Bhopal MP News: एशिया कप के बहाने भोपाल में क्रिकेट सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, पुलिस ने 50 लाख का माल किया जब्त
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के रोमांच के बीच अवैध सट्टेबाजी का काला कारोबार जोरों पर था। लेकिन पुलिस की सतर्कता ने इसे नेस्तनाबूद कर दिया। थाना अयोध्यानगर जोन-2 की पुलिस ने एक हाई-टेक ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा गिरोह पर शिकंजा कसते हुए बड़ी सफलता हासिल की।
गिरोह के कॉल सेंटर (बुक) पर दबिश देकर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि जब्त माल की कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि गिरोह के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो रहा था, जो इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर चलाया जा रहा था।

यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र (IPS) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी (IPS) के निर्देशों का नतीजा है, जो एशिया कप के दौरान सट्टेबाजी पर कड़ी निगरानी रख रहे थे।
यह गिरोह न केवल भोपाल तक सीमित था, बल्कि छत्तीसगढ़ के बालोदा बाजार, भाटापारा, रायपुर, शहडोल और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल जैसे जिलों से जुड़ा हुआ था। आरोपी फर्जी सिम, फर्जी अकाउंट्स और व्हाट्सएप के जरिए ट्रांजेक्शन करते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। पुलिस ने 15 लाख रुपये के ऑनलाइन अकाउंट्स फ्रीज कर लिए हैं, और आगे की जांच में और खुलासे होने की संभावना है। यह मामला साइबर क्राइम और जुआ कानून के खिलाफ एक संगठित रैकेट को उजागर करता है, जो युवाओं को लालच देकर फंसा रहा था।
गिरोह का हाई-टेक जाल: एशिया कप पर करोड़ों का सट्टा, टेलीग्राम से पैनल, रुद्र ऐप का इस्तेमाल
एशिया कप 2025 के मैचों के दौरान सट्टेबाजी का ज्वार चढ़ा हुआ था, और इस गिरोह ने इसका पूरा फायदा उठाया। आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर लोगों को आकर्षित किया, फिर टेलीग्राम के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग पैनल प्राप्त कर सट्टा चलाया। वे "महादेव" जैसे बैन हो चुके ऐप्स की तर्ज पर "रुद्र डायमंड" वेबसाइट पोर्टल का इस्तेमाल करते थे। यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) और भारतीय मुद्रा में भुगतान लेकर देशभर से ग्राहकों को आईडी प्रदान की जातीं, जिनके जरिए क्रिकेट मैचों पर दांव लगवाए जाते। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने महज कुछ महीनों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन किया, जिसमें एशिया कप के भारत-पाकिस्तान जैसे हाई-वोल्टेज मैचों पर सबसे ज्यादा सट्टा लगा।
आरोपी फर्जी अकाउंट्स में पैसे जमा करवाते, फिर उन्हें बेटिंग पॉइंट्स में बदल देते। पहचान छिपाने के लिए व्हाट्सएप पर कोडवर्ड्स का इस्तेमाल होता था। गिरोह के सदस्य एक-दूसरे से अलग-अलग रहते, ताकि कोई पकड़ा जाए तो चेन टूट न जाए। डायरी में हिसाब-किताब के रजिस्टर मिले, जो साबित करते हैं कि दैनिक लेन-देन लाखों में था। एक आरोपी ने कबूला, "कम समय में बड़ा पैसा कमाने का लालच हमें इस धंधे में खींच लाया।" यह रैकेट युवाओं को "आसान कमाई" का सपना दिखाकर फंसाता था, लेकिन ज्यादातर मामलों में ग्राहक उधार चुकाने के चक्रव्यूह में फंस जाते।
पुलिस की साहसिक कार्रवाई: मुखबीरों से सुराग, मीनाल से रैड, फ्लैट पर धावा
कार्रवाई की शुरुआत हाल ही में मिली मुखबिर सूचना से हुई। वरिष्ठ अधिकारियों - पुलिस उपायुक्त जोन-2 विवेक सिंह (IPS), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त गौतम सोलंकी, सहायक पुलिस आयुक्त एमपी नगर मनीष भारद्वाज (IPS) - के निर्देश पर थाना प्रभारी निरीक्षक महेश लिल्हारे की टीम ने मुखबीर तंत्र सक्रिय किया। एशिया कप मैचों के दौरान मीनाल क्षेत्र में कार में सट्टा संचालन कर रहे दो आरोपियों को मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी एटीएम कार्ड और नगदी के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने भोजपुर रोड स्थित आरआरजी टाउनशिप के रेसिडेंशियल फ्लैट में चल रहे कॉल सेंटर का राज खोल दिया।
टीम ने तुरंत रैड किया, जहां 5 अन्य आरोपी बुक संचालित करते मिले। मौके से नगदी 3.54 लाख रुपये, 2 कारें (हुंडई अलकाजार और आई-10), 40 स्मार्टफोन, 80 सिम कार्ड, 177 एटीएम कार्ड, 5 लैपटॉप, वाई-फाई राउटर, करेंसी काउंटिंग मशीन, अकाउंट स्कैनर और 1.5 करोड़ के लेन-देन के रजिस्टर जब्त किए गए। कुल मशरूका की कीमत 50 लाख रुपये आंकी गई। पुलिस ने 50 एटीएम कार्ड ब्लॉक कर 15 लाख रुपये फ्रीज करा लिए। आरोपी फ्लैट और कारों में जगह-जगह शिफ्ट होकर सट्टा चलाते थे, ताकि पकड़े न जाएं। यह कार्रवाई साइबर सेल की तकनीकी मदद से संभव हुई, जिसमें ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग का बड़ा रोल रहा।
गिरफ्तार आरोपी: छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश के युवा, बालोदा बाजार से मुख्य कनेक्शन
गिरोह के सभी 7 आरोपी युवा हैं, जो कम उम्र में ही इस अवैध धंधे में फंस चुके थे। वे छत्तीसगढ़ के बालोदा बाजार, भाटापारा, रायपुर, शहडोल और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल से ताल्लुक रखते हैं। मुख्य आरोपी बालोदा बाजार के निवासी हैं, जो नेटवर्क का केंद्र संभालते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे टेलीग्राम से पैनल लेते, फर्जी सिम और खातों से बुक चलाते। गिरोह का फोकस एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स पर था, जहां दांव लाखों में लगते।
कानूनी कार्रवाई: सट्टा एक्ट और बीएनएस के तहत केस, आगे की जांच
आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 415/25 के तहत धारा 4क सट्टा एक्ट और 112(2) बीएनएस दर्ज किया गया है। पुलिस ने संगठित अपराध के रूप में इसे रजिस्टर किया, और विवेचना जारी है। साइबर सेल फ्रीज अकाउंट्स से रिकवरी की कोशिश कर रही है। यह मामला अंतरराज्यीय होने से छत्तीसगढ़ पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रैकेट्स से जुड़े फर्जी अकाउंट्स को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भोपाल पुलिस की यह कार्रवाई मिसाल है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका: मनीष भारद्वाज से लेकर फील्ड स्टाफ तक
इस सफलता में सहायक पुलिस आयुक्त मनीष भारद्वाज (भापुसे), थाना प्रभारी महेश लिल्हारे, उनि. सुदीप देशमुख, सउनि. मनोज कछवाह, प्रआर. अमित व्यास (1177), बृजेश सिंह (3178), रुपेश सिंह जादौन (2233), भागवत कुशवाह (316), राजेंद्र राजपूत (1616), दिनेश मिश्रा (2307), अजय कुमार (3040), राजेश अनोटिया (3514), रोशनी जैन (म.प्र.आर 1706), मनमोहन (4548), सतीश यादव (3581), प्रदीप दामले (1055), राजेंद्र साहू (3615), और टेक्निकल सेल के भूपेंद्र उइके (3457), पल्लवी शर्मा (म.आर.3877) की भूमिका सराहनीय रही। पुलिस आयुक्त ने टीम को बधाई दी, और कहा कि सट्टेबाजी पर जीरो टॉलरेंस रहेगा।












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