भोपाल में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर संकट: छात्राओं का आक्रोश, NSUI के साथ 8 घंटे का धरना
मध्य प्रदेश के राजधानी भोपाल में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल रही है। 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को अब तक मान्यता न मिलने के विरोध में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने स्वास्थ्य संचालनालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के नेतृत्व में लगभग 8 घंटे तक चले धरने में गुस्साई छात्राओं ने नर्सिंग डायरेक्टर की गाड़ी को घेर लिया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नए सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ाई जाएं या जिन कॉलेजों की मान्यता रद्द हुई है, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए। धरने के बाद मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह मौके पर पहुंचे और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।

प्रदर्शन का दौर: आक्रोश और धरना
स्वास्थ्य संचालनालय के बाहर भारी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने माहौल को गरमा दिया। NSUI पदाधिकारियों के साथ सैकड़ों नर्सिंग छात्राएं सड़क पर उतरीं। गुस्साई छात्राओं ने नर्सिंग डायरेक्टर की गाड़ी को घेरकर नारेबाजी की और सरकार की लापरवाही के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन सुबह से शुरू होकर लगभग 8 घंटे तक चला। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा, "सरकारी कॉलेजों को नजरअंदाज कर प्राइवेट संस्थानों को मनमाने तरीके से मान्यता देना नर्सिंग शिक्षा पर सवाल खड़े करता है। यह हजारों छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा रहा है।"
प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने चेतावनी दी, "यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो NSUI प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ देगी।" जिला उपाध्यक्ष अमित हाटिया ने कहा, "मांगें न मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन को बाध्य होंगे।" अन्य NSUI नेता रवि दांगी, सैयद अल्तमस, शुभम दरबार, लक्की चौबे, अभय रामभक्त, रितिक शर्मा, विकास पाटीदार, संदीप सोनगढ़े, सत्यम पांडे, शुभम बोराना, जतिन सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं। रजिस्ट्रार मुकेश सिंह के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन छात्राओं का कहना है कि अब ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
मान्यता संकट: क्यों फंसे हैं 13 सरकारी कॉलेज?
मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से विवादों में घिरी हुई है। 2025-26 सत्र के लिए 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को भारतीय नर्सिंग काउंसिल (INC) और मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) से मान्यता नहीं मिली। इन कॉलेजों में शैक्षणिक ढांचे की कमी है-कहीं प्राचार्य नहीं, कहीं फैकल्टी की भारी कमी, तो कहीं फर्जी दस्तावेजों से नियुक्तियां। ये कॉलेज कई मंत्रियों और बड़े नेताओं के गृह जिलों में स्थित हैं, जिससे राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।
प्रदेश में कुल 33 नए और 360 पुराने नर्सिंग कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन केवल 8 शासकीय कॉलेजों को ही मंजूरी मिली। NSUI का आरोप है कि अगस्त में 13 कॉलेजों की शिकायत की गई थी, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में है। PNST-2025 परीक्षा में 60,707 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 17,450 सफल हुए, लेकिन शासकीय कॉलेजों में सीटें खाली पड़ी हैं। प्रवेश की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर है, लेकिन बिना मान्यता के एडमिशन प्रक्रिया रुकी हुई है।
घोटालों की जड़ें गहरी
मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाला पुराना मुद्दा है। 2020 से CBI जांच चल रही है, जिसमें फर्जी फैकल्टी, किराए के कमरों में चलने वाले कॉलेज और रिश्वतखोरी उजागर हुई। 2024 में 66 कॉलेजों की मान्यता रद्द हुई, जबकि 2022 में 93। जनवरी 2025 में 294 कॉलेजों को मान्यता मिली, लेकिन सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता नहीं दी गई। 350 से अधिक कॉलेज अभी भी मान्यता का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बीएससी नर्सिंग की 20,000 सीटें प्रभावित हैं। NSUI ने मांग की है कि अपात्र अधिकारियों की सैलरी रोकी जाए और फर्जी नियुक्तियों की जांच हो।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:
- 13 शासकीय कॉलेजों को तत्काल मान्यता: ताकि छात्राओं का भविष्य सुरक्षित हो।
- सीटों में वृद्धि: नए सरकारी कॉलेजों में अतिरिक्त सीटें जोड़ी जाएं।
- वैकल्पिक राहत: रद्द मान्यताओं को बहाल किया जाए और फर्जी प्राइवेट कॉलेजों पर सख्ती हो।
- जांच और कार्रवाई: भ्रष्ट अधिकारियों पर एक्शन, जिसमें सैलरी रोकना शामिल।
NSUI ने कहा कि यह 60,000 से अधिक छात्राओं की लड़ाई है। यदि सरकार ने 30 अक्टूबर तक समाधान नहीं किया, तो सीएम हाउस घेराव और उग्र आंदोलन होगा।
आगे की राह: क्या बदलेगी व्यवस्था?
रजिस्ट्रार मुकेश सिंह का आश्वासन उम्मीद जगाता है, लेकिन छात्राओं का विश्वास टूट चुका है। मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने के लिए INC दिशानिर्देशों का सख्त पालन जरूरी है। सरकार ने पहले भी हाईकोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई की है, लेकिन घोटालों की जड़ें गहरी हैं। यह प्रदर्शन न केवल छात्राओं की आवाज है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र की सुधार की मांग।
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