MP News: गांव-गांव तक शिक्षा की रोशनी फैलाने वाले, एमपी के दो शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
National Teacher Award 2025: मध्य प्रदेश के लिए गर्व का पल आया है, जब दो शिक्षकों ने अपनी मेहनत, नवाचार और समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 2025 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक शीला पटेल और आगर-मालवा के माध्यमिक शिक्षक श्री भेरूलाल ओसारा को चुना है। ये दोनों शिक्षक नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में सम्मानित होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदयप्रताप सिंह ने दोनों शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इनके प्रयासों ने मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यह कहानी है दो ऐसे शिक्षकों की, जिन्होंने ग्रामीण स्कूलों की मिट्टी को अपनी मेहनत से सोना बना दिया और बच्चों के भविष्य को नई उड़ान दी।

गर्व का पल: मध्य प्रदेश के दो शिक्षक राष्ट्रीय फलक पर
मध्य प्रदेश के लिए 2025 का साल शिक्षा के क्षेत्र में एक सुनहरा अध्याय लेकर आया है। दमोह की प्राथमिक शिक्षक शीला पटेल और आगर-मालवा के माध्यमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा को केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुना है। यह सम्मान उन्हें स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, नवाचारी शिक्षण विधियों और छात्रों के जीवन को समृद्ध करने के लिए दिया जा रहा है। दोनों शिक्षक नई दिल्ली में 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करेंगे।
कौन हैं शीला पटेल और भेरूलाल ओसारा?
दमोह जिले के टपरिया गांव में शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया की शिक्षक श्रीमती शीला पटेल (42) एक ऐसी मशाल हैं, जिन्होंने ग्रामीण बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी बिखेरी। शीला ने 15 साल पहले इस स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था, तब स्कूल की हालत जर्जर थी और बच्चों की उपस्थिति कम थी। लेकिन उनकी मेहनत और अनोखी शिक्षण शैली ने स्कूल को एक मॉडल स्कूल में बदल दिया।
शीला ने बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थानीय बोली और कहानियों का सहारा लिया। उन्होंने "खेल-खेल में पढ़ाई" प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसमें गणित और विज्ञान को खेलों के जरिए पढ़ाया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने स्कूल में एक छोटा सा पुस्तकालय बनाया, जहां बच्चों को न केवल पाठ्यपुस्तकें, बल्कि प्रेरक कहानियां और पर्यावरण से जुड़ी किताबें भी उपलब्ध कराईं। उनकी इस पहल से स्कूल की ड्रॉपआउट दर 30% से घटकर 5% हो गई।
स्थानीय निवासी रमेश साहू कहते हैं, "शीला मैडम ने हमारे गांव के बच्चों को नई दिशा दी। आज हमारे बच्चे न केवल पढ़ाई में आगे हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है।"
भेरूलाल ओसारा: आगर-मालवा का प्रेरणा स्रोत
आगर-मालवा के खेरिया सुसनेर में शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला में पढ़ाने वाले भेरूलाल ओसारा (48) एक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने ग्रामीण बच्चों को डिजिटल दुनिया से जोड़ा। भेरूलाल ने अपने स्कूल में "स्मार्ट लर्निंग प्रोजेक्ट" शुरू किया, जिसमें पुराने स्मार्टफोन्स और सस्ते प्रोजेक्टर्स का उपयोग कर बच्चों को डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाया जाता है। इस प्रोजेक्ट ने न केवल बच्चों की रुचि बढ़ाई, बल्कि विज्ञान और गणित जैसे विषयों को आसान और रोचक बना दिया।
भेरूलाल ने स्कूल में एक "हरित क्लब" भी बनाया, जिसके तहत बच्चे पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और जल संरक्षण की गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। उनकी इस पहल से स्कूल के आसपास 500 से अधिक पौधे लगाए गए, और स्कूल को "हरित स्कूल" का दर्जा मिला। भेरूलाल कहते हैं, "शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। हमें बच्चों को जीवन के लिए तैयार करना है।"
चयन प्रक्रिया: कठिन थी राह
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 45 जिलों के 145 शिक्षकों ने आवेदन किया था। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है, जो दर्शाता है कि प्रदेश में शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षकों की कमी नहीं है। राज्य स्तरीय चयन समिति ने इनमें से 6 शिक्षकों की अनुशंसा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजी थी। इन 6 शिक्षकों में से शीला पटेल और भेरूलाल ओसारा का चयन अंतिम रूप से हुआ।
चयन प्रक्रिया में शिक्षकों के नवाचार, स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने, ड्रॉपआउट दर कम करने, और सामुदायिक योगदान जैसे मानकों को आधार बनाया गया। समिति ने विशेष रूप से शीला और भेरूलाल के ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए कार्यों की सराहना की। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "ये शिक्षक उन अनगिनत शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सीमित संसाधनों में भी शिक्षा का दीप जलाए रखते हैं।"
मुख्यमंत्री और मंत्रियों की बधाई
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दोनों शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा, "शीला पटेल और भेरूलाल ओसारा ने अपनी मेहनत और नवाचार से मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। यह सम्मान हर उस शिक्षक के लिए प्रेरणा है, जो बच्चों के भविष्य को संवार रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक निवेश कर रही है ताकि ऐसे और शिक्षक सामने आएं।
शिक्षकों की प्रेरक कहानी
शीला पटेल और भेरूलाल ओसारा की कहानी हर उस शिक्षक के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखता है। शीला ने बताया, "जब मैंने टपरिया में पढ़ाना शुरू किया, तो बच्चे स्कूल नहीं आते थे। मैंने उनके माता-पिता से मुलाकात की, उन्हें पढ़ाई का महत्व बताया। आज मेरे बच्चे न केवल पढ़ते हैं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने का हौसला भी रखते हैं।"
भेरूलाल ने कहा, "मेरे लिए यह पुरस्कार उन बच्चों का है, जो हर दिन स्कूल आते हैं और सीखने की जिद रखते हैं। मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे डिजिटल दुनिया में भी पीछे न रहें।" दोनों शिक्षकों ने अपने स्कूलों को न केवल पढ़ाई का केंद्र बनाया, बल्कि सामुदायिक विकास का आधार भी बनाया।












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