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होली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, लेकिन क्या मिलावट पर सख्ती सिर्फ त्योहारों तक सीमित?

MP News Holi 2026: होली जैसे बड़े पर्व के पहले जुन्नारदेव में खाद्य सुरक्षा विभाग की अचानक बढ़ी सक्रियता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। आमजन को शुद्ध, सुरक्षित और बिना मिलावट के खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन के निर्देश पर जिलेभर में निरीक्षण, निगरानी और नमूना जांच अभियान चलाया जा रहा है।

जिला कलेक्टर हरेंद्र नारायण के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा विभाग की चार टीमें लगातार जिले की सभी तहसीलों में कार्रवाई कर रही हैं। प्रशासन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपर कलेक्टर धीरेंद्र सिंह को इस पूरे अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है और सभी टीमें उनकी प्रत्यक्ष निगरानी में काम कर रही हैं।

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जुन्नारदेव तहसील में मिठाई दुकानों, डेयरियों, किराना प्रतिष्ठानों और बेकरी पर सघन निरीक्षण किया गया। दूध, मावा, मिठाइयाँ, नमकीन, मसाले, बेसन, घी और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।

कहां-कहां हुई कार्रवाई?

अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी संध्या मार्को की टीम ने जुन्नारदेव शहर के कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान मिल्क केक, नमकीन सेव, पेड़ा, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर और मावा बर्फी के नमूने लिए गए।

इसी तरह सेव भंडार, दूध डेयरी, किराना और चाय दुकानों से नमकीन, शक्कर पारा, मूंगफली और बताशे के नमूने एकत्र किए गए। टीम ने डेयरियों, किराना दुकानों और रेस्टोरेंट से दूध, घी, बेसन और दाल के भी नमूने लिए। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को साफ-सफाई बनाए रखने, एक्सपायरी डेट की जांच करने और लाइसेंस प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।

रिपोर्ट जाती है, लेकिन सार्वजनिक क्यों नहीं होती?

  • हर बार की तरह इस बार भी नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
  • किन दुकानों के नमूने फेल हुए?
  • किस प्रतिष्ठान पर क्या कार्रवाई हुई?
  • क्या किसी बड़ी मिठाई फैक्ट्री या प्रभावशाली ब्रांड पर सख्त कदम उठाया गया?

अधिकतर मामलों में विभाग यह कहकर चुप्पी साध लेता है कि "जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।" लेकिन जनता तक यह जानकारी शायद ही कभी पहुंचती है कि आखिर दोषी कौन था और उस पर क्या दंडात्मक कार्रवाई हुई।

यही कारण है कि आमजन के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि छोटी दुकानों पर कार्रवाई दिखाकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि बड़े और प्रभावशाली प्रतिष्ठानों पर हाथ डालने से बचा जाता है।

त्योहारों की सक्रियता बनाम सालभर की हकीकत

हर बड़े त्योहार - चाहे वह होली हो, दीपावली या अन्य पर्व - से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता अचानक बढ़ जाती है। मीडिया कवरेज के साथ कार्रवाई दिखाई जाती है। लेकिन त्योहार खत्म होते ही यह अभियान ठंडा पड़ जाता है। सालभर संदिग्ध गुणवत्ता की मिठाइयाँ और खाद्य पदार्थ खुलेआम बिकते रहते हैं।

जनचर्चाओं में यह आरोप भी सुनाई देते हैं कि नियमित निरीक्षण के बजाय कुछ अधिकारी पूरे वर्ष "सेटिंग" के जरिए काम चलाते हैं और त्योहारों के समय सिर्फ दिखावटी कार्रवाई की जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि करना आसान नहीं है, लेकिन जब जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आती, तो ऐसे आरोपों को बल जरूर मिलता है।

प्रशासन की जिम्मेदारी और पारदर्शिता की मांग

खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ नमूने लेना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना भी है। यदि जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, तो जनता का भरोसा बढ़ेगा और मिलावटखोरों में भी डर बनेगा।

क्या हो सकता है समाधान?

  • जांच रिपोर्ट विभागीय वेबसाइट या नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक की जाए
  • जिन दुकानों के नमूने फेल हों, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं
  • छोटी और बड़ी दुकानों में समान रूप से कार्रवाई हो
  • त्योहारों के साथ-साथ पूरे साल नियमित निरीक्षण हो
  • दोषियों पर त्वरित और दिखाई देने वाली दंडात्मक कार्रवाई की जाए
  • सकारात्मक शुरुआत, लेकिन भरोसा तभी बनेगा जब जवाबदेही होगी

इसमें कोई संदेह नहीं कि होली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता आमजन के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है और इसकी सराहना भी की जानी चाहिए। लेकिन केवल नमूने लेना पर्याप्त नहीं है। जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी और दोषियों पर ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता का भरोसा पूरी तरह कायम नहीं हो पाएगा।

प्रशासन के पास अब अवसर है कि वह इस अभियान को केवल त्योहारों की औपचारिकता न बनाकर एक स्थायी, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था में बदले। तभी कहा जा सकेगा कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था सचमुच आमजन के हित में काम कर रही है, न कि केवल त्योहारों तक सीमित एक रस्म बनकर रह गई है।

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