Bhopal MP News: सरकारी जमीनों पर कब्जों की बाढ़, हथाईखेड़ा हिंदू श्मशान पर अवैध कब्जे का आरोप, SDM की एंट्री
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में 'मछली परिवार' से जुड़े दो बड़े मामलों के बाद अब हथाईखेड़ा इलाके में एक नया विवाद सामने आया है, जो धार्मिक संवेदनाओं को छूता है। यहां स्थित हिंदू कब्रिस्तान (श्मशान) पर कब्जा करने और उसे मुस्लिम कब्रिस्तान में बदलने की कोशिश का आरोप लगा है।
गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को मिली शिकायत के आधार पर उन्होंने दोनों पक्षों को दस्तावेजों समेत 23 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला न सिर्फ भूमि विवाद का है, बल्कि सामुदायिक सद्भाव और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। हमने पूरे मामले की गहराई से जांच-पड़ताल की, जिसमें स्थानीय निवासियों, राजस्व अधिकारियों और पिछले मामलों के संदर्भ शामिल हैं।

भोपाल में बढ़ते भूमि कब्जों का पृष्ठभूमि: 'मछली परिवार' के दो बड़े मामले
भोपाल में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन हाल के महीनों में यह चरम पर पहुंच गई है। अगस्त 2025 में 'मछली परिवार' या 'मछली गैंग' के नाम से चर्चित एक परिवार पर 99 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा। इस परिवार के खिलाफ ड्रग्स तस्करी, बलात्कार और अवैध संपत्ति के 60 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
प्रशासन ने कोकता बायपास पर 99 एकड़ जमीन का सीमांकन कराया, जहां परिवार ने अवैध निर्माण कर दुकानें, होटल, स्कूल और गोदाम बनाए थे। सितंबर की शुरुआत में एक और मामला सामने आया, जब पशुपालन विभाग की 6 एकड़ जमीन पर इसी परिवार का कब्जा पाया गया। अनंतपुरा और कानासैया-कोकता इलाकों में 57 खसरों की जांच चल रही है, जहां 'मछली परिवार' का कनेक्शन सामने आया है। इन मामलों ने भोपाल प्रशासन को सतर्क कर दिया है, और अब छोटे-बड़े सभी कब्जों पर सख्ती बरती जा रही है। इन्हीं दो बड़े मामलों के बीच हथाईखेड़ा का यह नया विवाद उभरा है, जो धार्मिक रंग ले चुका है।

हथाईखेड़ा श्मशान विवाद: क्या है पूरा मामला?
मामला हथाईखेड़ा सिविल अस्पताल से सटी सरकारी जमीन का है, जो खसरा नंबर-45 पर स्थित है। स्थानीय निवासी हरिओम शर्मा ने गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को एक लिखित आवेदन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुगारिक मियां ने इस जमीन पर अवैध ढांचा बनाया है। शर्मा के अनुसार, मुगारिक ने जमीन पर वक्फ बोर्ड का नाम अंकित कर कब्रिस्तान का बोर्ड लगा दिया और 15 अगस्त 2025 से अब तक तीन शव दफना दिए। लेकिन इस इलाके में मुख्य रूप से हिंदू, बौद्ध और सिख परिवार रहते हैं, और यह जमीन पारंपरिक रूप से हिंदू बच्चों को दफनाने के लिए इस्तेमाल होती रही है। शर्मा ने दावा किया कि खसरा नंबर-45 शासकीय संपत्ति है और इसे हिंदू श्मशान के रूप में मान्यता प्राप्त है।
दूसरी ओर, अनंतपुरा इलाके में मुस्लिम परिवारों की बहुलता है, जो खसरा नंबर-110 पर अपने शव दफनाते हैं। शर्मा का कहना है कि यह कब्जा न सिर्फ अवैध है, बल्कि इलाके की जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ सकता है। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि अवैध निर्माण से स्थानीय निवासियों को असुविधा हो रही है, और यदि समय रहते कार्रवाई न हुई तो विवाद बढ़ सकता है। हरिओम शर्मा, जो स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता हैं, ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर एसडीएम का रुख किया। मुगारिक मियां की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, वे वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों के आधार पर अपना दावा पेश कर सकते हैं।
एसडीएम की कार्रवाई: दस्तावेज मांगकर जांच का आदेश
शिकायत मिलते ही एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने दोनों पक्षों-हरिओम शर्मा और मुगारिक मियां-को 23 सितंबर 2025 को अपने कार्यालय में दस्तावेजों समेत हाजिर होने का आदेश जारी किया। आदेश में साफ कहा गया है कि "संपत्ति पर वास्तविक कब्जे के संबंध में अपना दावा, दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।" एसडीएम श्रीवास्तव, जो गोविंदपुरा क्षेत्र के राजस्व मामलों के प्रभारी हैं, ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्थानीय पटवारियों से प्रारंभिक रिपोर्ट भी मांगी है ताकि खसरा रिकॉर्ड की जांच हो सके।
इसके अलावा, हथाईखेड़ा अस्पताल के पास सरकारी जमीन पर अलग से एक शिकायत मिली है, जिसमें टीन शेड, दुकानें और अन्य निर्माणों का आरोप है। इसकी जांच के लिए एक टीम गठित की गई है, जिसमें राजस्व निरीक्षक जगदीश पटेल और चार पटवारी-सुरेंद्रप्रताप सिंह यादव, आशीष मिश्रा, महेश राजन तथा विमलेश गुप्ता-शामिल हैं। टीम को साइट का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, जो मुख्य विवाद से जुड़ी हो सकती है।
सामाजिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं: सद्भाव पर खतरा?
यह विवाद भोपाल के हथाईखेड़ा जैसे मिश्रित आबादी वाले इलाके में धार्मिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस मामले को "धार्मिक अतिक्रमण" बताते हुए विरोध जताया है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यह जमीन दशकों से हिंदू श्मशान के रूप में इस्तेमाल होती आई है। अचानक बोर्ड बदलना और शव दफनाना स्वीकार्य नहीं।" वहीं, मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि वक्फ बोर्ड के दस्तावेज वैध हैं तो मामला कानूनी रूप से सुलझाया जाना चाहिए।
कानूनी आयाम: क्या कहता है कानून?
मध्य प्रदेश भूमि राजस्व संहिता 1959 के तहत सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा दंडनीय है, और वक्फ संपत्ति अधिनियम 1995 वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की रक्षा करता है। लेकिन यदि जमीन शासकीय है तो कब्जा हटाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एसडीएम की सुनवाई के बाद यदि दावा सिद्ध न हुआ तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो सकती है। भोपाल में हाल के मामलों में प्रशासन ने सीमांकन के बाद नोटिस जारी कर कब्जे हटाए हैं, जैसा 'मछली परिवार' केस में हुआ।












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