Bhopal News: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पहुंची भोपाल, साहित्य उत्सव 'उत्कर्ष-उन्मेष' का किया शुभारंभ
Bhopal News: राजधानी भोपाल में आज एशिया की सबसे बड़े साहित्य उत्सव 'उन्मेष' और लोक व जनजातीय अभिव्यक्तियों की कला उत्सव 'उत्कर्ष' का शुभारंभ भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया। इस कार्यक्रम के पहले बुधवार को देशभर के कलाकारों ने शहर में कला यात्रा निकाली थी।
शुभारंभ के दौरान मंच पर विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक की झलक देखने को मिली। एंट्री गेट से सभागार तक राष्ट्रपति के स्वागत के रूप में भारतीय नृत्य की प्रस्तुतियां दी गई। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 'आज 140 करोड़ देशवासियों का मेरा परिवार है। यहां की सभी भाषाएं और बोलियां मेरी अपनी हैं। हमारी परंपरा में 'यत्र विश्वम् भत्येकनीडम्' (जहां सारा विश्व चिड़ियों का एक घोंसला बनके रहे ) की भावना प्राचीनकाल से है। राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व के आदर्श का संगम हमारे देश में दिखाई देता रहता है।'
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू गुरुवार को प्रेसिडेंट भोपाल के रविंद्र भवन में 'उत्कर्ष' और 'उन्मेष' उत्सव में शामिल हुईं। शुभारंभ कर उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद अब तक मेरी सबसे अधिक यात्राएं मध्यप्रदेश में हुई हैं। यह मेरी MP में 5वीं यात्रा है।'
बता दे राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में करीब 2 घंटे रही। संस्कृति मंत्रालय के संगीत नाटक एवं साहित्य अकादमी, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश के सहयोग से यह आयोजन हो रहा है। इससे पहले ये आयोजन शिमला में हुआ था। मध्यप्रदेश में यह आयोजन पहली बार हो रहा है।
'उत्कर्ष-उन्मेष' उत्सव में क्या ?
इस आयोजन में 3 से 5 अगस्त तक अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव मनाया जाएगा। इसमें बहुभाषी कविता पाठ लेखन पाठ आदिवासी कवि सम्मेलन साहित्य के विषयों पर भी बातचीत की जाएगी।
इसके अलावा इस उत्सव में पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया है जिसमें अकादमी एवं अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें बिक्री के लिए आई हुई है जो सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। कार्यक्रम के दौरान फेमस लेखकों पर बनी डॉक्यूमेंट्री को भी दिखाया जाएगा। कार्यक्रम में 575 से ज्यादा लेखक शामिल हो रहे हैं।
पहले दिन के कार्यक्रम में लेह-लद्दाख का जबरो,सिक्किम का सिंधी छम, नागालैंड का सुमी वार नृत्य, गोवा का समय नृत्य, मध्यप्रदेश का राई नृत्य, मेघालय का वांग्ला नृत्य, मध्यप्रदेश का बरेदी नृत्य, महाराष्ट्र का लावणी नृत्य, असम का बीहू नृत्य, ओडिशा का सिंगारी नृत्य, झारखंड का पाइका नृत्य और आंध्रप्रदेश के टप्पेटा गुल्लू नृत्य की प्रस्तुति।
दूसरे दिन भी कई कार्यक्रम होंगे जिसमें अरुणाचल प्रदेश का आजी लामू नृत्य, हिमाचल प्रदेश का सिरमौरी नाटी, छत्तीसगढ़ का पंथी नृत्य, राजस्थान का कालबेलिया नृत्य, असम का तिवा, हरियाणा का फाग, उत्तर प्रदेश का मयूर रास, झारखंड का झूमुर, मणिपुर का ढोल चोलम एवं थांग टा नृत्य, तमिलनाडु का करगट्टम, पश्चिम बंगाल का नटुवा नृत्य, कर्नाटक का पूजा कुनिथा और गुजरात का मणीयारो रास नृत्य की प्रस्तुति।
तीसरे दिन भी कश्मीर का रौफ नृत्य, सिक्किम का सोराठी, बिहार का झिझिया, उत्तराखंड का छपेली, त्रिपुरा का होजागिरी, छत्तीसगढ़ का गौड़ मारिया, केरला का पुलकली, पंजाब का भांगड़ा, बंगाल का पुरुलिया छऊ, ओडिशा का गोटीपुआ, मध्यप्रदेश का गुदुम बाजा नृत्य और तेलंगाना का ओग्गू डोलू की प्रस्तुति दी जाएगी।












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