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भोपाल नगर निगम बैठक में पार्षद पप्पू विलास राव घाड़गे का धरना, कमिश्नर हरेंद्र नारायण पर निंदा प्रस्ताव की मांग

MP Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को हुई नगर निगम परिषद की बैठक हंगामे और विवादों का केंद्र बन गई। बीजेपी पार्षद पप्पू विलास राव घाड़गे ने नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की और सभापति की आसंदी के सामने जमीन पर धरने पर बैठ गए।

इस कदम ने सदन में तनाव पैदा कर दिया, और बीजेपी व कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके साथ ही, हमीदिया अस्पताल, कॉलेज, और स्कूल के नाम बदलने के प्रस्ताव पर भी हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

Municipal corporation meeting Councillor Pappu Vilas Rao Ghadge protests against commissioner

इस दौरान "पाकिस्तान मुर्दाबाद" के नारे गूंजे, और निगम सभापति किशन सूर्यवंशी ने भोपाल के पूर्व नवाब को "गद्दार" करार दिया। यह घटना न केवल प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाती है, बल्कि नाम परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सियासी और सामाजिक तनाव को भी उजागर करती है।

बैठक में हंगामे की शुरुआत: पप्पू विलास राव घाड़गे का धरना

भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक गुरुवार सुबह शुरू हुई, लेकिन शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण रहा। बीजेपी पार्षद पप्पू विलास राव घाड़गे, जो वार्ड-34 से पार्षद हैं, ने नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण की कार्यशैली पर सवाल उठाए। घाड़गे ने आरोप लगाया कि कमिश्नर जनहित के मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे और पार्षदों को मिलने के लिए लंबा इंतजार करवाते हैं। उन्होंने कमिश्नर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की और विरोध स्वरूप सभापति की आसंदी के सामने जमीन पर बैठ गए।

घाड़गे के इस कदम ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया। मेयर-इन-काउंसिल (MIC) सदस्य जगदीश यादव ने घाड़गे की मांग का विरोध करते हुए कहा, "कमिश्नर हरेंद्र नारायण के नेतृत्व में भोपाल देशभर में स्वच्छता रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंचा है। उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना अनुचित है।" कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद मोहम्मद सरवर, और योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी कमिश्नर का पक्ष लिया। शबिस्ता जकी ने कहा, "घाड़गे का धरना एक हाई-प्रोफाइल ड्रामा है। उनके पास सदन में बहुमत का समर्थन नहीं है, और परिषद के फैसले धरने से नहीं, बहुमत से तय होते हैं।"

हंगामे की स्थिति को देखते हुए सभापति किशन सूर्यवंशी ने घाड़गे को समझाने की कोशिश की और उन्हें उठने के लिए कहा। करीब 15 मिनट के हंगामे के बाद घाड़गे उठे, और सदन में एक घंटे का प्रश्नकाल शुरू हुआ।

हमीदिया अस्पताल और अशोका गार्डन के नाम बदलने पर हंगामा

बैठक में सबसे ज्यादा विवाद हमीदिया अस्पताल, कॉलेज, और स्कूल के नाम बदलने के प्रस्ताव पर हुआ, जिसे बीजेपी पार्षद देवेंद्र भार्गव ने पेश किया। भार्गव ने प्रस्ताव रखा कि हमीदिया अस्पताल, जो वर्तमान में गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित है, और इससे जुड़े कॉलेज व स्कूल का नाम बदलकर राष्ट्रभक्तों के नाम पर किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि भोपाल के पूर्व नवाब हमीदउल्ला खान "पाकिस्तान की सरपरस्ती" के लिए जाने जाते थे, और उनके नाम से जुड़े संस्थानों का नाम परिवर्तन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करेगा।

इस प्रस्ताव का कांग्रेस पार्षदों ने तीखा विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा, "हमीदिया अस्पताल और कॉलेज का नाम सम्राट अशोक से भी जुड़ा है। नाम बदलने से जनता को परेशानी होगी, और यह केवल सियासी एजेंडा है।" पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने सवाल उठाया, "क्या परिषद का काम केवल नाम बदलना रह गया है? जनहित के मुद्दों जैसे जलभराव और खराब सड़कों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा?" कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सरवर ने NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) दिशानिर्देशों के पालन और पुराने विसर्जन कुंडों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया।

विवाद बढ़ने पर बीजेपी और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए, और हाथापाई की नौबत आ गई। इस दौरान "पाकिस्तान मुर्दाबाद" के नारे लगे, और सभापति किशन सूर्यवंशी ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा, "भोपाल का नवाब गद्दार था, गद्दार है, और गद्दार रहेगा।" इस बयान ने माहौल को और गरमा दिया, जिसके बाद कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

अन्य नाम परिवर्तन प्रस्ताव: अशोका गार्डन अब 'राम बाग'

बैठक में अशोका गार्डन का नाम बदलकर 'राम बाग' करने का प्रस्ताव भी पारित हुआ। यह प्रस्ताव बीजेपी पार्षद अशोक वाणी ने पेश किया, जिसका समर्थन पार्षद सूर्यकांत गुप्ता ने किया। गुप्ता ने तर्क दिया कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से "राजा राम का बाग" कहलाता था, और नाम परिवर्तन से इसकी सांस्कृतिक पहचान बहाल होगी। इसके अलावा, अशोका गार्डन सब्जी मंडी तिराहे का नाम 'विवेकानंद तिराहा' करने का प्रस्ताव भी पास हुआ।

अन्य प्रस्तावों में शामिल थे:

रमेश शर्मा 'गुट्टू भैया' के नाम पर सड़क: पूर्व विधायक और बीजेपी जिलाध्यक्ष रमेश शर्मा के नाम पर 80 फीट रोड का नामकरण करने का प्रस्ताव पार्षद गीता प्रसाद माली ने रखा।

सुरेंद्र नाथ सिंह के नाम पर पार्क: पप्पू विलास राव घाड़गे ने पूर्व विधायक और बीडीए अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ सिंह के नाम पर एक पार्क का नामकरण प्रस्तावित किया।

सावित्री बाई फुले की प्रतिमा: शहर में सावित्री बाई फुले की प्रतिमा स्थापित करने का आदेश सभापति ने दिया।

डॉ भीमराव अंबेडकर के नाम पर बस स्टॉप: पार्षद प्रताप वारे ने बाग मुगालिया बस स्टॉप का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।

श्रीकृष्ण मोहन गांगुली के नाम पर सड़क: पार्षद आरती अनेजा ने टीटी नगर की काली मंदिर रोड का नाम योगाचार्य श्रीकृष्ण मोहन गांगुली के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया।

मोहम्मद सगीर के नाम पर पार्क: पूर्व पार्षद मोहम्मद सगीर के नाम पर एक पार्क का नामकरण प्रस्तावित हुआ।

इन प्रस्तावों को सभापति किशन सूर्यवंशी ने मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने का आदेश दिया। हालांकि, हमीदिया अस्पताल, कॉलेज, और स्कूल के नाम बदलने का अधिकार नगर निगम के पास नहीं है, इसलिए इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र के माध्यम से भेजा गया है।

कमिश्नर हरेंद्र नारायण के खिलाफ विवादों का इतिहास

नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण पहले भी विवादों में रहे हैं। अप्रैल 2025 में, उन्होंने पार्षद अरविंद वर्मा को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे बीजेपी पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नियमों के खिलाफ बताया था। भार्गव ने तर्क दिया कि केवल संभागायुक्त को पार्षद हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हरेंद्र नारायण पर सांसद आलोक शर्मा का फोन न उठाने और विधायक विश्वास सारंग के क्षेत्र में आग लगने पर फायर ब्रिगेड न भेजने जैसे आरोप भी लगे हैं।

पार्षद पप्पू विलास राव घाड़गे ने पहले भी कमिश्नर की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। दिसंबर 2024 की एक बैठक में, उन्होंने शिकायत की थी कि कमिश्नर जनहित के मामलों में मिलने के लिए समय नहीं देते और पार्षदों को इंतजार करवाते हैं। उन्होंने न्यू मार्केट में प्रीमियम पार्किंग ठेके को रद्द करने की मांग भी उठाई थी।

नाम परिवर्तन की सियासत, सांस्कृतिक पहचान या सियासी एजेंडा?

नाम परिवर्तन के प्रस्तावों ने भोपाल में सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि हमीदिया जैसे नाम, जो भोपाल के पूर्व नवाब से जुड़े हैं, को बदलकर राष्ट्रभक्तों के नाम पर करना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। सभापति किशन सूर्यवंशी ने कहा, "जो शासक मानव अत्याचार और पाकिस्तान की सरपरस्ती के लिए जाने गए, उनके नाम का महिमामंडन बंद होना चाहिए।"

वहीं, कांग्रेस ने इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा, "नाम बदलने से जनता का कोई भला नहीं होगा। यह केवल सियासी स्टंट है। सरकार को जलभराव, खराब सड़कों, और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।" स्थानीय निवासी रमेश सोलंकी ने कहा, "हमीदिया अस्पताल का नाम दशकों से चला आ रहा है। इसे बदलने से मरीजों और आम लोगों को भ्रम होगा।"

अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव

विसर्जन कुंड निर्माण: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, नीलबड़, संजीव नगर, मालीखेड़ा, और प्रेमपुरा में 2.49 करोड़ से 7.34 करोड़ रुपये की लागत से छह विसर्जन कुंडों का निर्माण प्रस्तावित है। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।

अमृत 2.0 योजना: जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत प्रस्ताव पास किए गए।

स्वच्छता रैंकिंग: भोपाल को देशभर में स्वच्छता में दूसरा स्थान मिलने पर सफाई मित्रों और शहरवासियों का आभार व्यक्त किया गया।

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