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MP News: कड़ाके की ठंड का कहर, गेहूं पर बर्फ की चादर, सब्जी फसल चौपट – किसान रातभर खेतों में जलाकर धुआं

MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम चंदेरी में कड़ाके की ठंड और पाले ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गेहूं की फसल पर ओस जमकर बर्फ की मोटी चादर जैसी दिख रही है, जबकि सब्जी की फसल (टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी) पाले से चौपट हो रही है। किसान रातभर खेतों में आग जलाकर धुआं कर रहे हैं, ताकि फसल को ठंड और पाले से बचाया जा सके।

समाजसेवी और किसान नेता एमएस मेवाड़ा के आग्रह पर गांव के दर्जनों किसान इस जद्दोजहद में लगे हैं। किसानों का कहना है, "सोयाबीन बर्बाद हुई, प्याज कौड़ियों के भाव बिकी, अब सब्जी फसल भी प्रकृति आपदा से खतरे में है। हम रातभर जागकर धुआं कर रहे हैं।"

MP Severe cold wreaks havoc in Chanderi Sehore Wheat covered in ice vegetable crops devastated

यह दृश्य सीहोर जिले के कई गांवों में दिख रहा है, जहां तापमान 4-6 डिग्री तक गिर गया है। पाला पड़ने से पत्तियां जल रही हैं, फल सिकुड़ रहे हैं। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए किसानों का दर्द, पाले का असर, बचाव के उपाय और सरकारी सहायता की स्थिति।

  • गेहूं पर बर्फ की चादर, सब्जी फसल चौपट: ठंड का कहर
  • चंदेरी और आसपास के गांवों (तोरणिया, रामाखेड़ी, हसनाबाद) में ठंड चरम पर है।

गेहूं की फसल: सुबह ओस जमकर बर्फ जैसी चादर बन जाती है। किसान बोले, "बाली निकलने का समय है। पाला पड़ा तो दाने खराब हो जाएंगे। पैदावार 30-40% कम हो सकती है।"
सब्जी फसल: टमाटर-मिर्च की पत्तियां काली पड़ रही हैं। बैंगन-भिंडी के फल सिकुड़ गए। एक किसान ने कहा, "एक रात का पाला पूरी फसल तबाह कर देता है।"

एमएस मेवाड़ा ने बताया, "पिछले 15 दिनों से ठंड असहनीय है। सोयाबीन बेमौसम बारिश से गई, प्याज भाव नहीं मिला। अब रबी फसल खतरे में।"

किसानों की जद्दोजहद: रातभर खेतों में आग और धुआं
एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसान रात 12 बजे से सुबह तक खेतों में डटे हैं। खेतों में लकड़ी, पुआल और गोबर के उपले जलाकर धुआं किया जा रहा है। धुआं से तापमान बढ़ता है और पाला कम पड़ता है। 20-30 किसान रातभर जागते हैं। एक किसान बोला, "परिवार सोता है, हम खेत बचाते हैं।" महिलाएं भी शामिल रहती है। किसान पत्नियां चाय बनाकर लाती हैं, बच्चे मदद करते हैं। मेवाड़ा ने कहा, "यह पारंपरिक तरीका है। सिंचाई भी कर रहे हैं, लेकिन धुआं सबसे प्रभावी। सरकार स्प्रिंकलर या राहत दे।"

पहले सोयाबीन-प्याज, अब पाला

2025 किसानों के लिए अभिशाप साबित हुआ:

  • सोयाबीन: बेमौसम बारिश से बर्बाद।
  • प्याज: 50 पैसे किलो तक गिरा, मुफ्त बांटी गई।
  • अब रबी: गेहूं-सब्जी पर पाला।

एक किसान ने कहा, "लागत डबल, भाव आधा। अब ठंड ने आखिरी उम्मीद छीन ली।"
सरकारी सहायता: फसल बीमा और राहत की उम्मीद। कृषि विभाग ने पाला सर्वे शुरू किया। फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया चलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ठंड राहत के निर्देश दिए। लेकिन किसान कहते हैं, "बीमा में देरी होती है। तुरंत मदद चाहिए।"

ठंड की मार, किसानों की हिम्मत

चंदेरी के खेतों में धुआं उठ रहा है, लेकिन किसानों की उम्मीद बुझी नहीं। एमएस मेवाड़ा जैसे नेता और किसानों की एकजुटता प्रेरणा है। प्रकृति आपदा से लड़ते किसान साबित कर रहे हैं - मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। क्या सरकार तुरंत राहत देगी? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।

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