MP Shivpuri में PMAY घोटाला: ग्राम पंचायत सचिव और बेटे ने 125 हितग्राहियों से कैसे उड़ाए लाखों रुपये, जानिए
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (PMAY) के नाम पर एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। गरीबों को पक्के मकान का सपना दिखाकर ग्राम पंचायत गताझलकुई के सचिव जीवन सिंह यादव और उनके बेटे रवि प्रताप यादव ने 125 हितग्राहियों से लाखों रुपये गबन कर लिए।
बामौरकलां पुलिस ने सोमवार को जीवन सिंह को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन बेटा रवि प्रताप फरार है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act), IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और अन्य धाराओं में मामला दर्ज हो चुका है।

यह घटना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना PMAY की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी कर रही है, जहां मध्य प्रदेश में पहले भी सब्सिडी घोटाले की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है-कई हितग्राही रोते हुए कह रहे हैं, "हमारा घर तो बसने से रहा।" आइए, इस पूरे मामले को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।
PMAY योजना का संक्षिप्त परिचय: गरीबों के लिए पक्के मकान का सपना
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (PMAY) 2015 में शुरू हुई, जिसका लक्ष्य 2024 तक सभी गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में PMAY-G (Gramin) के तहत हितग्राहियों को 1.20 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है-जिसमें केंद्र (60,000), राज्य (40,000) और बाकी लाभार्थी का योगदान होता है। आवेदन आधार कार्ड, BPL सूची और ग्राम सभा पर आधारित होता है। मध्य प्रदेश में अब तक 25 लाख से ज्यादा घर बन चुके हैं, लेकिन घोटालों की खबरें योजना की छवि खराब कर रही हैं। शिवपुरी जैसे पिछड़े जिलों में, जहां 40% आबादी गरीबी रेखा से नीचे है, PMAY गरीबों की आखिरी उम्मीद था। लेकिन यहां सचिव-पिता और बेटे की जोड़ी ने इसे लूट का जरिया बना लिया।
घटना का पूरा काला चिट्ठा: कैसे हुआ गबन?
शिवपुरी जिले की बामौरकलां तहसील के गताझलकुई ग्राम पंचायत में जीवन सिंह यादव सचिव थे। 2023-24 में PMAY के तहत 125 हितग्राहियों का चयन हुआ। इनमें ज्यादातर SC/ST और OBC परिवार थे, जो कच्चे झोपड़ियों में रहते थे। जीवन सिंह और बेटे रवि प्रताप ने योजना की फाइलें हथियाईं। उन्होंने हितग्राहियों को झूठा भरोसा दिया: "सब्सिडी आ जाएगी, लेकिन पहले 10-20 हजार रुपये 'प्रोसेसिंग फीस' दो।" गरीबों ने मेहनत-मजूरी के पैसे जोड़े और दे दिए। लेकिन पैसे लेने के बाद न तो सब्सिडी आई, न घर बना। फर्जी दस्तावेज बनाकर उन्होंने बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर लिए, लेकिन काम का नामोनिशान नहीं।
जांच में खुलासा हुआ:
गबन की रकम: अनुमानित 25-30 लाख रुपये। प्रत्येक हितग्राही से औसत 20-25 हजार वसूले।
फर्जीवाड़ा: फर्जी फोटो, हस्ताक्षर और आधार डिटेल्स से फाइलें पास कीं। कुछ हितग्राहियों के नाम पर 'घोस्ट बेनिफिशरी' बनाए।
बेटे की भूमिका: रवि प्रताप ने फोन पर हितग्राहियों को बुलाया, पैसे लिए और फरार। वह भोपाल या इंदौर में छिपा माना जा रहा।
सचिव का दबदबा: जीवन सिंह पंचायत के 'सबसे ताकतवर' थे। ग्राम सभा में विरोध करने वालों को धमकी दी।
एक हितग्राही 55 वर्षीय रामेश्वरी बाई ने बताया, "हमने 15 हजार दिए। बोले, 'घर बन जाएगा।' लेकिन सब्सिडी नहीं आई। अब सचिव जेल में, हमारा पैसा कौन लौटाएगा?" इसी तरह, 30 वर्षीय युवा किसान मनोज कुशवाह ने कहा, "बेटे ने कहा था, 'पापा सब संभाल लेंगे।' लेकिन सब लुट गया।"
गिरफ्तारी का ड्रामा: पुलिस ने सचिव को पकड़ा, बेटा फरार
सोमवार सुबह बामौरकलां पुलिस को शिकायत मिली। तुरंत छापा मारकर जीवन सिंह को ग्राम पंचायत कार्यालय से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि पैसे बेटे को दिए। लेकिन रवि प्रताप फोन बंद कर फरार। पुलिस ने उसके फोटो जारी कर तलाश शुरू कर दी। SP रितेश सिंह तोमर ने कहा, "PC Act के तहत सख्त कार्रवाई। बेटे को 24 घंटे में पकड़ लेंगे।" जीवन सिंह को जेल भेज दिया गया। पंचायत विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। महिलाएं चिल्लाईं, "हमारे पैसे लौटाओ!" प्रशासन ने आश्वासन दिया कि गबन की रकम वसूलकर हितग्राहियों को लौटाई जाएगी। लेकिन विश्वास टूट चुका है।
PMAY में घोटालों का इतिहास
- 2022 में इंदौर: 500 फर्जी आवेदनों से 5 करोड़ गबन। CBI ने जांच की।
- 2023 में भोपाल: फर्जी आधार से 200 घरों की सब्सिडी हड़पी।
- 2024 में जबलपुर: ग्राम सचिवों ने 100 हितग्राहियों से 20 लाख वसूले।
- राज्य स्तर पर: CAG रिपोर्ट में 1,000 करोड़ के अनियमितताएं। फर्जी बेनिफिशरी, सब-पॉर्चर और दस्तावेजों की मिलावट।
केंद्र सरकार ने 2024 में सख्ती की-डिजिटल वेरिफिकेशन अनिवार्य। लेकिन ग्रामीण स्तर पर सचिव जैसे अधिकारी ही कमजोरी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, "PMAY का 20% फंड लीक हो जाता है। ई-गवर्नेंस मजबूत करो।"
125 परिवार बेघर, सपने चूर
गताझलकुई जैसे गांव में 70% परिवार PMAY पर निर्भर। अब 125 घर अधर में लटके। बच्चे कच्चे घरों में सर्दी झेलेंगे। एक सर्वे में पाया गया कि घोटाले से 40% हितग्राही ने योजना छोड़ दी। विपक्ष ने कहा, "भाजपा सरकार की निगरानी नाममात्र।" कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष को भेजा, मांग की-पूर्ण जांच और मुआवजा।
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