MP News Patwari: सिवनी में पटवारी 6 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार, लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई
Patwari News: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देने की कड़ी में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के स्पष्ट निर्देश-"भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस"-के तहत जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने सिवनी जिले के बरघाट तहसील में पदस्थ एक पटवारी को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई सिर्फ एक ट्रैप नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर चोट है जो छोटे-छोटे कामों के बदले आम आदमी से कीमत वसूलने का आदी हो चुका है।

मामला क्या है?
आवेदक भगतराम खरे, निवासी बोरीखुर्द, तहसील बरघाट, जिला सिवनी ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनकी पत्नी बैगीन बाई खरे को उनकी माता द्वारा ग्राम पंचायत धपारा स्थित खसरा नंबर 627 में से 1/5 हिस्सा दिया गया था।
भूमि का विधिवत सीमांकन भी कराया जा चुका था। लेकिन सीमांकन की पावती (रसीद) देने के एवज में संबंधित पटवारी महेंद्र बिसेन ने 6 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
छह हजार रुपये...
किसी के लिए मामूली रकम।
लेकिन एक किसान परिवार के लिए मेहनत की कमाई।
आरोपी कौन है?
- नाम: महेंद्र बिसेन
- पिता: स्व. श्री चैतराम बिसेन
- उम्र: 51 वर्ष
- पद: पटवारी, हल्का नंबर 81 एवं 82, धपारा
तहसील: बरघाट, जिला सिवनी
आरोपी पर आरोप है कि सीमांकन के बाद दस्तावेजी पावती देने के लिए उसने 6 हजार रुपये की मांग की थी।
कैसे बिछाया गया जाल?
लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। 12 फरवरी 2026 को जैसे ही आरोपी ने पटवारी कक्ष, राजस्व निरीक्षक मंडल धपारा, तहसील बरघाट स्थित अपने शासकीय कार्यालय में 6 हजार रुपये की रिश्वत ली, टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की राशि मौके से बरामद की गई और विधिवत पंचनामा कार्रवाई की गई।
कानूनी धाराएं
आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) के तहत निम्न धाराओं में कार्रवाई की जा रही है-
- धारा 7 - लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना
- धारा 13(1)(B) - आपराधिक कदाचार
- धारा 13(2) - दंड प्रावधान
- इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
ट्रैप दल की भूमिका
इस सफल कार्रवाई में शामिल रहे-
- निरीक्षक जितेंद्र यादव (ट्रैप कर्ता), निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया, लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम
- टीम ने पूरी कार्रवाई अत्यंत गोपनीयता और तकनीकी साक्ष्यों के साथ अंजाम दी।
बड़ा संदेश क्या है?
यह मामला सिर्फ 6 हजार रुपये का नहीं है। यह उस मानसिकता का मामला है जिसमें सरकारी काम "फीस" के बिना आगे नहीं बढ़ता। भूमि सीमांकन जैसे संवेदनशील मामलों में रिश्वतखोरी ग्रामीण और किसान वर्ग पर सीधा आर्थिक प्रहार है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि चाहे रकम छोटी हो या बड़ी-भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक हलचल
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच भी प्रारंभ की जाएगी। राजस्व विभाग में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह लगातार कार्रवाई होती रही तो राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
लोकायुक्त विभाग ने अपील की है कि यदि किसी भी शासकीय कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है, तो नागरिक तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और सत्यापन के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाती है।
बरघाट का यह मामला दिखाता है कि जागरूक नागरिक और सक्रिय एजेंसियां मिलकर सिस्टम को जवाबदेह बना सकती हैं। छह हजार की रिश्वत ने एक पटवारी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया और यह संदेश पूरे प्रदेश के लिए है कि अब "रंगे हाथों" पकड़े जाने का खतरा हर उस व्यक्ति के सिर पर है जो सरकारी पद का दुरुपयोग करता है।












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