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MP News: किसान सोयाबीन बेचने से पहले जरूर जान लें ये नियम, भावांतर योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ये काम

MP News Farmers: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सोयाबीन बिक्री को लेकर एक बेहद अहम खबर सामने आई है। भावांतर भुगतान योजना में हो रहे फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए सीहोर जिले की सभी कृषि उपज मंडियों में अब कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू कर दी गई है।

जिला कलेक्टर बालागुरु के के निर्देश पर मंडियों में वीडियोग्राफी और वीडियो सर्विलांस अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि केवल वास्तविक किसान ही अपनी उपज बेच सकें।

MP farmers must know these rules before selling soybean to prevent fraud in Bhavantar Yojana Mandis

मंडी गेट पर ही रिकॉर्ड हो रहा किसान और वाहन का डेटा

नई व्यवस्था के तहत अब जैसे ही किसान मंडी परिसर में प्रवेश करेगा, उसी समय किसान का चेहरा, ट्रैक्टर-ट्रॉली या वाहन का नंबर वीडियो में रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके साथ ही मंडी गेट पर किसान का पंजीकरण, आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका (किसान पासबुक) की सख्ती से जांच की जा रही है।

मंडी उपनिरीक्षक जगदीश मौर्य के अनुसार

"अब केवल पंजीकृत किसान, उसका बेटा या सगा भाई ही उपज बेच सकेगा। पहले कुछ व्यापारी किसानों के रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से अपनी उपज मंडी में बेच देते थे, जिससे शासन को करोड़ों का नुकसान होता था।"

वीडियो रिकॉर्डिंग से होगा पोर्टल डेटा का मिलान

प्रशासन ने साफ किया है कि मंडी में आए हर वाहन की संख्या और पोर्टल पर दर्ज बिक्री डेटा का वीडियो साक्ष्यों से मिलान किया जाएगा। इसके अलावा नोडल अधिकारियों को व्यापारियों के गोदाम और स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि किसी मंडी में अचानक उपज की आवक असामान्य रूप से बढ़ती है, तो उस मंडी की विशेष जांच की जाएगी।

किसानों में नाराजगी, लेकिन प्रशासन सख्त

नई व्यवस्था से जहां फर्जीवाड़ा रोकने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं कुछ किसानों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। किसानों का कहना है कि सख्ती के कारण मंडियों में लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे समय बर्बाद हो रहा है।
इसके अलावा कई किसानों का रकबा बड़ा है, लेकिन पूरी उपज एक ही ट्रैक्टर-ट्रॉली में नहीं आ पाती, जिससे उन्हें बार-बार मंडी आना पड़ रहा है।

15 जनवरी तक ही होगी सोयाबीन खरीदी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भावांतर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन बिक्री की अंतिम तारीख 15 जनवरी निर्धारित है। इसके बाद खरीदी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। जिला सहकारी विभाग के सचिव नरेंद्र महेश्वरी ने बताया कि अभी भी करीब 26 हजार किसानों की उपज खरीदी जानी बाकी है, जिसे समय-सीमा में पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "यह पूरी व्यवस्था केवल फर्जीवाड़ा रोकने और असली किसानों को लाभ दिलाने के लिए लागू की गई है। ईमानदार किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।"

किसानों के लिए जरूरी सलाह

  • मंडी आने से पहले पंजीकरण और दस्तावेज पूरे रखें
  • ट्रैक्टर-ट्रॉली या वाहन उसी किसान के नाम से हो
  • केवल अधिकृत व्यक्ति ही उपज बेचने आए
  • अंतिम तारीख 15 जनवरी से पहले ही सोयाबीन बिक्री सुनिश्चित करें

भावांतर योजना में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन की यह सख्ती लंबे समय में किसानों के हित में साबित हो सकती है। हालांकि शुरुआती दिक्कतों के बीच किसानों को नियमों का पालन करना जरूरी है, ताकि उन्हें अपनी उपज का पूरा और सही लाभ मिल सके।

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