प्राचार्य के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की बात कही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा, "यह घटना अत्यंत निंदनीय है। हम इसकी पूरी जांच करेंगे और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।"
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने विदिशा जिले में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। एक अभिभावक ने कहा, "हम अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर शिक्षक ही ऐसी हरकत करेंगे, तो हम अपने बच्चों को कहां भेजें?" सामाजिक संगठनों ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है और स्कूलों में POCSO एक्ट के तहत जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत पर जोर दिया है।
विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "यह घटना दर्शाती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। सरकार को इस मामले में कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।" दूसरी ओर, बीजेपी ने कहा कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।
POCSO एक्ट और बच्चों की सुरक्षा
POCSO एक्ट, 2012 बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है, जो 18 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, और अन्य अपराधों को रोकने के लिए सख्त प्रावधान करता है। इस कानून के तहत स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस मामले ने एक बार फिर स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामले बढ़े हैं। 2024 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में POCSO एक्ट के तहत 3,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।












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