MP News: बजट सत्र खत्म, दिल्ली पहुंचे सीएम मोहन यादव, क्या मध्य प्रदेश में होने वाला है बड़ा राजनीतिक फेरबदल?
MP Cabinet News: मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होते ही प्रदेश की सियासत में असामान्य हलचल शुरू हो गई। सत्ता के गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि सत्र समाप्त होने के कुछ घंटों के भीतर ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अचानक दिल्ली रवाना हो गए।
शनिवार सुबह दिल्ली में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अलग-अलग समय पर अमित शाह से मुलाकात की। इन ताबड़तोड़ बैठकों ने प्रदेश की राजनीति में संभावित बड़े बदलावों की अटकलों को और तेज कर दिया है।

देर रात दिल्ली रवाना, सुबह से बैठकों का दौर
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार रात को ही मुख्यमंत्री मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल दिल्ली के लिए निकल गए थे। शनिवार सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री ने अमित शाह से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती, आगामी चुनावों की रणनीति और मंत्रिमंडल विस्तार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके बाद प्रहलाद सिंह पटेल और कैलाश विजयवर्गीय ने भी गृह मंत्री से अलग-अलग मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि दोनों मंत्रियों ने पहले से समय मांगा था और शुक्रवार को ही उन्हें अपॉइंटमेंट मिल गया था।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी मुलाकात
दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। इस बैठक में मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किए जाने वाले संभावित नेताओं के नाम, संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की बात सामने आई है।
क्या जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार?
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, केंद्र में मोदी मंत्रिमंडल में अगले दो महीनों के भीतर बड़े बदलाव संभव हैं। इसके बाद राज्यों में भी संगठनात्मक और मंत्रिमंडलीय फेरबदल की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। मध्य प्रदेश में भी लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

निगम-मंडलों की अटकी नियुक्तियां
राजनीतिक गलियारों में एक और बड़ी चर्चा निगम-मंडलों की नियुक्तियों को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि लंबे समय से लंबित सूची इसी सप्ताह जारी हो सकती है।
पहली सूची में आदिवासी और दलित वर्ग के वरिष्ठ नेताओं को मंत्री दर्जा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम सामाजिक संतुलन साधने और पंचायत व नगरीय निकाय चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बजट सत्र के बाद क्यों बढ़ी सक्रियता?
बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने कर्ज, भ्रष्टाचार, आदिवासी विस्थापन और लाड़ली बहना योजना जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा था। सत्ता पक्ष ने भी जवाबी रणनीति अपनाई, लेकिन सत्र के तुरंत बाद शीर्ष नेतृत्व का दिल्ली कूच करना यह संकेत देता है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर समीक्षा चल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी अभी से रणनीतिक तैयारी में जुट गई है।
क्या बदलेंगे समीकरण?
दिल्ली में हुई ये मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रहीं। पार्टी सूत्रों के अनुसार:
- मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं प्रबल हैं।
- निगम-मंडलों की नियुक्तियों से संगठन में संतुलन साधा जाएगा।
- कुछ जिलों में संगठनात्मक बदलाव संभव हैं।
- अगर केंद्र में बदलाव होते हैं, तो उसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी दिख सकता है।
फिलहाल आधिकारिक तौर पर किसी बड़े निर्णय की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से बजट सत्र के तुरंत बाद प्रदेश के शीर्ष नेता दिल्ली पहुंचे और लगातार उच्चस्तरीय बैठकें हुईं, उससे साफ है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने की तैयारी चल रही है।
अगले कुछ दिनों में निगम-मंडलों की सूची और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर तस्वीर साफ हो सकती है।












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