लोकसभा चुनाव 2019: CM के बेटे और सिंधिया की पत्नी की होगी राजनीति में एंट्री, जानिए प्रियदर्शिनी व नकुल नाथ का सियासी गणित

Madhya Pradesh News, मध्यप्रदेश। लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस-भाजपा समेत अन्य पार्टियां चुनावी चौसर बिछाने में जुटी हुई हैं। मध्यप्रदेश में हर कोई पार्टी लोकसभा की सभी 29 सीटें जीतने का दम भरते नजर आ रही है। इस बीच मध्यप्रदेश की राजनीति में नए चेहरों की भी एंट्री हो रही है। जानिए ऐसे ही दो चेहरों के बारे में जिनकी एंट्री ने पार्टियों की हार-जीत का समीकरण बिगाड़ दिया है।

priyadarshini and Nakul Nath

बताया जाता है कि कांग्रेस मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 जीतने के बाद अब लोकसभा में भी हर हाल में भाजपा को शिकस्त देने की तैयारियों में जुट गई है। मीडिया रिपोर्टर्स के अनुसार मध्यप्रदेश कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर तय किया है कि प्रदेश के 114 एमएलए और राज्यसभा सांसदों को टिकट नहीं दी जाएगी। पार्टी सुप्रीमो राहुल गांधी ने पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी लोकसभा चुनाव 2019 में योग्य व युवा उम्मीदवारों को अधिक से अधिक मौका दिया जाएगा।

नकुल नाथ और प्रियदर्शिनी

नकुल नाथ और प्रियदर्शिनी

हम बात कर रहे हैं मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ (Nakul Nath) और कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी (Priyadarshini Raje Scindia) की। लोकसभा चुनाव 2019 से नकुल नाथ व प्रियदर्शिनी की राजनीतिक पारी की शुरुआत लगभग तय मानी जा रही है। इनको को लेकर मध्यप्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाएं भी जोरों पर हैं। चर्चाओं की मानें तो सीएम के बेटे नकुल नाथ मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ग्वालियर सीट से भाग्य आजमा सकती हैं।

भाजपा ने बताया वंशवाद का एक और मामला

भाजपा ने बताया वंशवाद का एक और मामला

नकुल नाथ और प्रियदर्शिनी की राजनीति पारी शुरू होने को लेकर प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने अपने ही अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि दोनों ही नेता लोकप्रिय हैं। इससे पार्टी में किसी को आपत्ति नहीं है। वहीं भाजपा के वंशवाद पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि भजपा में तो सिर्फ अमित शाह और पीएम मोदी की ही चलती है। वहीं ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह सिंह और विधायक आरिफ मसूद ने भी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के चुनाव लड़ने पर कहा कि इसका फैसला राहुल गाँधी तय करेंगे।

कांग्रेस का तर्क लोकप्रियता व जीत का आधार

कांग्रेस का तर्क लोकप्रियता व जीत का आधार

इधर, भाजपा इन दो नए चेहरों के राजनीति में आने को कांग्रेस का एक और वंशवाद बता रही है तो वहीं कांग्रेस ने इन हाई प्रोफाइल राजनितिक एंट्रियों को लोकप्रियता और जीत का आधार बताते हुए मिशन 2019 में बड़ा दांव खेलने की बात कर रही है। बहरहाल यह तो लोकसभा चुनाव 2019 परिणाम ही बताएगा कि क्या जनता वंशवाद पर मुहर लगाती है या नहीं?

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