रेत के ठेके को लेकर एमपी सरकार नई नीति बनाने में जुटी, PM आवास योजना के लिए मुफ्त रेत बांटने पर विचार
एमपी में इस साल विधानसभा चुनाव से पहले रेत की नई नीति को लागू किया जा सकता। इस नई नीति में तहसील स्तर पर रेत खदानों के समूह बनाकर नीलामी की जाएगी। नीलामी स्थानीय स्तर पर होगी। जिसके पूरे अधिकार कलेक्टर को रहेंगे।

सरकारी खजाने को भरने के लिए प्रदेश सरकार नई रेत नीति लाने की तैयारी में जुट गई है। जल्द ही प्रदेश में नई रेत नीति देखने को मिलेगी। इस बार जिले में एकल ठेका देने के स्थान पर राज्य की शिवराज सरकार तहसील एवं पंचायत स्तर पर छोटे-छोटे ठेके देने की तैयारी कर रही है। इससे रेत की उपलब्धता भी आसान होगी और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। खनिज संसाधन विभाग नीति का प्रारूप तैयार कर रहा है। इसमें जिला, तहसील और पंचायत स्तर पर ठेका देने के विकल्प पर और लाभ हानि व इसकी चुनौतियों को लेकर चर्चा की जा रही है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की रेत नीति के प्राविधानों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। विभाग में अधिकारियों का एक दल वहां की नीति को समझने के लिए उत्तर प्रदेश भेजा था। इसके अलावा PM आवास योजना के लिए मुफ्त रेत बांटने को लेकर भी विचार किया जा रहा हैं।

यूपी की रेत नीति से खासा प्रभावित हुए प्रमुख सचिव
हाल में ही प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश की रेत नीति को समझने गए थे और वे यूपी की रेत नीति से खासा प्रभावित हुए। उत्तर प्रदेश में ई-नाके और चौकियों से रेत के अवैध परिवहन व भंडारण पर नजर रखी जाती है। इससे रेत के अवैध कारोबार पर लगाम लगती है। साथ ही सरकार के खजाने में भी वृद्धि होती है। अभी यह व्यवस्था मध्य प्रदेश में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना मैं बनने वाले मकानों के लिए मुफ्त में रेत उपलब्ध करवाने पर भी विचार किया जा रहा है। बता दे कि वर्तमान में 12 ठेकों की अवधि 30 जून एवं 12 अन्य ठेकों की अवधि 30 अगस्त 2023 तक है।

नई रेत नीति के लिए विभाग ने दिए ये सुझाव
जिला स्तर पर राजस्व प्राप्ति की बेहतर संभावना है, लेकिन जिलेवार निविदा करने से छोटे उद्यमियों की सहभागिता नहीं होगी। ठेका असफल होने पर पूरे जिले की रेत आपूर्ति एवं शासन का राजस्व प्रभावित होगा। तहसील स्तर पर निविदा कराने पर छोटे उद्यमियों की सहभागिता बढ़ेगी ठेका सफल होने पर पूरे जिले की रेत आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी प्रतिस्पर्धा होने से बाजार दर पर नियंत्रण रहेगा। हालांकि इससे जिले में एक से अधिक है कि उन्हें पर बाजार नाकों पर नियंत्रण संबंधी विवाद और बाजार मूल्य पर नियंत्रण नहीं होगा। पंचायत द्वारा खदानों की नीलामी एवं ठेकेदारों के माध्यम से खदान का संचालन करने पर पंचायतों की खदान संचालन में सहभागिता होगी। स्थानीय रोजगार सृजित होगा। ऐसे राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

वर्तमान नीति में खामी और चुनौती
प्रदेश में वर्तमान में जारी रेत नीति से औसत खपत से लगभग दोगुनी मात्रा के ठेके हैं। समूह में शामिल कई खदानों की वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने में कठिनाई आई। इससे किस्त भरने में कठिनाई होती है। 22 जिलों के ठेके किस्त न भरने के कारण निरस्त हुए। ठेका निरस्त होने से संपूर्ण जिले की रेत आपूर्ति प्रभावित होती है और राजस्व को भारी नुकसान होता है। बड़े ठेके होने से अधिक साझेदार और आपसी विवाद होता है।

कलेक्टर को होंगे अधिकार
बता दे कि साल 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले रेत की नई नीति को लागू किया जा सकता। इस नई नीति में तहसील स्तर पर रेत खदानों के समूह बनाकर नीलामी की जाएगी। नीलामी स्थानीय स्तर पर होगी। जिसके पूरे अधिकार कलेक्टर को रहेंगे। यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शी तरीके से होगी। वर्षा काल के बाद कलेक्टर रेत सहित जिले में मौजूद अन्य खनिजों के भंडारण की स्थिति का भी आकलन शुरू कर देंगे।












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