MCU News: परीक्षा से रोके गए छात्रों पर भड़की NSUI, आशुतोष चौकसे का माखनलाल विश्वविद्यालय में हंगामा

MP News MCU: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (एमसीयू) में सेमेस्टर परीक्षा में बैठने से रोके गए छात्रों का गुस्सा सोमवार को खुलकर सामने आ गया। छात्रों की समस्याओं को लेकर एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कुछ समय के लिए परिसर में हंगामे की स्थिति भी बन गई।

NSUI enraged over students barred from MCU exams Ashutosh Chouksey creates ruckus at Makhanlal University

परीक्षा से रोके जाने पर भड़के छात्र

छात्रों का आरोप है कि बिना स्पष्ट कारण बताए उन्हें सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने से रोका गया, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक सत्र खतरे में पड़ गया है। परीक्षा को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन जब छात्रों को अंतिम समय पर परीक्षा से वंचित किया गया तो आक्रोश फूट पड़ा।

एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने कुलगुरु से की मुलाकात

प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के नेतृत्व में एनएसयूआई के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु से मुलाकात कर छात्रों से जुड़े शैक्षणिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दों को सामने रखा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाया जा रहा है और कुछ शिक्षक भय का माहौल पैदा कर रहे हैं।

छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कुलगुरु ने स्वयं सभी पक्षों की बात सुनी और आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक द्वारा दुर्व्यवहार या मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कैंटीन के दूषित पानी का मुद्दा भी उठा

इस दौरान एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय की कैंटीन के पानी की लैब जांच रिपोर्ट भी कुलगुरु को सौंपी। रिपोर्ट में पानी के प्रदूषित होने की पुष्टि हुई है। संगठन ने इसे छात्रों के स्वास्थ्य से जुड़ा बेहद गंभीर मामला बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

"छात्रों पर मानसिक दबाव बर्दाश्त नहीं" - आशुतोष चौकसे

एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने कहा कि एमसीयू में छात्रों का आक्रोश इस बात का संकेत है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाते हैं या डर का माहौल पैदा करते हैं। चौकसे ने कहा कि कुलगुरु ने निष्पक्षता का आश्वासन दिया है, लेकिन यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो एनएसयूआई छात्रहित में आंदोलन तेज करेगी।

एनएसयूआई का अल्टीमेटम

एनएसयूआई प्रदेश सचिव अमन पठान ने कहा कि छात्रों को परीक्षा से वंचित करना, दूषित पानी की आपूर्ति और मानसिक दबाव जैसे मुद्दे किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं। संगठन छात्रों के स्वास्थ्य, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है।

एनएसयूआई ने साफ कर दिया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो छात्रहित में आगे की रणनीति बनाई जाएगी और आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कुलगुरु के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थिति शांत जरूर हुई है, लेकिन छात्रों और संगठन की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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