टीचर डे से पहले 18 हजार चयनित शिक्षकों को मिलेंगे नियुक्ति पत्र, 4 सितंबर को जंबूरी मैदान में होगा कार्यक्रम
भोपाल में 4 सितंबर को सीएम शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के 18 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। सीएम ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर 4 सितंबर को यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
भोपाल,28 अगस्त। मध्यप्रदेश में लंबे समय से अपनी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित शिक्षकों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। अगले महीने 4 सितंबर को सीएम शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के 18 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। सीएम ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर 4 सितंबर को यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए चयनित शिक्षकों को बुलावा भेजा जाएगा।

सीएम ने इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में दी जानकारी
सीएम शिवराज ने इंदौर में आयोजित 'राज्य स्तरीय रोजगार दिवस' कार्यक्रम में इस बात की जानकारी दी। सीएम ने इस दौरान 3 सितंबर को कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी, लेकिन बाद में सीएम शिवराज ने ट्वीट कर लिखा कि 4 सितंबर को जंबूरी मैदान पर 18 हजार चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

4 सितंबर को होगा कार्यक्रम
मंत्रालय के सूत्रों से जानकारी मिली है कि 4 सितंबर 2022 को इन सभी शिक्षकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इस प्रशिक्षण का आयोजन जंबूरी मैदान में होगा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं नवनियुक्त शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। इसके लिए मध्य प्रदेश के सभी नवनियुक्त शिक्षकों को भोपाल बुलाया जा रहा है।

साल 2018 -19 में आयोजित की गई थी परीक्षा
बता दें कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए साल 2018 -19 में परीक्षा आयोजित की गई थी इसमें चयनित शिक्षक लंबे समय से नियुक्ति की मांग करते आ रहे हैं। कई बार उन्होंने लोक शिक्षण संचनालय का घेराव किया इसके बाद भी सरकार नहीं मानी तो उन्होंने बीजेपी कार्यालय जाकर जमकर प्रदर्शन किया और कई घंटों तक बीजेपी कार्यालय को जाम रखा था।

कार्यक्रम की तारीख पर कांग्रेस ने कसा तंज
कार्यक्रम की तारीख बदलने पर कांग्रेस ने तंज कसा है कांग्रेस मीडिया विभाग की उपाध्यक्ष संगीता शर्मा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि देखिए इस ट्वीट को मध्य प्रदेश के घोषणा वीर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी किस तरीके की झूठी घोषणाएं करते हैं 2-2 ट्विटर अकाउंट से, इसलिए 18 सालों में मध्यप्रदेश के 'शिक्षक' बेचारे ही रह गए और छात्र बेसहारा।












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