MP News: रीवा में डॉक्टर और सुपरवाइजर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए, जानिए 8000 रुपये के ट्रैप का पूरा राज
MP Lokayukta in Rewa: भ्रष्टाचार के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को मजबूती मिली है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों पर आज (3 नवंबर 2025) रीवा लोकायुक्त संभाग ने एक सफल ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर कर्चुलियान के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ कल्याण सिंह और सुपरवाइजर शिव शंकर तिवारी को 8000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता जय प्रकाश गुप्ता की शिकायत पर आधारित थी, जिन्होंने फर्स्ट एड क्लिनिक चलाने की अनुमति के लिए 10,000 रुपये की मांग का आरोप लगाया था।

उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। दोनों आरोपी गिरफ्तार हैं, और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो गया है। आइए, इस घटना की पूरी दास्तां को विस्तार से समझते हैं - शिकायत से ट्रैप तक, आरोपी की भूमिका और भविष्य की जांच।
फर्स्ट एड क्लिनिक की अनुमति के नाम पर रिश्वत की मांग
रीवा जिले का रायपुर कर्चुलियान तहसील एक ग्रामीण इलाका है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से समस्या बनी हुई है। ग्राम हटवा के निवासी जय प्रकाश गुप्ता (उम्र 42 वर्ष) एक छोटे व्यवसायी हैं, जो लंबे समय से फर्स्ट एड क्लिनिक खोलने का सपना देख रहे थे। 9 अक्टूबर 2025 को उन्होंने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि सीएचसी रायपुर कर्चुलियान के बीएमओ डॉ. कल्याण सिंह (उम्र 48 वर्ष) और सुपरवाइजर शिव शंकर तिवारी (उम्र 45 वर्ष) अनुमति देने के बदले कुल 10,000 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं।
जय प्रकाश ने बताया, "मैंने क्लिनिक के लिए सभी दस्तावेज जमा किए थे। लेकिन डॉ. सिंह ने कहा कि बिना पैसे के फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। तिवारी ने भी कहा कि 10,000 रुपये में सौदा पक्का। मैंने मना किया, तो फाइल अटक गई।" यह शिकायत स्वास्थ्य विभाग में आम समस्या को उजागर करती है, जहां ग्रामीण स्तर पर अनुमतियां रिश्वत के बिना मुश्किल साबित होती हैं। लोकायुक्त संभाग रीवा ने शिकायत प्राप्त होते ही सत्यापन टीम भेजी। सत्यापन के दौरान दोनों आरोपियों ने फोन पर रिश्वत की मांग दोहराई, जिसकी रिकॉर्डिंग की गई। यह पुष्टि के बाद ट्रैप की योजना बनी।
लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी नीति सख्त है। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता जरूरी है। यह कार्रवाई ग्रामीणों को न्याय दिलाने का उदाहरण है।" उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह ने मार्गदर्शन दिया कि कार्रवाई बिना किसी चूक के हो।
ट्रैप का ड्रामा: 3 नवंबर को रंगे हाथों धर दबोचे गए आरोपी
3 नवंबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे सीएचसी रायपुर कर्चुलियान में नाटकीय घटना घटी। लोकायुक्त की टीम ने जय प्रकाश को 8000 रुपये के साथ भेजा (शेष 2000 बाद में मांगे जाने की योजना थी)। टीम में ट्रैपकर्ता अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार, निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया और दो स्वतंत्र सरकारी गवाह शामिल थे। पुलिस अधीक्षक रीवा के निर्देशन में गठित इस दल ने केंद्र के बाहर निगरानी रखी।
जय प्रकाश ने बताया, "मैं डॉ. सिंह के चैंबर में गया। उन्होंने कहा कि 8000 रुपये पहले दे दो, फाइल साइन हो जाएगी। तिवारी भी आ गया और पैसे लेने को कहा। जैसे ही तिवारी ने नोट छुए, टीम ने दबिश दी।" डॉ. सिंह ने बचाव में कहा, "यह तो चाय-पानी का पैसा था," लेकिन रिश्वत की राशि जब्त हो चुकी थी। तिवारी ने चुप्पी साध ली। दोनों को लोकायुक्त कार्यालय ले जाया गया, जहां फॉर्मेलिटी पूरी की गई।
कार्रवाई के दौरान केंद्र में हड़कंप मच गया। स्टाफ ने अफवाहें उड़ाईं, लेकिन टीम ने सब संभाला। प्रवीण सिंह परिहार ने कहा, "सत्यापन से मांग पुष्ट हुई। रिश्वत लेते ही ट्रैप सफल।" निरीक्षक भदौरिया ने गवाहों के बयान दर्ज किए।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस, आगे की जांच
दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया, जो रिश्वत लेने के अपराध को कवर करता है। यह धारा 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान करती है। लोकायुक्त टीम कार्यवाही जारी रखे हुए है - दोनों की तलाशी ली गई, जहां से कुछ दस्तावेज बरामद हुए। पूछताछ में पता चला कि यह पहला मामला नहीं; अन्य क्लिनिक अनुमतियों में भी ऐसी मांगें हुई हैं।
रीवा एसपी ने कहा, "स्वास्थ्य विभाग में ऐसे मामलों की जांच तेज करेंगे। लोकायुक्त के साथ समन्वय से पारदर्शिता लाएंगे।" जिला कलेक्टर ने केंद्र पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जहां 2025 में अब तक 150 से अधिक ट्रैप हो चुके हैं।
ग्रामीणों की परेशानी, सरकार की चेतावनी
रीवा जैसे जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। सीएचसी रायपुर कर्चुलियान एक ऐसा ही केंद्र है, जहां डॉक्टरों की कमी और दवाओं का अभाव आम है। फर्स्ट एड क्लिनिक जैसी अनुमतियां ग्रामीणों के लिए वरदान हो सकती हैं, लेकिन रिश्वत की मांग बाधा। जय प्रकाश जैसे लोग हतोत्साहित हो जाते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "डॉक्टर साहब तो भगवान होते हैं, लेकिन पैसे के लिए सब कुछ।"
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने हाल ही में कहा, "भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। लोकायुक्त को पूर्ण स्वायत्तता दी है।" यह ट्रैप सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विपक्ष ने सराहना की, लेकिन मांग की कि स्वास्थ्य विभाग में ऑनलाइन अनुमति प्रक्रिया शुरू हो।
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